Bangladesh Relations 2026 Crisis: आखिर क्या रंग लाएंगी ‘साझेदारी’ से ‘तनाव’ तक का सफर और भविष्य की चुनौतियां…
Bangladesh Relations 2026 Crisis: दक्षिण एशिया के दो सबसे बड़े सहयोगियों, भारत और बांग्लादेश के बीच के संबंध अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। कभी जिन रिश्तों को ‘मददगार और साझेदार’ जैसे शब्दों से नवाजा जाता था, 2024 के तख्तापलट के बाद वहां अब अविश्वास की गहरी खाई नजर आ रही है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद ढाका की सत्ता में आए बदलाव ने न केवल राजनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि दशकों पुराने (diplomatic ties) को भी खतरे में डाल दिया है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश का झुकाव अब रणनीतिक रूप से पाकिस्तान, चीन और तुर्किए की ओर अधिक दिखाई दे रहा है, जो भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चिंता का विषय है।

जनमत का बदलता रुख और सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े
बांग्लादेश के भीतर भारत विरोधी भावनाओं का उभार अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंकड़ों में भी तब्दील हो चुका है। ‘National Image of China in Bangladesh’ नामक एक हालिया सर्वे ने दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस सर्वे के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत बांग्लादेशी नागरिक (China Bangladesh strategic partnership) को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। इसके विपरीत, भारत के पक्ष में केवल 11 प्रतिशत लोगों ने अपनी राय दी। दिलचस्प बात यह है कि 59 प्रतिशत उत्तरदाता पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्तों के पक्षधर दिखे, जो इस क्षेत्र में भारत के प्रभाव के घटते स्तर को दर्शाता है।
शेख हसीना का प्रत्यर्पण: दिल्ली के लिए एक कूटनीतिक पहेली
जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा के बाद भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना अब दोनों देशों के बीच तनाव का केंद्र बन गई हैं। बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है, जिससे भारत के सामने एक जटिल (extradition dilemma) पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास सीमित विकल्प हैं। यदि भारत उन्हें ढाका को सौंपता है, तो यह अपने पुराने मित्र के साथ विश्वासघात होगा, और यदि वह यथास्थिति बनाए रखता है, तो 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार के साथ रिश्ते और बिगड़ सकते हैं।
अल्पसंख्यकों पर हमले और मानवाधिकारों का संकट
अगस्त 2024 से शुरू हुआ हिंसा का दौर 2025 के अंत तक और भी भयावह हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, केवल 15 दिनों के भीतर अल्पसंख्यकों के 1,000 से अधिक घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया। विशेष रूप से खुलना और रंगपुर डिविजन में (violence against minorities) की घटनाएं सबसे अधिक देखी गईं। दिसंबर 2025 में दीपू चंद्र दास की पेड़ से लटकाकर हत्या और उसके बाद बिजेंद्र बिस्वास व अमृत मंडल की निर्मम हत्याओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है।
‘इंडिया आउट’ कैंपेन और जहरीली बयानबाजी
बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से ‘India Out’ कैंपेन के माध्यम से भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की अपील की जा रही है। पिनाकी भट्टाचार्य जैसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने इस आग को हवा दी है, जिसका असर (bilateral trade) पर भी पड़ता दिख रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भारत ने केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन किया और बांग्लादेश के लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की। यह नकारात्मक नैरेटिव अब बांग्लादेशी युवाओं के बीच तेजी से घर कर रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर भारत विरोधी भावनाएं प्रबल हो रही हैं।
विवादित नक्शे और ‘सेवन सिस्टर्स’ पर धमकी
हाल के महीनों में मोहम्मद यूनुस की पाकिस्तान के जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के साथ मुलाकात ने विवादों को जन्म दिया। इस दौरान एक ऐसी पुस्तक भेंट की गई जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। इसके साथ ही, छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला जैसे कट्टरपंथी तत्वों ने खुलकर (India’s North East security) को चुनौती दी है। उन्होंने धमकी दी है कि यदि भारत ने ‘हस्तक्षेप’ किया, तो वे सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के जरिए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को मुख्य भूमि से अलग-थलग करने की कोशिश करेंगे।
हादी हत्याकांड और मेघालय सीमा विवाद
इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेशी नेताओं ने इसका दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश की है। ढाका पुलिस का दावा है कि हादी की हत्या के संदिग्ध भारत के मेघालय राज्य में छिपे हुए हैं। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और (BSF border security) ने इन दावों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप केवल घरेलू राजनीति को साधने और भारत के प्रति जनता के गुस्से को भड़काने के लिए लगाए जा रहे हैं, जिसका कोई खुफिया प्रमाण मौजूद नहीं है।
फरवरी 2026 के चुनाव और बीएनपी का संभावित उदय
बांग्लादेश अब 12 फरवरी 2026 को होने जा रहे ऐतिहासिक आम चुनाव की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। यदि बीएनपी सत्ता में वापस आती है, तो भारत के लिए (regional geopolitics) पूरी तरह बदल सकती है। इतिहास गवाह है कि बीएनपी के कार्यकाल में ढाका में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ा है। विश्लेषक 2025 को बांग्लादेश के लिए एक ‘खोया हुआ साल’ मान रहे हैं, जहां स्पष्ट विदेश नीति के अभाव में रिश्ते केवल खराब हुए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या नई सरकार दिल्ली के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की पहल करेगी या तनाव का यह नया अध्याय और लंबा खिंचेगा।



