स्वास्थ्य

PregnancyHealth – गर्भावस्था में खामोश संक्रमणों का बढ़ता जोखिम

PregnancyHealth – गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास दौर होता है। यह समय जहां नई उम्मीदों और खुशियों से भरा होता है, वहीं जिम्मेदारियों की गंभीरता भी उतनी ही बढ़ जाती है। आमतौर पर गर्भवती महिलाएं बुखार, दर्द या सर्दी जैसे स्पष्ट लक्षणों पर तुरंत ध्यान देती हैं, लेकिन असली चुनौती उन संक्रमणों से होती है जो बिना किसी संकेत के शरीर में मौजूद रहते हैं। ये तथाकथित ‘खामोश संक्रमण’ मां को सामान्य महसूस कराते हैं, लेकिन गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जोखिम खड़ा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संक्रमणों की पहचान केवल नियमित जांच के माध्यम से ही संभव है।

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बिना लक्षण वाले संक्रमण क्यों हैं गंभीर

चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कुछ संक्रमण ऐसे होते हैं जिनके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। महिला पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकती है, लेकिन संक्रमण प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि इन्हें समय रहते पहचानना चुनौतीपूर्ण होता है।

विशेषज्ञ बताती हैं कि कई मामलों में जब तक विशेष जांच न की जाए, तब तक इनका पता नहीं चलता। देरी होने पर ये संक्रमण बच्चे के विकास, सुनने की क्षमता या जन्मजात विकारों का कारण बन सकते हैं। इसलिए एंटीनैटल जांच को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

साइटोमेगालोवायरस (CMV) का खतरा

साइटोमेगालोवायरस, जिसे संक्षेप में CMV कहा जाता है, गर्भावस्था के दौरान सामने आने वाला एक आम संक्रमण है। अधिकतर महिलाओं में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। यही वजह है कि कई बार यह बिना पहचान के रह जाता है।

हालांकि, अगर यह संक्रमण गर्भस्थ शिशु तक पहुंच जाए तो आगे चलकर सुनने में दिक्कत, सीखने में परेशानी या विकास से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि किसी महिला को संक्रमण का संदेह हो या पहले से जोखिम हो, तो आवश्यक जांच जरूर करानी चाहिए।

रूबेला और शुरुआती गर्भावस्था का जोखिम

रूबेला भी ऐसा संक्रमण है जो हल्के लक्षणों या बिना लक्षण के मौजूद रह सकता है। लेकिन यदि यह गर्भावस्था की शुरुआती तिमाही में हो जाए, तो शिशु के हृदय, आंखों और सुनने की क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भधारण से पहले टीकाकरण की स्थिति की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि महिला को पहले टीका नहीं लगा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

TORCH संक्रमण और टॉक्सोप्लाजमोसिस

TORCH समूह में टॉक्सोप्लाजमोसिस, रूबेला, CMV और हर्पीस जैसे संक्रमण शामिल हैं। टॉक्सोप्लाजमोसिस आमतौर पर अधपका मांस खाने या संक्रमित बिल्ली के मल के संपर्क में आने से फैल सकता है।

मां में इसके लक्षण न भी हों, तो भी यह शिशु के मस्तिष्क और आंखों पर असर डाल सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान खानपान और स्वच्छता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।

सिफिलिस, हेपेटाइटिस B और HIV

कुछ यौन संचारित संक्रमण जैसे सिफिलिस और HIV शुरुआती चरण में बिना लक्षण के रह सकते हैं। समय पर जांच और उपचार न होने पर ये संक्रमण गर्भावस्था या प्रसव के दौरान शिशु तक पहुंच सकते हैं।

इसी तरह हेपेटाइटिस B भी बिना स्पष्ट संकेतों के मौजूद रह सकता है। हालांकि, नियमित ब्लड टेस्ट से इनका पता लगाया जा सकता है और उचित इलाज से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

UTI और अन्य सामान्य संक्रमण

मूत्र संक्रमण (UTI) को अक्सर मामूली समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन गर्भावस्था में इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। बिना इलाज के यह समय से पहले प्रसव का कारण बन सकता है।

इसके अलावा योनि संक्रमण भी कई बार बिना ज्यादा परेशानी के मौजूद रहते हैं, लेकिन गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित एंटीनैटल चेकअप गर्भावस्था की सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। साधारण ब्लड टेस्ट, आवश्यक स्क्रीनिंग और टीकाकरण की जानकारी संक्रमणों को समय रहते पहचानने में मदद करती है।

इसके साथ ही साफ-सफाई का ध्यान रखना, संतुलित और सुरक्षित भोजन करना, अधपका मांस न खाना और सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना भी जरूरी है। इन छोटे-छोटे कदमों से बड़े जोखिम को टाला जा सकता है।

गर्भावस्था में सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी है। मां खुद को स्वस्थ महसूस कर रही हो, तब भी नियमित जांच कराना आने वाले शिशु के सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी कदम है।

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