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Donald Trump on Iran Democracy: ईरान के नरक को जन्नत बनाने का ट्रंप ने लिया संकल्प, बोले- मदद आ रही है…

Donald Trump on Iran Democracy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी भीषण उथल-पुथल के बीच एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान के लोगों को मौजूदा शासन के चंगुल से छुड़ाकर उन्हें आजादी दिलवाना चाहते हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, ईरान की जनता अब खामेनेई शासन की बेड़ियों से पूरी तरह तंग आ चुकी है और वहां एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ट्रंप ने कहा कि वे (Support for Iranian protesters) के अपने वादे पर अडिग हैं और ईरानी नागरिकों की हर उस मांग का समर्थन करते हैं जो उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर ले जाए।

Donald Trump on Iran Democracy
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नरक बन चुके ईरान को फिर से संवारने की चाहत

मंगलवार को जब ट्रंप से ईरान में लोकतंत्र की स्थापना को लेकर सवाल पूछा गया, तो उनके जवाब में एक अलग तरह की संवेदनशीलता और रणनीति नजर आई। ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के लोगों के लिए ‘थोड़ी आज़ादी’ देखना चाहते हैं क्योंकि वहां के लोग पिछले काफी लंबे समय से नरक जैसी परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने (Advocating for democratic values) की बात करते हुए पुराने दिनों को याद किया जब ईरान निवेश और पर्यटन के लिए एक शानदार जगह हुआ करती थी। ट्रंप का मानना है कि वहां के लोग बहुत अच्छे हैं, लेकिन वर्तमान नेतृत्व ने उस खूबसूरत देश को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

हत्यारों और अत्याचारियों को ट्रंप की सीधी चेतावनी

ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रहे हिंसक दमन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की है कि वे उन ‘हत्यारों और अत्याचारियों’ के नाम दर्ज कर लें जो बेगुनाहों का खून बहा रहे हैं। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि (Accountability for human rights) के तहत इन दोषियों को अपने कृत्य की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह मूकदर्शक बनकर निर्दोष लोगों की हत्याएं होते हुए नहीं देखेगा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता पर ट्रंप का ‘फुल स्टॉप’

कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान को अलग-थलग करने के लिए ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी प्रस्तावित बैठकें रद्द कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों की निरर्थक हत्याएं बंद नहीं होतीं, तब तक बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। इस (Suspension of diplomatic talks) के फैसले ने तेहरान के शासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि हत्यारों के साथ मेज पर बैठकर चर्चा करना संभव नहीं है और अमेरिका अब केवल ईरानी जनता के हितों की रक्षा के लिए ही कोई कदम उठाएगा।

‘मदद भेजी जा रही है’ वाले बयान से बढ़ा ग्लोबल सस्पेंस

ट्रंप ने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में एक ऐसी लाइन लिखी जिसने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए लिखा कि ‘मदद भेजी जा रही है’, हालांकि उन्होंने इस मदद के स्वरूप का खुलासा नहीं किया। इस (Mystery of US assistance) ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। क्या यह मदद तकनीकी होगी, वित्तीय होगी या फिर कुछ और, यह अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन ट्रंप के इस भरोसे ने प्रदर्शनकारियों के भीतर एक नया जोश भर दिया है।

देशभक्तों को ट्रंप की ललकार: संस्थाओं पर करो कब्जा

डोनाल्ड ट्रंप ने केवल सहानुभूति नहीं दिखाई, बल्कि प्रदर्शनकारियों को सीधे एक्शन लेने के लिए उकसाया भी है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ‘ईरानी देशभक्तों’ को ललकारते हुए लिखा कि वे डटे रहें और अपनी सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करना शुरू करें। (Call for government institutional takeover) का यह संदेश किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की ओर से दिया गया सबसे आक्रामक बयान माना जा रहा है। ट्रंप का मानना है कि जब तक जनता स्वयं अपनी संस्थाओं का नियंत्रण नहीं संभालेगी, तब तक वहां के सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन लाना संभव नहीं होगा।

पुराने दोस्तों और निवेश के सुनहरे दौर की यादें

राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के दौरान अपने उन दोस्तों का भी जिक्र किया जो कभी ईरान में बड़ा निवेश किया करते थे। उन्होंने बताया कि एक समय था जब ईरान में निवेश से लोगों ने अच्छा पैसा कमाया और वहां का नेतृत्व भी व्यापार के अनुकूल था। लेकिन आज की स्थिति को देखते हुए (Economic collapse in Iran) का दर्द साफ झलकता है। ट्रंप की बातों से यह संकेत मिलता है कि वे ईरान को फिर से उसी वैश्विक आर्थिक मुख्यधारा में वापस लाना चाहते हैं, जहां वह कभी एक समृद्ध राष्ट्र के रूप में जाना जाता था।

लोकतंत्र की स्थापना और भविष्य की चुनौतियां

अंततः सवाल यही है कि क्या ट्रंप का यह दखल ईरान में वास्तविक लोकतंत्र ला पाएगा? ट्रंप ने कहा कि ‘आदर्श रूप से’ वे ईरान को लोकतांत्रिक देश के रूप में देखना चाहते हैं, जहां लोगों को अपनी बात कहने की आजादी हो और किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े। (Transition to democratic governance) की राह ईरान के लिए काफी कठिन हो सकती है, लेकिन अमेरिका के खुले समर्थन ने इस लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान की सड़कों और वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो मिडिल ईस्ट का भविष्य तय करेंगे।

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