स्वास्थ्य

PanicAttack – अचानक पैनिक अटैक में राहत दे सकता है साधारण पेपर बैग

PanicAttack – अचानक बेचैनी, सीने में दबाव, दिल की तेज धड़कन और सांस लेने में परेशानी—ये लक्षण कई लोगों को अचानक डरा देते हैं। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि व्यक्ति को लगता है जैसे कुछ गंभीर होने वाला है, जबकि आसपास कोई वास्तविक खतरा मौजूद नहीं होता।

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पैनिक अटैक के लक्षण क्यों डरावने लगते हैं

पैनिक अटैक की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके लक्षण अचानक और तीव्र होते हैं। व्यक्ति को बिना किसी पूर्व चेतावनी के घबराहट, पसीना आना, चक्कर, सांस फूलना और सीने में जकड़न महसूस होने लगती है। कई लोगों को इस दौरान यह भ्रम भी हो जाता है कि उन्हें हार्ट अटैक आ रहा है या वे बेहोश हो सकते हैं। ऐसे लक्षण मानसिक दबाव के साथ-साथ शारीरिक डर को भी बढ़ा देते हैं।

पैनिक अटैक के समय शरीर के भीतर क्या बदलता है

डॉक्टरों के अनुसार, पैनिक अटैक के दौरान सबसे पहले सांस लेने का पैटर्न बिगड़ता है। व्यक्ति बहुत तेजी से और उथली सांसें लेने लगता है। इस स्थिति को हाइपरवेंटिलेशन कहा जाता है। तेज सांसों की वजह से शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड सामान्य से अधिक मात्रा में बाहर निकल जाती है।
जब खून में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर गिरता है, तो शरीर का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होने लगता है। इसका असर सीने में भारीपन, सांस की कमी, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैरों में झनझनाहट और बेचैनी के रूप में सामने आता है।

कैसे मदद करता है साधारण पेपर बैग

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे समय में एक साधारण पेपर बैग तुरंत राहत देने में सहायक हो सकता है। यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों की तीव्रता को कम करने में मदद करता है।
पेपर बैग का इस्तेमाल करते समय व्यक्ति को उसे नाक और मुंह के सामने हल्के से पकड़ना चाहिए और धीरे-धीरे सांस लेनी चाहिए। आमतौर पर 6 से 10 बार नियंत्रित तरीके से सांस अंदर-बाहर करना पर्याप्त माना जाता है।
पेपर बैग के भीतर सांस लेने से वही कार्बन डाइऑक्साइड दोबारा शरीर में जाती है, जो हाइपरवेंटिलेशन के कारण तेजी से बाहर निकल रही होती है। इससे खून में गैसों का संतुलन धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है और कुछ ही मिनटों में घबराहट, सीने की जकड़न और सांस फूलने जैसे लक्षण हल्के पड़ने लगते हैं।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि पेपर बैग का उपयोग हर स्थिति में सही नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा, सांस से जुड़ी पुरानी बीमारी या हृदय रोग है, तो बिना डॉक्टर की सलाह इस उपाय को अपनाना उचित नहीं माना जाता।
इसके अलावा, लंबे समय तक या बहुत कसकर बैग को चेहरे पर रखना नुकसानदेह हो सकता है। इस उपाय का उद्देश्य केवल सांस की गति को नियंत्रित करना है, न कि ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकना।

बार-बार पैनिक अटैक आए तो क्या करें

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार पैनिक अटैक का अनुभव हो रहा है, तो इसे केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक यह समझने में मदद करते हैं कि पैनिक अटैक के पीछे तनाव, चिंता, जीवनशैली या किसी मानसिक स्थिति की भूमिका है या नहीं। जरूरत पड़ने पर थेरेपी, काउंसलिंग या दवाओं की सलाह दी जाती है, जिससे समस्या को जड़ से नियंत्रित किया जा सके।

मानसिक स्वास्थ्य को हल्के में न लें

आज के समय में पैनिक अटैक एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसे कमजोरी या नजरअंदाज करने वाली स्थिति मानना गलत है। सही जानकारी, समय पर मदद और जीवनशैली में छोटे बदलाव कई लोगों को इस समस्या से बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर सकते हैं।
पेपर बैग जैसे उपाय तत्काल राहत दे सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी कदम है।

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