SupernaturalIncident – वीराना की बाल कलाकार ने साझा किया चौंकाने वाला अनुभव
SupernaturalIncident – साल 1988 में रिलीज़ हुई हॉरर फिल्म ‘वीराना’ आज भी अपने डरावने दृश्यों और रहस्यमय माहौल के लिए याद की जाती है। इसी फिल्म में महज नौ साल की उम्र में काम करने वाली बाल कलाकार वैष्णवी ने हाल ही में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद हैदराबाद लौटने पर उनके साथ कुछ अजीब घटनाएं होने लगीं, जिन्हें वह आज तक भूल नहीं पाईं।

बचपन में शुरू हुआ अनजाना अनुभव
एक बातचीत के दौरान वैष्णवी ने कहा कि ‘वीराना’ में काम करना उनके लिए बड़ा अवसर था, लेकिन फिल्म के बाद की घटनाएं उन्हें अंदर तक डरा गईं। उनके मुताबिक, शूटिंग पूरी कर जब वह हैदराबाद वापस आईं, तब अचानक उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा। परिवार के लोगों ने महसूस किया कि वह रात में एक तय समय पर उठ जाती थीं और घर में इधर-उधर चलने लगती थीं।
उन्होंने बताया कि उस दौरान वह कुछ बुदबुदाती भी रहती थीं, हालांकि सुबह उन्हें कुछ याद नहीं रहता था। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा, जिससे घरवालों की चिंता बढ़ गई।
सड़क पर मिला एक अजीब अंडा
वैष्णवी ने अपने अनुभव से जुड़ा एक और प्रसंग बताया। उन्होंने कहा कि एक दिन स्कूल से लौटते समय उन्हें सड़क पर एक अंडा पड़ा मिला। उस अंडे पर हल्दी और कुमकुम लगा हुआ था। बचपन की जिज्ञासा में उन्होंने उसे उठाकर घर ले आईं।
घर पहुंचने पर जब उन्होंने यह बात अपनी घरेलू सहायिका को बताई, तो उन्होंने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी। सहायिका ने कहा कि ऐसे अंडों को हाथ नहीं लगाना चाहिए और उसे वापस किसी झाड़ी में रख आना चाहिए। खास तौर पर यह भी कहा गया कि अंडा टूटना नहीं चाहिए।
अंडा टूटने के बाद बढ़ी परेशानी
वैष्णवी के मुताबिक, जब वह अंडा वापस रखने जा रही थीं, तो वह गलती से टूट गया। इसके बाद से ही उनके साथ अजीब घटनाएं शुरू हो गईं। उन्होंने बताया कि लगभग एक महीने तक वह हर रात उठकर चलने लगती थीं।
उनके पिता उस समय मुंबई में थे, जबकि मां हैदराबाद में उनके साथ रहती थीं। एक रात जब उनकी मां और घरेलू सहायिका बगीचे में पानी डाल रही थीं, तब उन्होंने वैष्णवी को छत की ओर जाते देखा। वहां कोई सुरक्षा दीवार नहीं थी, जिससे खतरा और बढ़ गया था।
परिवार वालों ने बताया कि वह नींद की अवस्था में थीं और कुछ बोल भी रही थीं। स्थिति को देखते हुए घरवालों ने एहतियात के तौर पर उनके कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करना शुरू कर दिया, लेकिन वह दरवाजा खुलवाने की कोशिश करती थीं।
परिवार ने ली मदद
लगातार हो रही घटनाओं से चिंतित होकर परिवार ने मदद लेने का फैसला किया। वैष्णवी ने कहा कि बाद में उन्हें बताया गया कि कुछ लोग इस तरह के अंडों का उपयोग कथित तौर पर टोना-टोटका जैसे कामों में करते हैं। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन उस समय उनके परिवार ने इसे गंभीरता से लिया और विशेषज्ञों से सलाह ली।
करीब एक महीने बाद यह सिलसिला थम गया। वैष्णवी का कहना है कि वह दौर उनके और उनके परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण था। आज वह इसे अपने जीवन की एक रहस्यमय स्मृति के रूप में देखती हैं।
पुराने अनुभव पर आज की नजर
अब वर्षों बाद जब वह इस घटना को याद करती हैं, तो इसे एक अनोखे और डरावने अनुभव के तौर पर बताती हैं। उनका कहना है कि बचपन में हुई इन घटनाओं ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
हालांकि उन्होंने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का दावा नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि उस समय जो हुआ, वह उनके लिए सामान्य नहीं था। फिल्म ‘वीराना’ से जुड़ी उनकी पहचान के साथ यह निजी अनुभव भी अब चर्चा का हिस्सा बन चुका है।



