स्वास्थ्य

Fruit and Milk Combination: आयुर्वेद के अनुसार फल और दूध का मेल, जानें क्या है सही और क्या गलत…

Fruit and Milk Combination: फल और दूध का एक साथ सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक, यह बहस काफी पुरानी है। जहां आधुनिक आहार विज्ञान अक्सर इसे एक बेहतरीन स्मूदी या शेक के रूप में देखता है, वहीं प्राचीन आयुर्वेद इसे लेकर काफी सतर्क रहने की सलाह देता है। प्रसिद्ध न्यूट्रिशनिस्ट डिंपल जांगड़ा के अनुसार, समस्या स्वयं फल या दूध में नहीं है, बल्कि उनके गलत तरीके से किए गए मिलावट में है। यदि हम आयुर्वेदिक सिद्धांतों को गहराई से समझें और सही फलों का चुनाव करें, तो (Nutritional Synergy) के माध्यम से यह संयोजन शरीर को अद्भुत ऊर्जा और पोषण प्रदान कर सकता है, अन्यथा यह पाचन तंत्र के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।

Fruit and Milk Combination
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आयुर्वेद के चार स्तंभ: रस, वीर्य, विपाक और गुण

आयुर्वेद किसी भी खाद्य पदार्थ के प्रभाव को समझने के लिए चार प्रमुख पैमानों का उपयोग करता है। इसमें ‘रस’ भोजन के स्वाद को दर्शाता है, जबकि ‘वीर्य’ उसकी तासीर यानी ठंडी या गर्म प्रकृति को बताता है। इसके अलावा ‘विपाक’ पाचन के बाद शरीर पर होने वाले अंतिम प्रभाव को कहते हैं और ‘गुण’ भोजन की प्रकृति जैसे हल्का या भारी होना निर्धारित करता है। दूध स्वभाव से मीठा, ठंडा और पचने में भारी होता है, इसलिए (Digestive Compatibility) सुनिश्चित करने के लिए इसके साथ केवल उन्हीं फलों का मेल सही बैठता है जिनकी तासीर और गुण दूध के समान ही शीतल और मधुर हों।

दूध के साथ किन फलों का सेवन है पूरी तरह सुरक्षित?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, पके हुए और मीठे फल दूध के साथ लेने पर शरीर में किसी प्रकार का विषैला प्रभाव नहीं छोड़ते। पूरी तरह पका हुआ आम, केला, चीकू और एवोकाडो जैसे फल दूध के गुणों के अनुकूल होते हैं। ये फल पेट के भीतर जाकर फर्मेंटेशन यानी खमीर पैदा नहीं करते, जिससे पाचन सुचारू बना रहता है। यही कारण है कि भारतीय घरों में (Mango Milkshake) का सेवन पारंपरिक रूप से बेहद लोकप्रिय और स्वीकार्य माना गया है, क्योंकि पका हुआ आम दूध की मिठास और ठंडक के साथ पूरी तरह घुलमिल जाता है।

खट्टे फलों और दूध का मेल क्यों है खतरनाक?

अक्सर लोग स्वाद के चक्कर में संतरे, मौसंबी, अनानास या स्ट्रॉबेरी जैसे खट्टे फलों को दूध के साथ मिला लेते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बड़ी भूल है। ये फल खट्टे होने के साथ-साथ गर्म तासीर वाले होते हैं, जो दूध के संपर्क में आते ही उसे फाड़ देते हैं या शरीर के भीतर (Incompatible Dietary Habits) का निर्माण करते हैं। इस गलत कॉम्बिनेशन के कारण व्यक्ति को पेट में गैस, भारीपन, सूजन और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने से त्वचा संबंधी रोग और एलर्जी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

विरुद्ध आहार से शरीर में जमा होते हैं टॉक्सिन्स

डिंपल जांगड़ा चेतावनी देती हैं कि जब हम लगातार ‘विरुद्ध आहार’ यानी एक-दूसरे के विपरीत स्वभाव वाले भोजन का सेवन करते हैं, तो हमारा मेटाबॉलिज्म कमजोर होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में ‘आम’ यानी (Toxic Substance Accumulation) होने लगता है, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक विज्ञान है। इसलिए शेक या स्मूदी बनाते समय केवल स्वाद पर ध्यान न देकर फलों की प्रकृति को समझना अनिवार्य है।

पोषण के लिए सही चुनाव और विशेषज्ञ की सलाह

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि दूध और फल का साथ में सेवन करना गलत नहीं है, बशर्ते आप सही फलों का चुनाव करें। सही संयोजन न केवल आपके शरीर को ऊर्जा देता है बल्कि (Healthy Lifestyle Adaptation) में भी मदद करता है। गलत मेल आपके पाचन अग्नि को मंद कर सकता है, जिससे शरीर को भोजन से मिलने वाला पोषण नहीं मिल पाता। यदि आपको पाचन से जुड़ी कोई पुरानी समस्या है, तो किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही अपनी डाइट में ऐसे बदलाव करने चाहिए।

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