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Iran Verdict – ईरान में नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को फिर जेल, सजा बढ़ी…

Iran Verdict – ईरान की एक अदालत ने नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर कठोर सजा सुनाते हुए कुल सात साल से अधिक की जेल का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब उनकी सेहत पहले से ही गंभीर बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की निगाहें ईरान की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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अदालत का फैसला और लगाए गए आरोप

तेहरान की अदालत ने नरगिस मोहम्मदी को “अपराध करने की साजिश रचने और गैरकानूनी रूप से एकत्र होने” के आरोप में छह साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रचार गतिविधियों से जुड़े एक अन्य मामले में उन्हें डेढ़ साल की अतिरिक्त सजा दी गई है। अदालत के आदेश के अनुसार, उन्हें दो वर्षों तक देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और इसी अवधि के लिए दक्षिण खोरासान प्रांत के पूर्वी शहर खोसफ में निर्वासित भी किया जाएगा।

उनके वकील मुस्तफा नीली ने बताया कि ईरानी कानून के तहत सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए सबसे लंबी अवधि वाली सजा ही प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय अंतिम नहीं है और इसे उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

स्वास्थ्य स्थिति और जमानत की संभावना

नरगिस मोहम्मदी की सेहत लंबे समय से चिंता का विषय रही है। हाल के महीनों में उनके शरीर से ट्यूमर हटाया गया और हड्डी प्रत्यारोपण जैसी जटिल चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं। वकील का कहना है कि इन्हीं स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अस्थायी जमानत की मांग की जा सकती है, ताकि उन्हें उचित इलाज मिल सके। हालांकि इससे पहले भी ऐसी अपीलों पर प्रशासन का रुख सख्त ही रहा है।

लंबा संघर्ष और लगातार गिरफ्तारियां

53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी बीते करीब ढाई दशकों से ईरान में मानवाधिकारों के लिए मुखर आवाज बनी हुई हैं। उन्होंने मृत्युदंड के खिलाफ, महिलाओं पर लागू अनिवार्य ड्रेस कोड के विरोध में और राजनीतिक कैदियों के अधिकारों को लेकर लगातार अभियान चलाया है। इस सक्रियता की कीमत उन्हें बार-बार गिरफ्तारी के रूप में चुकानी पड़ी।

अब तक उनके खिलाफ कुल मिलाकर 31 वर्षों से अधिक की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनाई जा चुकी है, हालांकि कोड़ों की सजा अभी तक लागू नहीं की गई है। बीते दस वर्षों का बड़ा हिस्सा उन्होंने जेल में ही बिताया है।

परिवार से दूरी और निजी पीड़ा

नरगिस मोहम्मदी की निजी जिंदगी भी इस संघर्ष से अछूती नहीं रही। उनके जुड़वां बच्चे पेरिस में रहते हैं और वह वर्ष 2015 के बाद से उनसे मिल नहीं पाई हैं। परिवार से यह लंबी दूरी उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी असर डालती रही है, जिसकी चर्चा उन्होंने अपने पत्रों और संदेशों में कई बार की है।

हालिया गिरफ्तारी और जेल के भीतर विरोध

दिसंबर 2024 में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें अस्थायी रूप से रिहा किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में एक मानवाधिकार वकील की शोक सभा में शामिल होने के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया। आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ बल प्रयोग किया गया।

जेल में रहते हुए भी उन्होंने विरोध का रास्ता नहीं छोड़ा। फरवरी 2026 की शुरुआत में उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की, जिसका उद्देश्य अपनी कथित गैरकानूनी हिरासत और ईरान की जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करना था।

नोबेल शांति पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

वर्ष 2023 में नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें ईरान में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार, मृत्युदंड और राजनीतिक दमन के विरोध में किए गए उनके प्रयासों के लिए दिया गया। उस समय वह जेल में थीं, इसलिए उनकी ओर से यह सम्मान उनके बच्चों ने ग्रहण किया था।

एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान, चीन को छोड़कर, दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर साल सबसे अधिक लोगों को फांसी दी जाती है। इन संगठनों ने नरगिस मोहम्मदी के मामले में भी निष्पक्ष न्याय और उनकी तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है।

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