स्वास्थ्य

Navel Displacement Symptoms and Cure: क्या आपका पेट भी बार-बार दे रहा है धोखा, तो जानें कैसे पाएं इससे मुक्ति…

Navel Displacement Symptoms and Cure: मानव शरीर की रचना विज्ञान में नाभि केवल एक निशान नहीं, बल्कि हमारे प्राणों का ऊर्जा केंद्र है। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में नाभि को शरीर की तमाम नसों का मिलन बिंदु माना गया है, जो सीधे तौर पर हमारे (Digestive System Function) को नियंत्रित करती है। जब यह केंद्र बिंदु अपनी जगह से विचलित होता है, तो पूरा शारीरिक तंत्र चरमरा जाता है। अक्सर भारी वजन उठाने या अचानक झटके लगने से नाभि का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसे आम भाषा में ‘धरण गिरना’ भी कहा जाता है।

Navel Displacement Symptoms and Cure
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डॉक्टर की चेतावनी: अनजाने में न पालें ये बड़ी मुसीबत

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. श्वेता शाह ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि उनके पास आने वाले कई मरीज सालों तक पेट की समस्याओं से जूझते रहते हैं, जबकि असली वजह नाभि का खिसकना होती है। जब हम झुककर भारी काम करते हैं या (Abdominal Muscle Strain) का शिकार होते हैं, तो नाभि से जुड़ी सूक्ष्म नसें अपने स्थान से हट जाती हैं। यह कोई ऐसी चोट नहीं है जो बाहर से दिखाई दे, लेकिन इसके अंदरूनी प्रभाव पूरे स्वास्थ्य को बिगाड़कर रख देते हैं।

शरीर के वो इशारे जिन्हें आप साधारण समझकर टाल देते हैं

नाभि खिसकने के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें अक्सर फूड पॉइजनिंग या सामान्य बदहजमी मान लेते हैं। अगर आप लंबे समय से एसिडिटी, सीने में जलन और (Chronic Gastritis Issues) का सामना कर रहे हैं, तो यह संकेत है कि आपकी नाभि ऊपर की ओर खिसक गई है। शरीर का यह हिस्सा जब अपने केंद्र से हटता है, तो पाचन की अग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे पूरा दिन बेचैनी और भारीपन बना रहता है।

पेट की हलचल और दिशा के अनुसार बदलते रोग

क्या आप जानते हैं कि नाभि किस दिशा में खिसकी है, इससे आपके रोग की प्रकृति बदल जाती है? यदि नाभि दाईं या बाईं तरफ हटती है, तो व्यक्ति को कब्ज, अपच और (Loss of Appetite) जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, अगर यह नीचे की तरफ खिसक जाए, तो पेट में तेज खिंचाव और निचले हिस्से में असहनीय दर्द महसूस होता है। कई बार इसकी वजह से दस्त या उल्टी की समस्या भी अचानक शुरू हो जाती है।

आधुनिक जांच में फेल लेकिन आयुर्वेद में है सटीक समाधान

नाभि का खिसकना किसी एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड में पकड़ में नहीं आता, यही इसकी सबसे बड़ी विडंबना है। यह केवल अनुभवी स्पर्श और लक्षणों के (Clinical Diagnosis Method) के जरिए ही पहचाना जा सकता है। एक कुशल फिजियोथेरेपिस्ट या आयुर्वेदिक डॉक्टर विशिष्ट दबाव बिंदुओं को दबाकर इसे वापस अपनी जगह पर ला सकते हैं। शरीर की इस स्थिति को ठीक करने के लिए कुछ विशेष योगासन और व्यायाम रामबाण की तरह काम करते हैं।

घरेलू उपचार जो तुरंत पहुंचाएंगे आपको राहत

अगर आप अस्पताल जाने की स्थिति में नहीं हैं, तो कुछ घरेलू नुस्खे इस दर्द और परेशानी को कम कर सकते हैं। गुनगुने सरसों या नारियल तेल से नाभि के चारों ओर (Navel Massage Therapy) करना बहुत फायदेमंद होता है। मसाज हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज होनी चाहिए। इससे नसों का तनाव कम होता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे नाभि धीरे-धीरे अपने मूल स्थान की ओर लौटने लगती है।

गर्म सिकाई और आराम का जादुई असर

नाभि उतरने पर शरीर को बहुत ज्यादा हिलाना-डुलाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। ऐसे में गर्म पानी की बोतल या हीटिंग बैग से नाभि के किनारे वाले हिस्सों पर लगभग 15 मिनट तक (Heat Therapy Benefits) लेना चाहिए। यह सिकाई नसों के खिंचाव को ढीला करती है और रक्त संचार को सुधारती है। इसके साथ ही, नाभि ठीक होने तक भारी सामान उठाने और खाली पेट रहने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

सावधानी और विशेषज्ञ की राय का महत्व

अंत में यह समझना जरूरी है कि नाभि शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा है, इसलिए इसे खुद से जबरदस्ती खींचने या दबाने की कोशिश न करें। किसी भी (Ayurvedic Expert Advice) के बिना की गई छेड़छाड़ नसों को स्थाई नुकसान पहुंचा सकती है। सही खान-पान, नियमित योगासन और शरीर की सीमाओं का सम्मान करना ही आपकी नाभि को उसके केंद्र में बनाए रखने का एकमात्र मंत्र है।

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