स्वास्थ्य

RO Water Side Effects: शुद्ध पानी कहीं आपकी सेहत तो नहीं बिगाड़ रहा…

RO Water Side Effects: आज के दौर में शुद्ध पेयजल के लिए ‘रिवर्स ऑस्मोसिस’ यानी आरओ वाटर प्यूरीफायर हर घर की जरूरत बन गया है। हम इसे पानी की शुद्धता की अंतिम गारंटी मानते हैं, लेकिन हालिया चिकित्सा शोधों ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। विशेषज्ञों का दावा है कि जिस पानी को हम सबसे सुरक्षित समझ रहे हैं, वह धीरे-धीरे हमारे शरीर को भीतर से कमजोर कर रहा है। असल में, (RO Water Side Effects) केवल धूल और बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि पानी में मौजूद उन अनिवार्य प्राकृतिक खनिजों को भी खत्म कर देते हैं जो हमारे अंगों के संचालन के लिए बेहद जरूरी हैं। बिना मिनरल्स वाला यह ‘मृत पानी’ लंबे समय में गंभीर बीमारियों का सबब बन सकता है।

RO Water Side Effects
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शरीर से जरूरी खनिजों की चोरी कर रही है आरओ तकनीक

डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को आगाह किया है कि आरओ तकनीक पानी को साफ करने के चक्कर में उसे पोषक तत्वों से विहीन कर रही है। जब पानी इस फिल्टर से गुजरता है, तो यह (Essential Minerals Depletion) की प्रक्रिया को अंजाम देता है, जिससे कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी अपनी कई रिपोर्ट्स में चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ‘डि-मिनरलाइज्ड’ पानी पीने से शरीर में पोषक तत्वों का भारी असंतुलन पैदा हो सकता है। यह पानी प्यास तो बुझाता है, लेकिन शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को धीरे-धीरे धीमा कर देता है।

कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी का स्वास्थ्य पर प्रहार (RO Water Side Effects)

आरओ पानी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव हमारी हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है। डॉक्टर सोलंकी के अनुसार, जब पानी में खनिजों की मात्रा शून्य हो जाती है, तो (Skeletal Health Risks) का खतरा बढ़ जाता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां और दांत भीतर से खोखले होने लगते हैं, जबकि मैग्नीशियम के अभाव में मांसपेशियों में ऐंठन और नसों में झुनझुनी यानी ‘टिंगलिंग सेंसेशन’ महसूस होने लगती है। इसका सबसे खतरनाक असर बच्चों के विकासशील शरीर और बुजुर्गों की हड्डियों पर देखा जा रहा है, जिन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी से मिलने वाले खनिजों पर निर्भर रहना पड़ता है।

थकान और हृदय गति पर आरओ पानी का सीधा असर

क्या आप जानते हैं कि भरपूर पानी पीने के बावजूद आप थकान और कमजोरी क्यों महसूस करते हैं? इसका जवाब आपके किचन में लगे आरओ प्यूरीफायर में छिपा हो सकता है। पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने से (Cardiovascular Function Impact) बढ़ जाता है, जिससे हृदय की गति और रक्तचाप (BP) असंतुलित हो सकते हैं। खनिजों के बिना शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा का सही उत्पादन नहीं कर पातीं। डॉक्टर सोलंकी बताती हैं कि मिनरल रहित पानी पीने से प्यास की तृप्ति नहीं होती और शरीर बार-बार पानी की मांग करता है, क्योंकि उसे वह पोषण नहीं मिल पाता जिसकी उसे तलाश होती है।

टीडीएस लेवल की जांच और आरओ के उपयोग का सही मानक

पानी की गुणवत्ता को समझने के लिए ‘टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स’ यानी टीडीएस का पैमाना बहुत महत्वपूर्ण है। डॉक्टर सोलंकी की सलाह है कि हर व्यक्ति को अपने घर के पानी का (TDS Level Testing) नियमित रूप से कराना चाहिए। यदि आपके क्षेत्र के पानी का टीडीएस 300 से कम है, तो आपको महंगे और खनिज नष्ट करने वाले आरओ की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में साधारण ‘सिरेमिक फिल्टर’ या पानी उबालकर पीना कहीं अधिक स्वास्थ्यवर्धक है। आरओ का इस्तेमाल केवल तभी अनिवार्य होना चाहिए जब टीडीएस 300 से ऊपर हो, ताकि आप केवल अशुद्धियों को निकालें, जीवनदायी खनिजों को नहीं।

तकनीक और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना है जरूरी

यह खबर हमें याद दिलाती है कि तकनीक का अंधाधुंध उपयोग वरदान की जगह अभिशाप भी बन सकता है। पानी केवल एक तरल पदार्थ नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर को पोषण देने वाला एक महत्वपूर्ण संसाधन है। हमें (Drinking Water Quality) के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है। पानी का केवल ‘शुद्ध’ होना काफी नहीं है, उसका ‘पोषक’ होना भी उतना ही अनिवार्य है। डॉक्टर सोलंकी की सलाह पर अमल करते हुए अपने पानी की जांच कराएं और प्रकृति द्वारा दिए गए खनिजों को अपनी थाली और गिलास से गायब होने से बचाएं, ताकि आप और आपका परिवार दीर्घायु और स्वस्थ रह सके।

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