Bangladesh Election Violence Case: खौफ के साये में ढाका, चुनाव से पहले बीच बाजार मे हुआ छात्र नेता का कत्ल
Bangladesh Election Violence Case: बांग्लादेश में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही हिंसा का तांडव एक बार फिर शुरू हो गया है। राजधानी ढाका के सबसे व्यस्त व्यापारिक इलाकों में से एक उस वक्त दहल उठा, जब हथियारबंद हमलावरों ने एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे को अपना निशाना बनाया। इस (Political Assassination) की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि चुनाव से पहले की शांति केवल एक दिखावा मात्र थी।

पूर्व छात्र नेता अजीजुर रहमान की बेरहमी से हत्या
मंगलवार की रात ढाका के कारवां बाजार इलाके में मौत का नंगा नाच देखने को मिला। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रभावशाली स्वयंसेवी विंग के पूर्व महासचिव अजीजुर रहमान मुसब्बिर को हमलावरों ने घेर कर गोलियों से भून दिया। इस (Targeted Killing) ने विपक्षी दलों के भीतर सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। मुसब्बिर की मौत न केवल एक पार्टी के लिए क्षति है, बल्कि यह लोकतंत्र के गिरते स्तर की ओर भी इशारा करती है।
भीड़भाड़ वाले इलाके में दुस्साहसिक वारदात
चश्मदीदों के मुताबिक, वारदात उस समय हुई जब मुसब्बिर कारवां बाजार के एक कमर्शियल इलाके में ‘सुपर स्टार होटल’ के पास मौजूद थे। रात के करीब 8.30 बजे, जब बाजार में लोगों की भारी आवाजाही थी, हमलावरों ने (Deadly Shooting) को अंजाम दिया। उन्होंने मुसब्बिर के बेहद करीब जाकर उनके पेट में गोली मारी, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है जिसका उपचार चल रहा है।
आतंक फैलाने के बाद फरार हुए हमलावर
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के दावों के बीच हमलावर बड़ी आसानी से वारदात को अंजाम देकर गायब हो गए। भागने से पहले उन्होंने इलाके में दहशत पैदा करने के लिए कई राउंड हवा में गोलियां चलाईं, जिससे बाजार में (Panic and Chaos) की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है, लेकिन बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
सड़क पर उतरा जनसैलाब और प्रदर्शन
मुसब्बिर की हत्या की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ढाका की सड़कों पर कब्जा कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने ढाका के प्रसिद्ध (Saarc Fountain) चौराहे को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्थानीय पुलिस के हाथ-पांव फूल गए और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा।
सेना के हस्तक्षेप के बाद भी तनाव बरकरार
देर रात सेना ने हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की कोशिश की, ताकि आवश्यक सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, (Public Outrage) इतना गहरा था कि सेना के हटने के कुछ ही समय बाद प्रदर्शनकारी फिर से सड़कों पर जमा होने लगे। ढाका का वातावरण इस समय बारूद के ढेर पर बैठा हुआ महसूस हो रहा है, जहां किसी भी समय बड़ी हिंसा भड़कने की आशंका बनी हुई है।
आचार संहिता के बीच सुरक्षा व्यवस्था फेल
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए आचार संहिता लागू है, जिसका अर्थ है कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था चुनाव आयोग के अधीन है। इसके बावजूद (Violation of Law) की ऐसी घटनाएं प्रशासन की विफलता को दर्शाती हैं। उस्मान हादी जैसे छात्र नेताओं की पहले हुई मौतों के बाद मुसब्बिर की हत्या ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे शांतिपूर्ण चुनाव कराने के दावों पर सवालिया निशान लग गया है।
चुनावी भविष्य पर मंडराते काले बादल
लगातार हो रही हिंसक वारदातों और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि (Pre-Election Conflict) इसी तरह जारी रहा, तो निष्पक्ष मतदान कराना लगभग असंभव हो जाएगा। हिंदुओं पर होते हमले और अब राजनीतिक कत्लेआम ने बांग्लादेश के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया है, जिससे देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति के संकेत मिल रहे हैं।



