Starlink – पाकिस्तान में सैटेलाइट इंटरनेट लाइसेंस पर बढ़ी अनिश्चितता, सुरक्षा और भू-राजनीति बनी वजह
Starlink – पाकिस्तान में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं को लेकर बड़े निवेश की उम्मीदें तो हैं, लेकिन अरबपति उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के लिए रास्ता फिलहाल आसान नहीं दिख रहा। देश में परिचालन की अनुमति मिलने में हो रही देरी के पीछे डेटा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और बाजार में मौजूद प्रतिस्पर्धा जैसे कई संवेदनशील कारण सामने आए हैं।

लाइसेंस प्रक्रिया पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर
पाकिस्तानी सरकारी हलकों में यह चिंता गहराई से उभरी है कि विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियां स्थानीय निगरानी और नियामक ढांचे के बाहर जाकर डेटा का प्रसारण कर सकती हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता कि उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के कानूनों के दायरे में सुरक्षित रहेगा, तब तक किसी भी कंपनी को अंतिम मंजूरी देना जोखिम भरा होगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि डेटा चोरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी वजह से सुरक्षा जांच को प्राथमिकता दी जा रही है और इसी प्रक्रिया ने लाइसेंसिंग की गति को धीमा कर दिया है।
मस्क-ट्रंप विवाद ने बढ़ाई कूटनीतिक जटिलता
स्टारलिंक की राह में केवल तकनीकी और सुरक्षा चिंताएं ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी एक अहम कारक बन गई है। एलन मस्क और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सार्वजनिक मतभेदों को पाकिस्तान में भी ध्यान से देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद वाशिंगटन और इस्लामाबाद के संबंधों में सुधार देखने को मिला है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार कोई ऐसा फैसला लेने से बच रही है, जिससे अमेरिका के साथ रिश्तों में असहजता पैदा हो। यही कारण है कि स्टारलिंक के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
चीनी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी
पाकिस्तान के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में चीनी कंपनियों की पकड़ पहले से ही मजबूत मानी जाती है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चीन स्थित शंघाई स्पेसकॉम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड सहित कई कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही हैं और वे स्टारलिंक को अपने लिए सीधा प्रतिस्पर्धी मानती हैं।
चीनी कंपनियों के लंबे समय से पाकिस्तान में तकनीकी और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश ने उन्हें रणनीतिक बढ़त दी है। ऐसे में किसी अमेरिकी कंपनी को मंजूरी देने से पहले सरकार हर पहलू पर संतुलन बनाकर चलना चाहती है।
कई कंपनियों की नजर, निवेश की बड़ी संभावनाएं
वर्तमान में कम से कम पांच अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पाकिस्तान में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की इच्छा जता चुकी हैं। इन कंपनियों ने देश में लाखों अमेरिकी डॉलर के निवेश की योजना भी सरकार के सामने रखी है।
पाकिस्तान अंतरिक्ष गतिविधि नियामक बोर्ड के अनुसार, स्टारलिंक समेत सभी इच्छुक कंपनियों की आवेदन प्रक्रिया अभी पंजीकरण के चरण में है। बोर्ड की ओर से लाइसेंसिंग ढांचे को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तेज हो पाएगी।
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के लिए अहम परियोजना
विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं पाकिस्तान के दूरदराज और पिछड़े इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि तकनीकी विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों और डेटा संप्रभुता से कोई समझौता न हो।
फिलहाल, सभी पक्षों की नजर नियामक बोर्ड के अगले कदम पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि पाकिस्तान का सैटेलाइट इंटरनेट बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।



