Nepal Aviation Safety Incident: मौत के साए से सुरक्षित निकली 55 जिंदगियां, रनवे पर बेकाबू हुआ बुद्धा एयर का विमान
Nepal Aviation Safety Incident: नेपाल के विमानन इतिहास में शुक्रवार की रात एक और खौफनाक अध्याय जुड़ते-जुड़ते रह गया। काठमांडू से भद्रपुर जा रही बुद्धा एयर की एक फ्लाइट लैंडिंग के दौरान अचानक रनवे से फिसलकर घास के मैदान में जा घुसी। इस (Emergency Landing Situations) के दौरान विमान में सवार 51 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सांसें हलक में अटक गईं। गनीमत यह रही कि पायलट की सूझबूझ और किस्मत के साथ ने एक बड़े हादसे को टाल दिया, जिससे विमान में सवार सभी 55 लोग सुरक्षित बचा लिए गए।

अंधेरी रात और रनवे से फिसलने का वो मंजर
फ्लाइट नंबर 901, जिसका एयरक्राफ्ट कोड 9N-AMF था, ने काठमांडू से रात 8:23 बजे उड़ान भरी थी। जैसे ही विमान भद्रपुर एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा, वह अनियंत्रित होकर रनवे की तय सीमा से बाहर निकल गया। नेपाल की (Civil Aviation Security Protocols) के अनुसार, लैंडिंग के समय विमान की गति और रनवे की सतह के बीच तालमेल बिगड़ना अक्सर खतरनाक साबित होता है। विमान रनवे के किनारे कच्ची जमीन और घास वाले क्षेत्र में जाकर रुका, जिससे विमान के निचले हिस्से को मामूली नुकसान पहुंचा है।
एयरलाइन और नेपाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई
हादसे के तुरंत बाद एयरपोर्ट पर हड़कंप मच गया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए गए। बुद्धा एयर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान (Runway Excursion Accident) का शिकार हुआ है, लेकिन प्राथमिकता के आधार पर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। नेपाल पुलिस के जवानों ने मौके पर पहुंचकर क्रू मेंबर्स की मदद की और सुनिश्चित किया कि किसी भी यात्री को कोई गंभीर चोट न आए।
तकनीकी टीम और जांच के लिए काठमांडू से मदद
हादसे की गंभीरता को देखते हुए बुद्धा एयर ने तत्काल प्रभाव से काठमांडू से एक विशेष तकनीकी और राहत टीम को दूसरे विमान से भद्रपुर भेजा है। यह टीम विमान के (Aircraft Technical Evaluation) की प्रक्रिया पूरी करेगी ताकि यह पता चल सके कि दुर्घटना यांत्रिक खराबी के कारण हुई या मानवीय चूक के चलते। यह विमान भद्रपुर में नाइट हॉल्ट करने वाला था और अगली सुबह वापस काठमांडू के लिए उड़ान भरने के लिए निर्धारित था, लेकिन अब जांच पूरी होने तक इसे ग्राउंडेड कर दिया गया है।
नेपाल के दुर्गम हवाई मार्गों पर सुरक्षा की चिंता
नेपाल का भौगोलिक ढांचा और बदलता मौसम अक्सर विमानों के संचालन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। भद्रपुर जैसे छोटे एयरपोर्ट्स पर (Aviation Risk Management) की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वहां रनवे की लंबाई और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता अक्सर सीमित होती है। हाल के वर्षों में नेपाल में हुए विमान हादसों ने वैश्विक स्तर पर यहां की हवाई सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय विमानन एजेंसियां भी चिंता व्यक्त कर चुकी हैं।
सौर्या एयरलाइंस की कड़वी यादें हुई ताजा
शुक्रवार की इस घटना ने जुलाई 2024 के उस मंजर को ताजा कर दिया, जब सौर्या एयरलाइंस का विमान काठमांडू में क्रैश हो गया था। उस समय (Air Crash Investigation Reports) में विमान के टेकऑफ के दौरान संतुलन बिगड़ने की बात सामने आई थी, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई थी। शुक्र है कि बुद्धा एयर के इस मामले में जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन रनवे से बाहर निकलने की इस घटना ने नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण को फिर से अपनी सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
रनवे की स्थिति और मौसम की भूमिका
प्रारंभिक रिपोर्टों में यह संकेत मिल रहे हैं कि लैंडिंग के वक्त विजिबिलिटी और रनवे की सतह की स्थिति ने इस हादसे में भूमिका निभाई होगी। अक्सर (Airport Infrastructure Safety) के मानकों में कमी और रनवे पर पानी या फिसलन होने की वजह से टायर अपनी पकड़ खो देते हैं। जांच दल इस बात की भी पड़ताल करेगा कि क्या लैंडिंग के दौरान विंड शीयर (हवा के दबाव में अचानक बदलाव) जैसी कोई स्थिति पैदा हुई थी, जिसने पायलट के नियंत्रण को प्रभावित किया।
भविष्य की सुरक्षा के लिए कड़े कदमों की जरूरत
नेपाल में पर्यटन का एक बड़ा हिस्सा हवाई यात्रा पर निर्भर है, ऐसे में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। (Passenger Safety Regulations) को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे डरावने अनुभवों से बचा जा सके। फिलहाल भद्रपुर एयरपोर्ट पर स्थिति सामान्य है, लेकिन बुद्धा एयर की इस फ्लाइट के साथ जो हुआ, वह एक गंभीर चेतावनी है कि विमानन क्षेत्र में जरा सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।



