स्वास्थ्य

Childhood Obesity and Heart Health: डरा रहा है मासूमों के स्वास्थ्य पर मंडराता ‘साइलेंट किलर’ का साया

Childhood Obesity and Heart Health: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय से एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों हर रोज औसतन चार बच्चे ऐसे पहुंच रहे हैं, जो गंभीर रूप से (Childhood Obesity) का शिकार हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में बढ़ता वजन अब केवल दिखावट की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह उनके जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते बच्चों की जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ी को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ेगा।

Childhood Obesity and Heart Health
Childhood Obesity and Heart Health

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और बेवक्त खाने की घातक आदत

आज के डिजिटल युग में फूड डिलीवरी एप्स की आसान उपलब्धता बच्चों के स्वास्थ्य के लिए दुश्मन साबित हो रही है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार के अनुसार, (Unhealthy Eating Habits) के कारण बच्चों में दिन और रात का अंतर खत्म होता जा रहा है। रात के सन्नाटे में जब शरीर को आराम की जरूरत होती है, तब बच्चे जंक फूड का सेवन कर रहे हैं। लंबे समय तक असमय भोजन करने की यह प्रवृत्ति बच्चों के मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह बिगाड़ रही है, जिसके परिणाम स्वरूप कम उम्र में ही उनका वजन अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगा है।

देर रात तक स्क्रीन की लत और अनिद्रा का चक्र

बच्चों में बढ़ते मोटापे का एक बड़ा कारण देर रात तक जागकर फोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर ऑनलाइन गेम खेलना है। डॉक्टर बताते हैं कि जब बच्चा (Sedentary Lifestyle) अपना लेता है और शारीरिक गतिविधियों से दूर हो जाता है, तो उसका शरीर कैलोरी बर्न नहीं कर पाता। एक महीने से अधिक समय तक लगातार देर रात तक जागने और गैजेट्स का उपयोग करने से यह एक लत बन जाती है। अनिद्रा की वजह से बच्चों के शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो अंततः उन्हें बेवक्त खाने के लिए उकसाते हैं और मोटापे की ओर धकेल देते हैं।

हृदयघात और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ता जोखिम

मोटापे से ग्रसित बच्चों में अब वह बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जो पहले केवल बुजुर्गों में पाई जाती थीं। शरीर में बढ़ा हुआ (High Cholesterol Levels) सीधे तौर पर हृदय की धमनियों को प्रभावित कर रहा है। धमनियों में वसा का जमाव होने से रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे मासूम बच्चों में भी हृदयघात यानी हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ गया है। विशेषज्ञ इसे एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह देख रहे हैं, जो धीरे-धीरे बच्चों के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा रहा है और उनके भविष्य को अंधकारमय बना रहा है।

लिवर सिरोसिस और ऑर्गन फेलियर की डरावनी हकीकत

मोटापे का असर केवल हृदय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के लिवर को भी बुरी तरह डैमेज कर रहा है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि ओबेसिटी के कारण बच्चों में (Liver Cirrhosis Risk) बढ़ता जा रहा है, जो आगे चलकर लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। चिकित्सकीय परीक्षणों में ऐसे बच्चों के लिवर एंजाइम जैसे एसजीपीटी (SGPT) और एसजीओटी (SGOT) का स्तर सामान्य से कहीं अधिक पाया जा रहा है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संरक्षित यानी प्रोसेस्ड फूड में मौजूद केमिकल्स बच्चों के कोमल अंगों को अंदर से खोखला कर रहे हैं।

सुस्त दिनचर्या और गिरता अकादमिक प्रदर्शन

चिकित्सकों ने एक और चौंकाने वाला पहलू उजागर किया है कि मोटापा बच्चों की पढ़ाई और स्कूल में उनके व्यवहार को भी प्रभावित कर रहा है। (Academic Performance Decline) का मुख्य कारण मोटापे की वजह से होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं, जो बच्चों को आलसी बना देते हैं। कक्षा में शिक्षक अक्सर ऐसे बच्चों के सुस्त रहने या सोते रहने की शिकायत करते हैं। एकाग्रता की कमी और हर वक्त थकान महसूस करने के कारण इन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता, जिससे उनका आत्मविश्वास भी कम होने लगता है और वे मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।

पैकेट बंद भोजन और प्रिजर्वेटिव्स का जहर

आजकल के बच्चे घर के बने ताजे खाने के बजाय पैकेट बंद और संरक्षित खाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। डॉ. अशोक के मुताबिक, (Processed Food Consumption) बच्चों के तेजी से वजन बढ़ने का सबसे मुख्य कारण है। इन खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो वजन को रॉकेट की रफ्तार से बढ़ाती है। इसके साथ ही, डायबिटीज और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए यह खान-पान और भी अधिक जानलेवा साबित हो रहा है, क्योंकि यह उनकी दवाओं के असर को भी कम कर देता है।

अभिभावकों के लिए बचाव के कारगर उपाय

बच्चों को इस खतरनाक चक्र से बाहर निकालने की जिम्मेदारी पूरी तरह अभिभावकों पर है। डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि सबसे पहले (Healthy Lifestyle Changes) को लागू करना अनिवार्य है। बच्चों के सोने और जागने के साथ-साथ उनके भोजन की एक सख्त समयसारिणी तैयार करनी चाहिए। बच्चों को हर दिन कम से कम 45 मिनट तक कड़ी शारीरिक मेहनत या व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही, घर में पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगानी चाहिए ताकि बच्चों को केवल ताजा और पौष्टिक आहार ही मिले।

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