स्वास्थ्य

Health Risks of Bonfire in Winter: कड़कड़ाती ठंड में अंगीठी का सुकून बन सकता है जानलेवा, जरा सी लापरवाही से बुझ सकती है जीवन की लौ

Health Risks of Bonfire in Winter: दिसंबर और जनवरी की भीषण लहर के बीच खुद को सुरक्षित रखने के लिए सड़क किनारे या घरों में आग तापते लोग एक आम नजारा हैं। कड़ाके की ठंड में जलती हुई लकड़ियों या अंगीठी के पास बैठना न केवल जिस्म को गर्माहट देता है, बल्कि मानसिक सुकून भी प्रदान करता है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि (Winter Health Hazards) के रूप में यह सुकून आपकी सेहत के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकता है। आग से निकलने वाला धुआं और अदृश्य गैसें आपके श्वसन तंत्र और हृदय पर चुपचाप हमला करती हैं, जिसकी कीमत जान देकर भी चुकानी पड़ सकती है।

Health Risks of Bonfire in Winter
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इनडोर एयर क्वालिटी और जहरीले कणों का तांडव

लकड़ी या कोयला जलाने पर हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड, पीएम 2.5 (सूक्ष्म कण) और कई हानिकारक कार्बनिक यौगिक घुल जाते हैं। यह धुआं घर के भीतर की हवा को किसी रासायनिक चैंबर की तरह जहरीला बना देता है। (Indoor Air Pollution Impacts) के कारण लंबे समय तक इस वातावरण में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हवा में मौजूद ये सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक जाकर जम जाते हैं, जिससे शरीर का ऑक्सीजन सोखने का तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है।

सांस की नलियों में सूजन और गंभीर संक्रमण

आग का धुआं फेफड़ों और श्वसन प्रणाली के लिए किसी जहर से कम नहीं है। धुएं के सीधे संपर्क में आने से गले में जलन, लगातार खांसी और सांस लेने में भारीपन महसूस होने लगता है। (Respiratory System Complications) के शिकार लोगों, विशेषकर जिन्हें अस्थमा या सीओपीडी (COPD) की शिकायत है, उनके लिए अंगीठी के पास बैठना जानलेवा हो सकता है। धुएं में मौजूद बारीक कण फेफड़ों की नसों में सूजन पैदा कर देते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और व्यक्ति को घुटन महसूस होने लगती है।

कार्बन मोनोऑक्साइड: बिस्तर में सोता हुआ खामोश कातिल

सर्दियों में बंद कमरों के भीतर अंगीठी या कोयला जलाकर सोना सबसे बड़ी भूल साबित होती है। लकड़ी के अधूरे दहन से उत्पन्न होने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसका पता लगाना नामुमकिन होता है। (Carbon Monoxide Poisoning Risks) के कारण व्यक्ति को गहरी नींद में ही सिरदर्द, चक्कर और मतली महसूस होने लगती है। गंभीर मामलों में यह गैस रक्त में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है, जिससे मस्तिष्क स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है या नींद में ही व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।

आंखों की रोशनी और त्वचा की नमी पर प्रहार

आग की लपटों के बहुत करीब बैठने का बुरा असर हमारी आंखों और स्किन पर भी पड़ता है। धुएं में मौजूद रासायनिक कण आंखों में पानी आना, लालपन, सूजन और गंभीर ड्राईनेस पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही (Dermatological Irritation Factors) के कारण त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है, जिससे खुजली और रैशेज की समस्या बढ़ जाती है। लंबे समय तक आग के धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों की त्वचा समय से पहले बूढ़ी और बेजान दिखने लगती है, क्योंकि धुआं स्किन के रोमछिद्रों को बंद कर देता है।

दिल के मरीजों के लिए 70 प्रतिशत बढ़ा खतरा

हार्ट के मरीजों के लिए आग तापने की यह आदत किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। जब धुएं के जहरीले कण सांस के जरिए खून में प्रवेश करते हैं, तो वे रक्त को गाढ़ा कर देते हैं और धमनियों में दबाव बढ़ाते हैं। (Cardiovascular Disease Risk) की स्टडीज बताती हैं कि आग के पास ज्यादा देर बैठने से अनियमित धड़कन और हार्ट अटैक का खतरा 70 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। विशेष रूप से उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित बुजुर्गों को आग के धुएं से कोसों दूर रहने की सलाह दी जाती है।

गीली लकड़ी और प्लास्टिक का दहन है महापाप

अक्सर लोग आग को तेज करने के लिए उसमें प्लास्टिक, रबर या गीली लकड़ियां डाल देते हैं, जो सबसे ज्यादा जहरीला धुआं पैदा करती हैं। (Environmental Safety Standards) के विरुद्ध ऐसी चीजों को जलाना हवा में घातक रसायनों की मात्रा को बढ़ा देता है। गीली लकड़ी से निकलने वाला घना धुआं फेफड़ों के ऊतकों को तुरंत नुकसान पहुंचाता है। अगर आप आग जला ही रहे हैं, तो हमेशा सूखी और साफ लकड़ी का ही चुनाव करें ताकि धुएं की मात्रा कम से कम हो और जहरीली गैसों का उत्सर्जन सीमित रहे।

बचाव के सूत्र: कैसे रहें सुरक्षित और गर्म

अगर ठंड के कारण आग जलाना आपकी मजबूरी है, तो कुछ सावधानियां बरतकर आप खतरों को कम कर सकते हैं। हमेशा (Safe Bonfire Practices) अपनाते हुए आग से कम से कम 3 से 5 फीट की दूरी पर बैठें। कोशिश करें कि हवा की दिशा आपकी पीठ की तरफ हो, ताकि धुआं सीधे आपके चेहरे और नाक तक न पहुंचे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी बंद कमरे या बिना वेंटिलेशन वाली जगह पर आग न जलाएं। खिड़की-दरवाजे खुले रखने से जहरीली गैसें बाहर निकलती रहती हैं और ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है।

बच्चे और बुजुर्ग: विशेष सुरक्षा की दरकार

परिवार के संवेदनशील सदस्यों जैसे बच्चों और बुजुर्गों को आग के धुएं से बचाना अनिवार्य है। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए (Vulnerable Group Protection) के तहत उन्हें धुएं से दूर रखना चाहिए। बुजुर्गों में पहले से ही सांस की बीमारियां हो सकती हैं, जो धुएं के कारण अचानक गंभीर रूप ले सकती हैं। अगर आग तापने के दौरान किसी को भी सिरदर्द या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत ताजी हवा में जाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

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