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Bangladesh Political Crisis: तख्तापलट के बाद फिर जल उठा बांग्लादेश, क्या शुरू हो गई है यूनुस सरकार की उल्टी गिनती…

Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी शांति के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं और अब मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिस इंकलाब मंच ने इस सरकार को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी, अब वही संगठन (Interim Government Stability) इसे सत्ता से बेदखल करने के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहा है। संगठन के भीतर पनपता यह असंतोष ढाका की गलियों में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट दे रहा है।

Bangladesh Political Crisis
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प्रवक्ता उस्मान हादी की मौत ने भड़काई गुस्से की आग

इस पूरे विवाद की जड़ में इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की संदिग्ध मौत है, जिसके बाद संगठन के समर्थकों का धैर्य जवाब दे गया है। हालांकि प्रशासन हत्यारे को पकड़ने के दावे कर रहा है, लेकिन मंच ने स्पष्ट कर दिया है कि (Inquilab Manch Protest) जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध प्रदर्शन थमने वाले नहीं हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ती यह तल्खी देश को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल रही है।

अल्टीमेटम खत्म और पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को प्रशासन को दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम बिना किसी ठोस नतीजे के बीत गया, जिससे प्रदर्शनकारी और उग्र हो गए हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली ने (Law Enforcement Challenges) आम जनता और छात्र संगठनों के बीच अविश्वास की खाई को और चौड़ा कर दिया है। अब यह मांग की जा रही है कि दोषियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

अब्दुल्ला अल जाबर का कड़ा रुख और ढाका में विरोध

इंकलाब मंच के पदाधिकारी अब्दुल्ला अल जाबर ने प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से कोई सीधा कदम नहीं उठाया गया है। सोमवार दोपहर को ढाका में आयोजित (Mass Civil Unrest) एक विशाल जनसभा के दौरान यह तय करने की बात कही गई कि यूनुस प्रशासन का साथ देना है या उसे हटाने का बिगुल फूंकना है। जाबर के इस कड़े रुख ने अंतरिम सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है।

गृह मंत्रालय की चुप्पी और साजिश के आरोप

प्रदर्शनकारी नेताओं ने आरोप लगाया है कि हालिया मंत्रालय ब्रीफिंग के दौरान गृह सलाहकार और उनके विशेष सचिव की अनुपस्थिति कोई संयोग नहीं थी। इसे इस गंभीर घटना (Political Conspiracy Claims) को दबाने या कम दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया गया है। छात्र नेताओं का मानना है कि सरकार के भीतर कुछ तत्व ऐसे हैं जो हत्यारों को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे न्याय की उम्मीद धुंधली होती जा रही है।

खुलना में फिर चली गोली और मोतालेब सिकदर घायल

हिंसा का दौर यहीं नहीं थमा और सोमवार को खुलना शहर में अज्ञात हमलावरों ने एक और छात्र नेता मोतालेब सिकदर को अपना निशाना बनाया। सिकदर, जो 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे, उनके (Student Leader Assassination Attempt) सिर में गोली मारी गई है। यह हमला शरीफ उस्मान हादी की हत्या के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिससे यह साफ है कि छात्र नेतृत्व को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

नेशनल सिटिजन पार्टी ने दी हमले की जानकारी

एनसीपी की संयुक्त प्रधान समन्वयक महमूदा मितु ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि सिकदर की हालत बेहद नाजुक है। खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में (Emergency Medical Crisis) भर्ती छात्र नेता के लिए पूरा देश दुआएं कर रहा है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। मितु ने सरकार से सवाल किया है कि आखिर कब तक छात्र नेताओं का खून सड़कों पर बहता रहेगा?

चुनावी दंगल से पहले शोक और हिंसा का माहौल

उस्मान हादी, जिनकी सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हुई, आगामी 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों में एक मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखे जा रहे थे। उनकी मौत पर (National Mourning Period) सरकार ने राष्ट्रव्यापी शोक का आयोजन तो किया, लेकिन यह जनता के आक्रोश को शांत करने में विफल रहा। ढाका समेत अन्य शहरों में फिर से भड़की हिंसा यह दर्शाती है कि केवल आश्वासनों से अब काम चलने वाला नहीं है।

बांग्लादेश का भविष्य और लोकतंत्र की कठिन राह

मौजूदा हालातों को देखते हुए मोहम्मद यूनुस के लिए सरकार चलाना कांटों भरी राह साबित हो रहा है, जहां अपनों का ही साथ छूटता जा रहा है। यदि इंकलाब मंच और छात्र संगठनों का (Democratic Transition Risks) भरोसा पूरी तरह टूट गया, तो बांग्लादेश में एक बार फिर सैन्य हस्तक्षेप या अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ढाका के घटनाक्रम और वहां की सड़कों पर उमड़ते जनसैलाब पर टिकी हैं।

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