स्वास्थ्य

HypnicJerk – आखिर किस घटना के संकेत देता है नींद में झटका लगने का अनुभव…

HypnicJerk – रात को नींद लगते ही अचानक ऐसा महसूस होना कि जैसे शरीर झटके से हिल गया हो, या मानो किसी ऊँचाई से गिर रहे हों—यह अनुभव बहुत से लोगों ने कभी न कभी जरूर महसूस किया होगा। कई बार इस झटके के साथ नींद टूट जाती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। अक्सर लोग इसे किसी गंभीर बीमारी, मानसिक परेशानी या तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी से जोड़कर घबरा जाते हैं। लेकिन चिकित्सा शोध और नींद से जुड़े अध्ययनों के अनुसार, यह स्थिति अधिकांश मामलों में सामान्य मानी जाती है।

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नींद में झटका लगना क्या होता है

नींद में अचानक मांसपेशियों का सिकुड़ जाना या शरीर का झटके से हिलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में हाइपनिक जर्क कहा जाता है। इसे स्लीप स्टार्ट भी कहा जाता है। यह आमतौर पर तब होता है, जब व्यक्ति गहरी नींद में जाने की प्रक्रिया में होता है। इस दौरान दिमाग और शरीर के बीच तालमेल में कुछ क्षणों के लिए असंतुलन पैदा हो जाता है।

दिमाग और शरीर के बीच तालमेल कैसे बिगड़ता है

जब हम सोने लगते हैं, तो मस्तिष्क धीरे-धीरे सतर्क अवस्था से आराम की अवस्था में जाता है। इसी समय नर्वस सिस्टम शरीर को शांत करने लगता है और मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। कई बार शरीर यह बदलाव तेजी से करता है, जबकि दिमाग अभी पूरी तरह नींद के लिए तैयार नहीं होता। ऐसे में मस्तिष्क को यह भ्रम हो सकता है कि शरीर गिर रहा है या संतुलन खो रहा है। प्रतिक्रिया स्वरूप दिमाग मांसपेशियों को अचानक सक्रिय कर देता है, जिससे झटका महसूस होता है।

किन लोगों में ज्यादा होता है यह अनुभव

रिसर्च बताती है कि हाइपनिक जर्क बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह युवाओं में अधिक देखा जाता है। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, पढ़ाई या काम का तनाव और मोबाइल या लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग इसके पीछे प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ इसकी आवृत्ति अपने आप कम भी हो सकती है।

रोजमर्रा की आदतें भी बन सकती हैं वजह

कई मामलों में यह झटका किसी बीमारी के कारण नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली से जुड़ा होता है। जरूरत से ज्यादा थकान, नींद पूरी न होना, मानसिक तनाव, सोने से पहले चाय या कॉफी पीना, निकोटिन का सेवन और देर रात भारी व्यायाम करना—ये सभी कारक हाइपनिक जर्क की संभावना बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से भी दिमाग जरूरत से ज्यादा सक्रिय बना रहता है, जिससे नींद की प्रक्रिया बाधित होती है।

क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत है

अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि कभी-कभार नींद में झटका लगना सामान्य है और इससे घबराने की जरूरत नहीं होती। यह किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी या मानसिक विकार का सीधा संकेत नहीं माना जाता। लेकिन अगर यह समस्या बहुत बार होने लगे, नींद बार-बार टूटे या दिन में भी झटके महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में अन्य कारणों की जांच की जा सकती है।

इससे बचने के लिए क्या करें

इस समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है एक नियमित और शांत दिनचर्या अपनाना। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूरी बनाएं। कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचें और सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखें, ताकि दिमाग और शरीर दोनों को यह संकेत मिले कि अब आराम का समय है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए

यदि नींद में झटके के साथ तेज घबराहट, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या लगातार अनिद्रा जैसी समस्याएं जुड़ जाएं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ की राय लेकर सही जांच और सलाह लेना बेहतर होता है।

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