अंतर्राष्ट्रीय

BangladeshPM – तारिक रहमान के शपथ के बाद चीन की सक्रियता

BangladeshPM – बांग्लादेश में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही क्षेत्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए नई सरकार को बधाई संदेश भेजा और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने अपने संदेश में कहा कि बीजिंग ढाका के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है, ताकि दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दी जा सके।

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ली कियांग ने यह भी कहा कि चीनी सरकार बांग्लादेश की नई प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए समर्थन देती है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रवत संबंधों को आगे बढ़ाने का यह उपयुक्त अवसर है।

बीआरआई परियोजनाओं पर जोर

चीन ने विशेष रूप से Belt and Road Initiative के तहत चल रही परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की बात कही है। ली ने अपने संदेश में कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचा सहयोग और आर्थिक परियोजनाओं के जरिए दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा किया जा सकता है।

उनका कहना था कि आपसी सम्मान और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने से Comprehensive Strategic Cooperative Partnership को नया आयाम मिलेगा। इससे दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।

रहमान की प्राथमिकताएं

हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत के बाद तारिक रहमान ने विदेश नीति पर अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का मुख्य ध्यान राष्ट्रीय हितों पर रहेगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और उसके नागरिकों का हित ही विदेश नीति की दिशा तय करेगा।

रहमान के इस बयान को क्षेत्रीय शक्तियों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। चीन के सरकारी मीडिया ने भी इस बात को प्रमुखता से प्रकाशित किया कि बीजिंग लंबे समय से बांग्लादेश का महत्वपूर्ण विकास सहयोगी रहा है और भविष्य में भी साझा प्रगति के लिए मिलकर काम करने को इच्छुक है।

क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर

दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों का क्षेत्रीय संतुलन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हाल के वर्षों में अंतरिम प्रशासन के दौरान चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे भारत के साथ रिश्तों में कुछ तनाव की स्थिति बनी।

ऐसे में नई सरकार की विदेश नीति पर सभी की नजर है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढाका को संतुलित कूटनीति अपनानी होगी, ताकि क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक विकास दोनों सुनिश्चित हो सकें।

आगे की दिशा

चीन की त्वरित प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि वह बांग्लादेश में नई सरकार के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए उत्सुक है। दूसरी ओर, रहमान सरकार के लिए यह एक अवसर भी है और चुनौती भी, क्योंकि उसे विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संतुलन बनाकर चलना होगा।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि बांग्लादेश अपनी विदेश नीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है और क्षेत्रीय साझेदारियों में किस प्रकार संतुलन स्थापित करता है। फिलहाल, बीजिंग और ढाका के बीच सकारात्मक संदेशों का आदान-प्रदान कूटनीतिक सक्रियता का संकेत दे रहा है।

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