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HangorSubmarine – लंबे इंतजार के बाद पाकिस्तान नौसेना में शामिल हुई पहली पनडुब्बी

HangorSubmarine – चीन के साथ हुए बहुचर्चित पनडुब्बी समझौते के एक दशक से अधिक समय बाद पाकिस्तान ने अपनी पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी को आधिकारिक तौर पर नौसेना बेड़े में शामिल कर लिया है। यह परियोजना पाकिस्तान के सबसे बड़े रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रमों में गिनी जाती है। हालांकि शुरुआती योजना के मुकाबले इसकी प्रगति काफी धीमी रही और निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिकांश पनडुब्बियों की आपूर्ति पूरी नहीं हो सकी।

pakistan navy hangor submarine inducted

साल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आठ हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों की खरीद को लेकर समझौता हुआ था। इस परियोजना के तहत चार पनडुब्बियां चीन में तैयार की जानी थीं, जबकि शेष चार को कराची स्थित शिपयार्ड में असेंबल करने की योजना बनाई गई थी।

तय कार्यक्रम से पीछे रही परियोजना

समझौते के अनुसार चीन में निर्मित पहली खेप की पनडुब्बियां कई वर्ष पहले पाकिस्तान को मिल जानी चाहिए थीं। लेकिन निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी केवल एक पनडुब्बी ही पाकिस्तानी नौसेना का हिस्सा बन सकी है।

चीन में निर्मित अन्य पनडुब्बियों को लॉन्च किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन वे अभी विभिन्न समुद्री परीक्षणों और तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रियाओं से गुजर रही हैं। ऐसे में परियोजना की मूल समयरेखा पूरी तरह प्रभावित हुई है।

इंजन आपूर्ति से जुड़ी चुनौती बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार देरी का एक प्रमुख कारण पनडुब्बियों में उपयोग किए जाने वाले इंजन से जुड़ा मामला रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती योजना में जर्मन तकनीक वाले इंजन शामिल किए जाने थे, लेकिन निर्यात अनुमति से संबंधित बाधाओं के बाद वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ी।

इसके बाद चीन में विकसित इंजन प्रणाली का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। इस बदलाव के चलते तकनीकी समायोजन और परीक्षण प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समय लगा, जिससे पूरी परियोजना की गति प्रभावित हुई।

महामारी और तकनीकी जटिलताओं का असर

कोविड-19 महामारी का प्रभाव भी इस रक्षा परियोजना पर पड़ा। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों और निर्माण गतिविधियों पर पड़े असर ने काम को धीमा कर दिया। साथ ही, नए डिजाइन और अत्याधुनिक प्रणालियों को एकीकृत करने में तकनीकी चुनौतियां भी सामने आईं।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इन कारणों से परियोजना की डिलीवरी कई वर्षों तक पीछे खिसक गई। अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी आठ पनडुब्बियों की आपूर्ति मूल योजना से काफी देर बाद पूरी हो सकती है।

स्थानीय निर्माण योजना पर भी नजर

परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पाकिस्तान में चार पनडुब्बियों का असेंबली कार्य है। कराची शिपयार्ड में इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने का उद्देश्य स्थानीय क्षमता विकसित करना था। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हिस्से की प्रगति भी अपेक्षाकृत धीमी रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि हैंगोर-क्लास कार्यक्रम तकनीकी और वित्तीय दोनों दृष्टि से पहले की स्थानीय नौसैनिक परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक जटिल है। इसलिए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए लंबे समय तक निरंतर निवेश और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।

अरबों डॉलर की लागत वाली परियोजना

हैंगोर-क्लास पनडुब्बी कार्यक्रम की अनुमानित लागत 4 से 5 अरब डॉलर के बीच बताई जाती है। इसी कारण इसे पाकिस्तान के इतिहास के सबसे बड़े और महंगे नौसैनिक रक्षा कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।

आमतौर पर इस तरह के बड़े रक्षा समझौतों में समयसीमा और लागत से जुड़े विशेष प्रावधान होते हैं। हालांकि इस परियोजना के अनुबंध की विस्तृत शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में संभावित दंडात्मक प्रावधानों या अतिरिक्त लागत से जुड़ी जानकारी आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

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