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Pentagon Report on China India Border: भारत-चीन सीमा विवाद पर पेंटागन के सनसनीखेज खुलासे से मचा हड़कंप, बीजिंग ने दी सीधी चेतावनी

Pentagon Report on China India Border: चीन ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की उस हालिया रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें बीजिंग की रणनीतिक चालों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन ने भारत के साथ सीमा पर तनाव केवल इसलिए कम किया ताकि वह नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच बढ़ती नजदीकियों में सेंध लगा सके। (Geopolitical Strategic Rivalry) के इस दौर में पेंटागन का यह मानना है कि चीन अपनी रक्षा नीति का इस्तेमाल भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर करने के लिए कर रहा है। हालांकि, बीजिंग ने इन दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठे विमर्श पर आधारित बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना विरोध दर्ज कराया है।

Pentagon Report on China India Border
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झूठे विमर्श के जरिए मतभेद पैदा करने की कोशिश

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अमेरिका पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्ध विभाग की यह रिपोर्ट हकीकत से कोसों दूर है और इसका उद्देश्य केवल दो पड़ोसी देशों के बीच गलतफहमियां पैदा करना है। (International Relations Friction) को बढ़ावा देने वाली इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए लिन ने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य श्रेष्ठता को सही ठहराने के लिए अक्सर इस तरह के बहाने ढूंढता रहता है। चीन के अनुसार, पेंटागन की रिपोर्ट न केवल उसकी रक्षा नीति को तोड़-मरोड़कर पेश करती है, बल्कि यह चीन की वैश्विक छवि को धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास भी है।

चीन और पाकिस्तान के बीच ‘गुप्त सैन्य अड्डे’ का सच

चीनी रक्षा मंत्रालय ने उन दावों की भी कड़ी निंदा की है जिनमें चीन और पाकिस्तान के बीच अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं। पेंटागन की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि बीजिंग और इस्लामाबाद मिलकर एक साझा सैन्य अड्डा स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। (Military Base Collaboration) के इस दावे को चीन ने अपने आंतरिक मामलों में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप करार दिया है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियागांग ने स्पष्ट किया कि अमेरिका हर साल ऐसी निराधार रिपोर्ट जारी कर दुनिया को गुमराह करने का काम करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ठीक नहीं है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति स्थिर होने का दावा

भारत-चीन सीमा विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के जिक्र पर चीन ने अपना रुख काफी कड़ा रखा है। लिन जियान ने जोर देकर कहा कि सीमा का मसला भारत और चीन के बीच का एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। (Border Dispute Management) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में सीमा पर स्थिति पूरी तरह स्थिर है और दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल रहे हैं। चीन का मानना है कि अमेरिका द्वारा की गई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां केवल आग में घी डालने का काम करती हैं, जिसका उद्देश्य एशिया में तनाव बनाए रखना है।

अपनी सैन्य श्रेष्ठता दिखाने का अमेरिकी बहाना

बीजिंग का मानना है कि पेंटागन की वार्षिक रिपोर्ट एक ऐसा हथियार है जिसे अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति और बजट को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करता है। (Global Military Hegemony) बनाए रखने की होड़ में अमेरिका दूसरे देशों की रक्षा नीतियों को एक खतरे के रूप में पेश करता है। लिन जियान ने तर्क दिया कि चीन की बढ़ती ताकत से अमेरिका डरा हुआ है और इसीलिए वह भारत जैसे देशों को अपनी ओर खींचने के लिए चीन का डर दिखा रहा है। चीन ने इस रिपोर्ट को शीत युद्ध की मानसिकता का परिणाम बताते हुए कहा कि इसे वैश्विक शांति के पक्षधर देशों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

भारत-अमेरिका संबंधों में सेंध लगाने की रणनीति

अमेरिकी रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया था कि चीन ने हाल के महीनों में भारत के प्रति अपने रुख में नरमी दिखाई है। इसके पीछे का मुख्य कारण (Foreign Policy Maneuvering) बताया गया है, ताकि भारत को वाशिंगटन के सुरक्षा तंत्र से दूर रखा जा सके। पेंटागन का दावा है कि चीन यह कभी नहीं चाहेगा कि भारत पूरी तरह से अमेरिकी खेमे में शामिल हो जाए, क्योंकि इससे दक्षिण एशिया में बीजिंग का प्रभुत्व कम हो सकता है। चीन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी नीतियां किसी देश विशेष को लक्षित करने के बजाय क्षेत्रीय शांति और विकास पर केंद्रित हैं।

चीन-पाकिस्तान रक्षा संबंधों पर पेंटागन की नजर

पेंटागन की रिपोर्ट में पाकिस्तान के साथ चीन के गहरे होते सैन्य संबंधों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन पाकिस्तान को न केवल आधुनिक हथियार दे रहा है, बल्कि (Defense Cooperation Agreements) के जरिए वहां अपनी सैन्य उपस्थिति को भी मजबूत कर रहा है। झांग शियागांग ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि दो संप्रभु देशों के बीच सहयोग अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है। उन्होंने अमेरिका को नसीहत दी कि वह दूसरों के संबंधों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने स्वयं के सैन्य प्रसार पर ध्यान दे, जो दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता का कारण बना हुआ है।

निराधार और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों का विरोध

चीनी अधिकारियों ने वैश्विक मीडिया के सामने यह स्पष्ट किया कि वे अमेरिका की इस तरह की गतिविधियों का कड़ा विरोध जारी रखेंगे। लिन जियान ने कहा कि (National Security Documentation) के नाम पर अमेरिका जो रिपोर्ट पेश करता है, उनमें तथ्यों की कमी होती है। चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस तरह के एकतरफा दावों पर विश्वास न करें। बीजिंग के अनुसार, चीन और भारत के पास अपने विवादों को सुलझाने के लिए पर्याप्त परिपक्वता और कूटनीतिक तंत्र मौजूद है, जिसमें अमेरिका की भागीदारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

एशियाई राजनीति में अमेरिका का बढ़ता दखल

अंततः, चीन का यह तीखा विरोध दर्शाता है कि आने वाले समय में वाशिंगटन और बीजिंग के बीच जुबानी जंग और भी तेज हो सकती है। (Asian Geopolitical Stability) के लिए यह आवश्यक है कि बड़ी शक्तियां एक-दूसरे के संप्रभु मामलों का सम्मान करें। चीन ने साफ़ कर दिया है कि वह अमेरिका के ‘झूठे विमर्श’ के आगे झुकने वाला नहीं है। सीमा पर शांति बहाली की प्रक्रिया को चीन ने अपनी सद्भावना का हिस्सा बताया है, जबकि पेंटागन इसे एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रहा है। अब देखना यह होगा कि भारत इस महाशक्ति संघर्ष के बीच अपनी कूटनीतिक स्वायत्तता को कैसे बनाए रखता है।

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