अंतर्राष्ट्रीय

IndusTreaty – सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच से दोहराया अपना पक्ष

IndusTreaty – भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने मंगलवार को एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख दुनिया के सामने रखा। सम्मेलन में पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने संधि को अब भी प्रभावी बताते हुए भारत के निर्णय पर आपत्ति जताई और इसे एकतरफा कदम करार दिया।

indus treaty pakistan conference

सम्मेलन में पाकिस्तान का आधिकारिक रुख

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लामाबाद भारत के फैसले को स्वीकार नहीं करता। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसमें किसी भी पक्ष को एकतरफा रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निलंबित या समाप्त करने का प्रावधान नहीं है। पाकिस्तान के सरकारी प्रसारक ‘रेडियो पाकिस्तान’ के मुताबिक, डार ने कहा कि 19 सितंबर 1960 को हुई इस संधि की वैधता आज भी बरकरार है और इसका पालन किया जाना चाहिए।

बिलावल भुट्टो ने वैश्विक सम्मेलन का दिया सुझाव

सम्मेलन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी किसी प्रकार की सौदेबाजी या राजनीतिक बातचीत का विषय नहीं हो सकती। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलमार्गों के उपयोग से जुड़े सिद्धांतों पर चर्चा के लिए एक नए वैश्विक सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, दुनिया को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि नदियों और अन्य जलमार्गों का इस्तेमाल किसी भी देश पर दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

प्रमुख जलमार्गों का दिया उदाहरण

अपने संबोधन में बिलावल भुट्टो ने सिंधु नदी की तुलना दुनिया के कई महत्वपूर्ण जलमार्गों से की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य, स्वेज नहर, पनामा नहर, नील नदी, टिगरिस और यूफ्रेटिस नदियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग वैश्विक महत्व रखते हैं। उनका कहना था कि जिस प्रकार होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय शांति और व्यापार पर पड़ता है, उसी तरह सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दे भी भारत और पाकिस्तान के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

जल प्रबंधन को लेकर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता

भारत द्वारा सिंधु जल संधि से जुड़े कुछ प्रावधानों को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न होने से पाकिस्तान को नदियों में जल प्रवाह का समय पर अनुमान लगाने में कठिनाई हो सकती है। इससे बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों के लिए अग्रिम तैयारी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था और जलविद्युत उत्पादन का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है, इसलिए इस विषय को लेकर वहां गंभीर चर्चा जारी है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.