BangladeshElections – शेख हसीना ने आम चुनाव को बताया अवैध
BangladeshElections – बांग्लादेश में हाल में कराए गए आम चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के तहत हुए इस चुनाव को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं बताया है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि यह चुनाव संविधान की भावना के विपरीत है और इसमें मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी नजर नहीं आती। हसीना का आरोप है कि उनकी पार्टी आवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखकर यह मतदान कराया गया, जिससे इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

आवामी लीग की आपत्ति और बयान
शेख हसीना का आधिकारिक बयान उनकी पार्टी के सोशल मीडिया मंच पर साझा किया गया। इसमें उन्होंने चुनाव को “मतदाता-विहीन” और “अवैध” करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका कहना है कि जब प्रमुख राजनीतिक दल को हिस्सा लेने से रोका गया, तब इस प्रक्रिया को व्यापक जनसमर्थन वाला चुनाव नहीं कहा जा सकता। उन्होंने अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस से इस्तीफे की मांग भी की है। साथ ही अपने और पार्टी नेताओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाने की अपील की।
कम मतदान पर उठाए सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री ने मतदान प्रतिशत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने चुनाव आयोग के हवाले से कहा कि सुबह के शुरुआती घंटों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा। उनके मुताबिक, कम भागीदारी इस बात का संकेत है कि जनता इस चुनाव से दूरी बनाए हुए है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक आंकड़ों का अंतिम विवरण अभी जारी होना बाकी है। सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अंतरिम सरकार पर आरोप
हसीना ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को समान अवसर मिलना चाहिए, जो इस प्रक्रिया में नहीं दिखा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अंतरिम सरकार ने पहले कहा था कि चुनाव पारदर्शी तरीके से कराए जा रहे हैं और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी तल्खी
बांग्लादेश की राजनीति इस समय तीखे आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। विपक्ष और सत्ताधारी पक्ष के बीच अविश्वास की खाई गहरी होती दिखाई दे रही है। चुनाव को लेकर जारी विवाद ने देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता की आशंका भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिस्थिति में संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन ही आगे का रास्ता तय करेगा।
अंतरराष्ट्रीय नजर और आगे की राह
चुनाव प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है। कई देशों ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान की अपील की थी। अब जबकि परिणामों और मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल उठ रहे हैं, आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी प्रकार का संवाद स्थापित होता है या विवाद और गहराता है।



