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Iran Protests and Civil Unrest 2026: शहजादे की एक पुकार ढहा देगी इस्लामिक सत्ता का किला, आखिर क्या होगा अंजाम…

Iran Protests and Civil Unrest 2026: ईरान में पिछले 12 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक बेहद भयावह और निर्णायक मोड़ ले लिया है। गुरुवार की काली रात को पूरे देश में अचानक इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, जिससे पूरा मुल्क दुनिया से कट गया है। यह सख्त कदम ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी द्वारा एक विशाल (Mass Anti Government Protest) के आह्वान के तुरंत बाद उठाया गया। ईरानी हुकूमत इस डिजिटल ब्लैकआउट के जरिए प्रदर्शनकारियों के आपसी संपर्क को तोड़ना चाहती है ताकि विद्रोह की आग को फैलने से रोका जा सके।

Iran Protests and Civil Unrest 2026
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आर्थिक बदहाली और महंगाई की मार

इस ताजा अशांति की चिंगारी 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ऐतिहासिक बाजार से उठी थी, जो अब पूरे देश में फैल चुकी है। ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ अपनी कीमत खोकर ऐतिहासिक गिरावट देख रही है और (Inflation Rate Crisis) के 42 प्रतिशत के पार पहुंचने से आम जनता की कमर टूट गई है। जून 2024 में इजरायल के साथ हुए युद्ध की विभीषिका और वर्षों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने देश को दिवालिएपन की कगार पर खड़ा कर दिया है, जिससे त्रस्त होकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

बिजली और ईंधन के संकट ने घी का काम किया

ईरान जैसा तेल समृद्ध देश आज बिजली की भारी कटौती और ईंधन की किल्लत से जूझ रहा है, जिसने नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि सरकार (Economic Sanctions Impact) का रोना रोकर पल्ला झाड़ रही है। आम जनता का मानना है कि सत्ता की प्राथमिकताओं में जनता का हित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संघर्ष और वैचारिक लड़ाई प्रमुख है। इसी गुस्से ने तेहरान से लेकर सुदूर प्रांतों तक विद्रोह की लहर पैदा कर दी है।

सुरक्षा बलों की सख्ती और मासूमों का लहू

मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं; सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में अब तक 45 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं। (Human Rights Violations) की इस गंभीर स्थिति के बीच करीब 2,260 से ज्यादा लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया गया है। वहीं ईरान के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि जो भी ‘दुश्मनों’ की मदद करेगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का बढ़ता प्रभाव

1979 की क्रांति के बाद निर्वासित हुए शाह के पुत्र रजा पहलवी एक बार फिर विपक्षी आंदोलन के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। उनके एक आह्वान पर हजारों लोग सड़कों पर उतरकर “तानाशाह की मौत” के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनों के दौरान (Iranian Monarchy Support) के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं, जो मौजूदा शासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। पहलवी ने पहले ही अंदेशा जताया था कि घबराई हुई सरकार सूचनाओं का गला घोंटने के लिए इंटरनेट काट सकती है।

व्हाइट हाउस की ईरान को सीधी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि ईरानी प्रशासन ने अपने ही नागरिकों का कत्लेआम जारी रखा, तो वाशिंगटन (Global Diplomatic Pressure) के साथ-साथ ईरान पर बेहद कड़ी चोट करेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने भी ईरानी अर्थव्यवस्था की जर्जर स्थिति का उल्लेख करते हुए इसे ‘अत्यंत नाजुक’ बताया है, जो किसी भी वक्त पूरी तरह ढह सकती है।

क्या यह नई क्रांति की शुरुआत है?

दुनिया भर की निगाहें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि यह आंदोलन अब केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह (Regime Change Movement) का रूप ले चुका है। जिस तरह से आम जनता ने गोलियों की परवाह किए बिना शाह के शासन की प्रशंसा के नारे लगाए हैं, उसने सत्ता की बुनियाद हिला दी है। अगर इंटरनेट की पाबंदी और गिरफ्तारी का दौर इसी तरह जारी रहा, तो ईरान में एक बड़े गृहयुद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता

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