स्वास्थ्य

HPV Vaccine Myths and Facts: कैंसर को पैदा होने से पहले ही कुचल देगी ये वैक्सीन, अफवाहों को मारिए गोली और जान लीजिए असली सच

HPV Vaccine Myths and Facts: हर साल जनवरी का महीना दुनिया भर में ‘गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरूकता माह’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि महिलाओं को इस जानलेवा बीमारी के प्रति सचेत किया जा सके। भारत में स्थिति काफी चिंताजनक है क्योंकि यहाँ (Cervical Cancer Awareness Month 2026) के दौरान यह तथ्य सामने आता है कि महिलाओं में होने वाली कैंसर से जुड़ी मौतों में सर्वाइकल कैंसर सबसे आगे है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास इसका अचूक इलाज और रोकथाम के साधन मौजूद हैं, फिर भी जानकारी के अभाव में कई महिलाएं दम तोड़ देती हैं।

HPV Vaccine Myths and Facts
HPV Vaccine Myths and Facts

हयूमैन पैपिलोमा वायरस और बचाव का रास्ता

सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण हयूमैन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी (HPV) है, जो एक खामोश दुश्मन की तरह शरीर पर हमला करता है। अच्छी खबर यह है कि सही समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के जरिए इस (Cancer Prevention Strategies) को पूरी तरह सफल बनाया जा सकता है। सीके बिरला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति रहेजा के अनुसार, अगर हम शुरुआती दौर में ही सतर्क हो जाएं, तो इस कैंसर को पनपने से पहले ही रोका जा सकता है।

मिथक एक: क्या वैक्सीन केवल शारीरिक रूप से सक्रिय महिलाओं के लिए है?

समाज में यह बहुत बड़ा भ्रम फैला हुआ है कि एचपीवी वैक्सीन केवल उन्हीं महिलाओं को लगवानी चाहिए जो शारीरिक रूप से सक्रिय हैं। डॉ. रहेजा इस मिथक को सिरे से खारिज करती हैं और बताती हैं कि (HPV Vaccine Effectiveness) का सबसे बेहतरीन परिणाम तब मिलता है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले ही लगा लिया जाए। डॉक्टरों के अनुसार, 9 से 14 साल की उम्र इस टीकाकरण के लिए सबसे सटीक मानी जाती है क्योंकि इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे मजबूत होती है।

मिथक दो: क्या टीकाकरण से व्यवहार में बदलाव आता है?

कुछ लोगों का यह तर्क है कि कम उम्र में यह वैक्सीन लगवाने से बच्चों के व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसका कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह वैक्सीन केवल एक (Preventive Healthcare Measure) है, ठीक वैसे ही जैसे हम बचपन में पोलियो या हेपेटाइटिस के टीके लगवाते हैं। इसका उद्देश्य केवल बीमारी के वायरस को रोकना है, न कि किसी के व्यक्तिगत आचरण या सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करना। यह माता-पिता की दूरदर्शिता है जो अपनी बेटी के भविष्य को कैंसर मुक्त बनाती है।

मिथक तीन: शादी या बच्चे होने के बाद वैक्सीन बेअसर है?

एक आम धारणा यह भी है कि विवाह या मां बनने के बाद वैक्सीन लेने का कोई लाभ नहीं मिलता। सच्चाई यह है कि हालांकि यह वैक्सीन मौजूदा संक्रमण को ठीक नहीं करती, लेकिन यह उन अन्य एचपीवी स्ट्रेस से (Long Term Immunity) प्रदान करती है जिनसे महिला अभी तक संक्रमित नहीं हुई है। 26 साल तक की महिलाएं और कुछ विशेष परिस्थितियों में उससे अधिक उम्र की महिलाएं भी डॉक्टर की सलाह पर यह टीका लगवा सकती हैं और खुद को भविष्य के जोखिमों से सुरक्षित कर सकती हैं।

सुरक्षा और प्रभावशीलता पर विशेषज्ञों की राय

अक्सर माता-पिता वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर डरे रहते हैं, जबकि दुनिया भर में करोड़ों महिलाएं इसे लगवा चुकी हैं। डॉ. तृप्ति रहेजा के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह से (Safe and Effective Vaccination) की श्रेणी में आती है और इसे शरीर बहुत अच्छे से सहन कर लेता है। भारत जैसे देश में जहां कैंसर स्क्रीनिंग की दर बहुत कम है, वहां यह वैक्सीन भविष्य में कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने का सबसे प्रभावी और सस्ता जरिया साबित हो सकती है।

कौन लगवा सकता है यह जीवन रक्षक वैक्सीन?

इस वैक्सीन के लाभार्थियों की सूची स्पष्ट है, जिसमें 9 से 14 साल के बच्चे प्राथमिकता पर हैं क्योंकि उन्हें केवल दो डोज की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 15 से 26 साल की किशोरियां और युवा महिलाएं भी (Candidate for HPV Vaccine) हो सकती हैं। विशेषकर वे महिलाएं जिनमें पहले कभी एचपीवी संक्रमण नहीं हुआ है, उनके लिए यह एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह याद रखना जरूरी है कि वैक्सीन स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं बल्कि उसका पूरक है।

जागरूक समाज और स्वस्थ महिलाओं का भविष्य

अंततः, सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे हर घर की चर्चा का हिस्सा बनाना होगा। सही जानकारी और (Women Health Empowerment) के जरिए हम भारत में कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। समय पर लिया गया वैक्सीनेशन का फैसला किसी भी महिला को एक स्वस्थ और लंबा जीवन जीने का अधिकार देता है। यह डर छोड़कर विज्ञान पर भरोसा करने और अपनी आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित कल देने का समय है।

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