अंतर्राष्ट्रीय

China UK Diplomatic Relations Conflict: लंदन के सीने में चीन का सुपर जासूसी अड्डा या दूतावास, ब्रिटेन सरकार के फैसले ने दुनिया भर में मचाया तहलका

China UK Diplomatic Relations Conflict: ब्रिटेन की लेबर पार्टी सरकार ने तमाम सुरक्षा चिंताओं और विरोध के सुरों को दरकिनार करते हुए लंदन के ऐतिहासिक केंद्र में चीन के ‘सुपर दूतावास’ के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। यह प्रस्तावित परिसर लंदन टावर के पास पूर्व रॉयल मिंट कोर्ट की लगभग 20,000 वर्ग मीटर भूमि पर फैला होगा। इस (Strategic Infrastructure Development) परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का मामला माना गया है, जिसे अब मंत्रिस्तरीय समीक्षा के बाद आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है।

China UK Diplomatic Relations Conflict
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सुरक्षा एजेंसियों की चुप्पी और सांसदों का तीखा विरोध

हैरानी की बात यह है कि ब्रिटेन की दिग्गज खुफिया एजेंसियां एमआई5 और एमआई6 ने इस योजना पर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं की है। हालांकि, लेबर और टोरी दोनों पार्टियों के सांसदों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है क्योंकि यह स्थल वित्तीय जिले के बेहद करीब है। सांसदों का तर्क है कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी को (Intelligence Gathering Operations) के लिए इतना बड़ा और संवेदनशील ठिकाना देना आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

आवास मंत्री स्टीव रीड का आधिकारिक बयान और तर्क

ब्रिटेन के आवास और समुदाय मंत्री स्टीव रीड ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी संबंधित पहलुओं और सुरक्षा मानकों को बारीकी से परखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला स्वतंत्र योजना निरीक्षक की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिन्होंने पिछले साल इस मामले की व्यापक जांच की थी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि (Geopolitical Policy Decisions) के तहत लिया गया यह निर्णय तब तक अंतिम रहेगा जब तक कि इसे अदालत में चुनौती न दी जाए।

240 पन्नों का दस्तावेज और वियना संधि का हवाला

आवास मंत्रालय ने इस मंजूरी के पीछे के तर्क को स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत दस्तावेज जारी किया है। योजना निरीक्षक क्लेयर सियरसन ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि यह प्रस्ताव समग्र विकास योजना के अनुरूप है। रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि (Vienna Convention Protocol) के अनुसार दूतावास संबंधी अनुमतियां राष्ट्र-तटस्थता के आधार पर दी जाती हैं, जिसका अर्थ है कि किसी विशेष देश के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखा जा सकता।

22.5 करोड़ पाउंड का सौदा और पुराने मिशन का विस्तार

चीन ने साल 2018 में इस बेशकीमती ऐतिहासिक स्थल को करीब 22.5 करोड़ पाउंड में खरीदा था। चीन की योजना बेकर स्ट्रीट स्थित अपने वर्तमान दूतावास को समेटकर इस नए और विशाल परिसर में स्थानांतरित करने की है। डाउनिंग स्ट्रीट का मानना है कि चीन के अलग-अलग सात राजनयिक केंद्रों को एक ही जगह (Consolidation of Assets) के माध्यम से लाने से सुरक्षा निगरानी रखना अधिक आसान और प्रभावी हो जाएगा।

प्रीति पटेल ने बताया इसे चीन का ‘जासूसी केंद्र’

ब्रिटेन की छाया विदेश मंत्री प्रीति पटेल ने सरकार के इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लेबर पार्टी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को लंदन के बीचों-बीच ‘सुपर एम्बेसी’ के नाम पर एक जासूसी केंद्र उपहार में दे दिया है। प्रीति पटेल के अनुसार, (National Security Compromise) का यह निर्णय उन हांगकांग वासियों के साथ विश्वासघात है जो दमनकारी नीतियों के डर से ब्रिटेन में शरण लिए हुए हैं।

प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर की चीन यात्रा और कूटनीति

माना जा रहा है कि इस मेगा दूतावास को मंजूरी देना प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर की आगामी चीन यात्रा के लिए जमीन तैयार करने जैसा है। आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद है। ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने बचाव करते हुए कहा कि (International Diplomatic Norms) के तहत दूतावास स्थापित करना एक सामान्य प्रक्रिया है और किसी भी संभावित जोखिम से निपटने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं।

जासूसी के आरोपों पर चीन का दोटूक जवाब

चीन ने जासूसी के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे चीन विरोधी तत्वों की साजिश बताया है। दूतावास के प्रवक्ता का कहना है कि वे केवल अपनी राजनयिक उपस्थिति को बेहतर बनाने के लिए इस परिसर का निर्माण कर रहे हैं। हालांकि, ब्रिटेन में (Political Transparency Activism) से जुड़े लोग अभी भी मांग कर रहे हैं कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे और चीन की बढ़ती दादागिरी के खिलाफ नियम और सीमाएं सख्त करे ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके।

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