Donald Trump Nigeria Air Strike: ईसाइयों के कत्लेआम पर ट्रंप ने दिया बड़ा बयान, ISIS के ठिकानों पर की घातक एयर स्ट्राइक
Donald Trump Nigeria Air Strike: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी आक्रामक विदेश नीति का परिचय देते हुए नाइजीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार रात अमेरिकी सेना ने ट्रंप के सीधे आदेश पर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक शक्तिशाली हमला किया। (Counter Terrorism Operations) के तहत की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य उन ईसाइयों की हत्या का बदला लेना था, जिन्हें ट्रंप के अनुसार ‘निर्दयी और क्रूर’ तरीके से मौत के घाट उतारा गया था। इस हमले ने न केवल अफ्रीका में बल्कि पूरी दुनिया में ट्रंप के सख्त तेवरों को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है।

‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ की बड़ी कार्रवाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे उन बेगुनाहों को समर्पित किया जिन्होंने अपनी जान गंवाई। (US Military Air Strike) की जानकारी देते हुए ट्रंप ने लिखा कि कमांडर-इन-चीफ के तौर पर उन्होंने सेना को आईएसआईएस के अड्डों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह हमला उन आतंकियों के लिए एक जवाब है जो मुख्य रूप से निर्दोष ईसाई समुदायों को अपना निशाना बना रहे थे। ट्रंप ने इसे ‘शक्तिशाली और घातक’ प्रहार बताते हुए अपनी सेना की बहादुरी की जमकर सराहना की।
चेतावनी के बाद ट्रंप का घातक एक्शन
डोनाल्ड ट्रंप बीते अक्टूबर महीने से ही नाइजीरियाई सरकार और वहां सक्रिय आतंकियों को ईसाइयों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दे रहे थे। उन्होंने (Religious Freedom Protection) का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि अगर ईसाइयों का कत्लेआम नहीं रुका, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रंप का मानना था कि नाइजीरियाई सरकार अपने नागरिकों, विशेषकर ईसाइयों को बचाने में विफल रही है, जिसके कारण इन समुदायों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। गुरुवार की रात हुई यह स्ट्राइक उसी चेतावनी का सीधा परिणाम है, जिसे ट्रंप ने ‘भारी कीमत’ के तौर पर परिभाषित किया।
अमेरिकी सेना की अफ्रीकी कमांड का आधिकारिक बयान
अमेरिकी सेना की अफ्रीकी कमांड ने भी इस हवाई हमले की पुष्टि करते हुए महत्वपूर्ण विवरण साझा किए हैं। सेना के अनुसार, यह एयर स्ट्राइक नाइजीरियाई सरकार के औपचारिक अनुरोध पर की गई थी, जिसमें (ISIS Strongholds Destruction) को अंजाम दिया गया। इस हमले में कई खूंखार आतंकी मारे गए हैं और उनके संचार केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि वे इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके।
कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद पर ट्रंप का प्रहार
अपने पोस्ट में ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका कभी भी कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा। उन्होंने लिखा कि (Islamic Extremism Eradication) उनके प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रंप ने मृत आतंकवादियों समेत सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हुए एक कड़ा संदेश दिया कि यदि ईसाइयों की हत्या बंद नहीं हुई, तो आने वाले समय में और भी आतंकी मारे जाएंगे। ट्रंप का यह बयान उनके उस चुनावी वादे की याद दिलाता है जिसमें उन्होंने वैश्विक मंच पर अमेरिकी सैन्य शक्ति को पुनर्स्थापित करने की बात कही थी।
नाइजीरियाई सरकार का अलग और संतुलित नजरिया
हालांकि ट्रंप इस हमले को पूरी तरह ईसाइयों के बचाव से जोड़ रहे हैं, लेकिन नाइजीरियाई सरकार का पक्ष थोड़ा अलग है। नाइजीरियाई अधिकारियों का तर्क है कि आतंकी समूह (Global Terrorism Analysis) के तहत केवल ईसाइयों को ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदायों को भी अपना निशाना बनाते हैं। सरकार का मानना है कि ट्रंप का केवल एक धर्म पर ध्यान केंद्रित करना देश की जटिल सुरक्षा स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करता है। इसके बावजूद, अपनी आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नाइजीरिया अब अमेरिका के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ने को तैयार है।
नाइजीरिया में क्यों हो रहे हैं खूनी संघर्ष?
नाइजीरिया की भौगोलिक और धार्मिक स्थिति काफी संवेदनशील है, जहां उत्तर में मुस्लिम और दक्षिण में ईसाई आबादी लगभग बराबर अनुपात में रहती है। (Sectarian Violence in Nigeria) की जड़ें काफी गहरी हैं, जिसमें बोको हरम और आईएसआईएस जैसे संगठन उत्तर और मध्य हिस्सों में लगातार हमले करते रहते हैं। इन हमलों की वजह कभी धार्मिक कट्टरता होती है तो कभी राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई। इस अस्थिरता का खामियाजा दोनों समुदायों को भुगतना पड़ता है, लेकिन ट्रंप का रुख केवल ईसाइयों की सुरक्षा को लेकर बेहद मुखर रहा है।
आर्थिक सहायता और सुरक्षा का दबाव
डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में नाइजीरियाई सरकार को यह धमकी भी दी थी कि यदि ईसाइयों की रक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो अमेरिका अपनी (Foreign Economic Aid) को पूरी तरह बंद कर देगा। इस दबाव के बाद ही दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई थी और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर सहमति बनी थी। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि नाइजीरिया को मिलने वाली हर अमेरिकी मदद का उपयोग वहां के अल्पसंख्यकों और धार्मिक समुदायों की सुरक्षा के लिए पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।
भविष्य की रणनीति: ट्रंप का अगला कदम क्या होगा?
इस एयर स्ट्राइक के बाद दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की नजरें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर हिंसा जारी रही, तो हमले और भी तेज होंगे। (US Foreign Policy Trends) यह संकेत दे रहे हैं कि ट्रंप अब ‘वेट एंड वॉच’ की नीति के बजाय सीधे सैन्य हस्तक्षेप को प्राथमिकता दे रहे हैं। नाइजीरिया में हुआ यह हमला केवल एक शुरुआत हो सकती है, जो यह बताती है कि अमेरिका अब दुनिया के किसी भी कोने में अपने हितों और विचारधारा की रक्षा के लिए ‘घातक शक्ति’ का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा



