Vinod Khanna Family Secrets: विनोद खन्ना की दूसरी पत्नी ने सौतेले बेटों संग बॉन्डिंग पर तोड़ी चुप्पी
Vinod Khanna Family Secrets: भारतीय सिनेमा के इतिहास में विनोद खन्ना का नाम एक ऐसे नायक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने सफलता के शिखर पर पहुंचकर सबको चौंका दिया था। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से जादू चलाने वाले विनोद खन्ना की निजी जिंदगी किसी उतार-चढ़ाव भरी फिल्म की पटकथा जैसी रही है। उनके करियर के साथ-साथ उनकी (Personal Life Journey) ने भी प्रशंसकों को हमेशा उत्सुक रखा है। विनोद ने अपनी जीवन यात्रा में दो शादियां की थीं, जिनसे जुड़े कई अनछुए पहलू आज भी चर्चा का विषय बनते हैं।

पहली शादी और ओशो की ओर झुकाव
विनोद खन्ना की पहली शादी साल 1971 में गीतांजलि खन्ना के साथ हुई थी, जो उनके जीवन का एक सुखद अध्याय था। इस शादी से उन्हें दो बेटे, राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना मिले, जिन्होंने आगे चलकर (Bollywood Acting Career) में अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि, अस्सी के दशक के मध्य में विनोद खन्ना का झुकाव आध्यात्मिक गुरु ओशो की तरफ इतना बढ़ गया कि उन्होंने ग्लैमर की दुनिया छोड़ दी। इस आध्यात्मिक मोड़ ने उनके वैवाहिक जीवन में दूरियां पैदा कर दीं और 1985 में गीतांजलि और विनोद अलग हो गए।
दूसरी पत्नी कविता खन्ना के साथ नया सफर
सन्यास से लौटने के बाद विनोद खन्ना ने एक बार फिर गृहस्थ जीवन की ओर रुख किया और 1990 में कविता खन्ना के साथ विवाह बंधन में बंध गए। इस दूसरी शादी से उन्हें दो बच्चे, साक्षी और श्रद्धा खन्ना हुए। कविता खन्ना ने विनोद के जीवन के (Second Marriage Phase) को बहुत ही गरिमा के साथ संभाला। हाल ही में एक भावुक इंटरव्यू के दौरान कविता ने उन तमाम कयासों और सवालों पर विराम लगा दिया, जो अक्सर एक सौतेली मां और बेटों के रिश्ते को लेकर समाज में उठाए जाते हैं।
सौतेले बेटों संग रिश्ते की सच्चाई
कविता खन्ना ने लवीना टंडन के साथ बातचीत में राहुल और अक्षय खन्ना के साथ अपनी बॉन्डिंग पर खुलकर बात की। उन्होंने बड़ी सादगी से कहा कि राहुल और अक्षय मेरे अपने थे क्योंकि वे विनोद के अंश थे। कविता के अनुसार (Step Mother Relationship) को लेकर उनका नजरिया बिल्कुल स्पष्ट था। उन्होंने स्वीकार किया कि अक्षय और राहुल को उनका होना ही था, लेकिन उन्होंने कभी उन पर अपना अधिकार जमाने या उनकी सगी मां की जगह लेने की कोशिश नहीं की।
मां की जगह लेने की नहीं की कोशिश
रिश्तों की संवेदनशीलता को समझते हुए कविता ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर कभी बच्चों की ‘मां’ बनने का प्रयास नहीं किया। उनका मानना था कि (Biological Mother Connection) की जगह कोई और नहीं ले सकता। कविता ने कहा कि राहुल और अक्षय के पास पहले से ही दुनिया की सबसे अच्छी मां मौजूद थी। उन्होंने एक दोस्त और मार्गदर्शक की भूमिका निभाना ज्यादा बेहतर समझा, जिससे परिवार के भीतर कभी कड़वाहट पैदा नहीं हुई और बच्चे भी उनके साथ सहज रहे।
गीतांजलि और कविता के बीच अनोखी दोस्ती
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि किसी पति की पहली और दूसरी पत्नी के बीच केवल ईर्ष्या ही हो सकती है, लेकिन कविता खन्ना ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उन्होंने बताया कि गीतांजलि खन्ना और उनके बीच (Friendly Relationship Bond) काफी मजबूत था। उनके बीच कोई मनमुटाव नहीं था, बल्कि वे एक-दूसरे का बहुत सम्मान करती थीं। कविता ने साझा किया कि समाज की बातों का उन पर कभी असर नहीं पड़ा क्योंकि वे दोनों ही अपने जीवन के फैसलों को लेकर काफी परिपक्व थीं।
समझदारी और मर्यादा की सीमाएं
कविता खन्ना ने जीवन के कड़वे सच को स्वीकार करते हुए बताया कि एक समझदार वयस्क के रूप में उन्होंने मर्यादाओं का पालन किया। उन्होंने कहा कि (Mature Life Choices) ही इंसान को आगे ले जाती हैं। कविता के अनुसार, उन्होंने और गीतांजलि ने समझदारी से व्यवहार किया और जो भी चुनाव किए, उन पर अडिग रहीं। यही कारण रहा कि विनोद खन्ना का पूरा परिवार अलग-अलग मांओं की संतान होने के बावजूद हमेशा एक सूत्र में बंधा नजर आया, जो आज के समय में विरले ही देखने को मिलता है।
परियों की कहानी जैसा वास्तविक जीवन
विनोद खन्ना के निधन के बाद भी उनका परिवार जिस एकजुटता को प्रदर्शित करता है, वह कविता खन्ना की सूझबूझ का ही परिणाम है। उन्होंने अपने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि (Family Values Integrity) को बनाए रखना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। आज राहुल, अक्षय, साक्षी और श्रद्धा के बीच जो प्रेम दिखता है, उसके पीछे कविता और गीतांजलि के बीच का वह मौन समझौता और सम्मान था, जिसने नफरत को कभी पनपने नहीं दिया। यह कहानी किसी परियों की गाथा से कम नहीं है, जहां कड़वाहट पर प्यार की जीत हुई।



