Lack Of Sleep Health Risks 2026: क्या आपकी रातों की नींद छीन रही है आपकी सेहत, जानलेवा हो सकती है स्थिति…
Lack Of Sleep Health Risks 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने सुख-सुविधाएं तो जुटा ली हैं, लेकिन अपनी सबसे बुनियादी जरूरत ‘नींद’ को दांव पर लगा दिया है। देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल, काम का बढ़ता तनाव और अनियमित दिनचर्या ने हमारे स्वाभाविक (Circadian-Rhythm-Disruption) को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। न्यूट्रिशनिस्ट दीपशिखा जैन के अनुसार, नींद की कमी को केवल थकान मानकर नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल है, क्योंकि यह शरीर को आंतरिक रूप से खोखला कर रही है।

शरीर में सूजन और पुरानी बीमारियों का खतरा
जब हम पर्याप्त आराम नहीं करते हैं, तो हमारे शरीर की मरम्मत प्रक्रिया बाधित हो जाती है। विशेषज्ञ दीपशिखा जैन बताती हैं कि नींद की कमी से (Chronic-Inflammation-Levels) शरीर में तेजी से बढ़ने लगते हैं। यह सूजन केवल जोड़ों के दर्द तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह वजन बढ़ाने, हार्मोनल असंतुलन और भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। शरीर को रिकवर होने के लिए गहरी नींद की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
पाचन तंत्र पर नींद की कमी का सीधा प्रहार
क्या आप जानते हैं कि आपके पेट की समस्याएं आपकी अधूरी नींद से जुड़ी हो सकती हैं? पर्याप्त आराम न मिलने पर हमारे शरीर का (Digestive-System-Efficiency) काफी धीमा पड़ जाता है। जब आंतों की मूवमेंट सुस्त हो जाती है, तो व्यक्ति को सुबह उठते ही कब्ज, भारीपन और गैस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एक अच्छी और सुकून भरी नींद आपके मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से चलाने के लिए ईंधन का काम करती है।
टाइप 2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस
नींद और ब्लड शुगर का गहरा संबंध विज्ञान द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है। लगातार कम नींद लेने से शरीर में (Insulin-Sensitivity-Reduction) की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे कोशिकाएं ग्लूकोज का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। खासकर उन लोगों के लिए जिनकी जीवनशैली पहले से ही गतिहीन है, नींद की कमी किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है।
स्मार्ट वॉच और स्लीप ट्रैकिंग का बढ़ता चलन
आजकल लोग अपनी सेहत और नींद की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए तकनीक का सहारा ले रहे हैं। बाजार में मौजूद विभिन्न (Advanced-Sleep-Tracking-Smartwatches) के जरिए अब लोग अपने डीप स्लीप और लाइट स्लीप डेटा को ट्रैक कर सकते हैं। यह तकनीक आपको यह समझने में मदद करती है कि आपकी नींद कितनी प्रभावी है। हालांकि, तकनीक केवल डेटा दे सकती है, लेकिन नींद की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास आपको स्वयं अपनी आदतों में बदलाव करके करना होगा।
हार्मोनल असंतुलन और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
नींद केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी रिचार्ज करती है। नींद की कमी से लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे (Hormonal-Balance-Regulation) बिगड़ जाते हैं, जिससे हमें बेवजह भूख लगती है और हम ओवरईटिंग के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा, नींद की कमी चिड़चिड़ापन, तनाव और एकाग्रता में कमी का मुख्य कारण बनती है। मानसिक शांति के लिए मस्तिष्क को रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे का विश्राम मिलना अनिवार्य है।
गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद पाने के उपाय
एक अच्छी सेहत की बुनियाद केवल जिम जाना या डाइट फॉलो करना नहीं है, बल्कि समय पर सोना भी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि (Quality-Sleep-Hygiene-Tips) को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से दूरी बना लें। कमरे में अंधेरा रखें और सोने का एक निश्चित समय तय करें। याद रखें, रात की गहरी नींद आपके इम्यून सिस्टम को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाती है।
निष्कर्ष: नींद को हल्के में लेना छोड़ें
अंततः, अच्छी सेहत के लिए सही खान-पान जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी 7-8 घंटे की निर्बाध नींद है। यदि आप लंबे समय तक एक्टिव और फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी स्लीप साइकिल के साथ समझौता करना बंद करें। (Long-Term-Wellness-Strategy) का हिस्सा मानकर नींद को प्राथमिकता दें। यदि आपको लंबे समय से अनिद्रा की समस्या है, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित सलाह लेने में देरी न करें, क्योंकि अच्छी नींद ही लंबी उम्र का राज है।



