SolarEclipse – गर्भवती महिलाओं के लिए डॉक्टर की स्पष्ट सलाह
SolarEclipse – 17 फरवरी को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। हर बार की तरह इस बार भी गर्भवती महिलाओं के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। परिवार और आसपास के लोग अक्सर एहतियात के नाम पर कई सलाह देने लगते हैं, जिससे चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौकों पर घबराने की जरूरत नहीं है। सही जानकारी और चिकित्सकीय सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत में दिखाई नहीं देगा यह ग्रहण
गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ प्रियंका के अनुसार 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इसका समय दोपहर बाद से शाम तक बताया जा रहा है, लेकिन चूंकि यह भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां किसी विशेष सावधानी या प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो सूतक काल जैसी पारंपरिक मान्यताएं भी लागू नहीं होंगी। ऐसे में अनावश्यक डर या विशेष परहेज करने की जरूरत नहीं है।
ग्रहण से जुड़ी आम धारणाएं
डॉ प्रियंका बताती हैं कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को अक्सर कई तरह की हिदायतें दी जाती हैं। जैसे लोहे की वस्तुओं को न छूना, चाकू या कैंची का इस्तेमाल न करना, कुछ भी न खाना, घर से बाहर न निकलना या लगातार चलते रहना।
चिकित्सकीय दृष्टि से इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि ग्रहण के दौरान सामान्य गतिविधियां करने से गर्भस्थ शिशु पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। इसलिए अफवाहों के बजाय प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।
खानपान और दवाइयों में लापरवाही न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में शरीर की जरूरतों को प्राथमिकता देना सबसे अहम है। अगर भूख लगे तो समय पर भोजन करें। नियमित दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेते रहें। केवल ग्रहण के कारण खाने-पीने या दवाइयों में बदलाव करना उचित नहीं है।
आराम की आवश्यकता हो तो पर्याप्त विश्राम लें। शरीर को थकाना या अनावश्यक नियमों में उलझना सेहत के लिए ठीक नहीं है।
तनाव से भी हो सकता है नुकसान
डॉ प्रियंका के अनुसार ग्रहण से ज्यादा नुकसान बेवजह का तनाव पहुंचा सकता है। अधिक चिंता या डर मानसिक स्थिति और रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जो गर्भावस्था में ठीक नहीं है।
उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी महिला को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो वह अपनी नियमित जांच जारी रखे और डॉक्टर से संपर्क बनाए रखे। किसी भी तरह की शंका होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर है, बजाय इसके कि अपुष्ट बातों पर भरोसा किया जाए।
डॉक्टर की सलाह को दें प्राथमिकता
चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी निर्णय का आधार वैज्ञानिक तथ्य और मेडिकल सलाह होनी चाहिए। सामाजिक मान्यताओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़ा फैसला जानकारी के आधार पर ही लेना चाहिए।
17 फरवरी का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए गर्भवती महिलाओं को विशेष घबराने की जरूरत नहीं है। संतुलित आहार, नियमित जांच और मानसिक शांति—यही सुरक्षित गर्भावस्था की सबसे बड़ी कुंजी है।



