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Taliban Pakistan Conflict Updates: क्या काबुल और इस्लामाबाद के बीच टल गया युद्ध का खतरा, तालिबान ने पाकिस्तान को दी दो-टूक चेतावनी…

Taliban Pakistan Conflict Updates: अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपना रुख साफ कर दिया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि उनकी सरकार पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के युद्ध की उम्मीद नहीं करती है। मुजाहिद ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार अच्छे पड़ोसी संबंधों (Good Neighborly Relations Policy) की नीति पर मजबूती से कायम है। उनके अनुसार, दोनों मुस्लिम देशों के बीच किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव किसी के भी हित में नहीं है और इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

Taliban Pakistan Conflict Updates
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बढ़ते तनाव के पीछे छिपे दो सबसे बड़े कारण

मुजाहिद ने काबुल और इस्लामाबाद के बीच पैदा हुई कड़वाहट के पीछे दो मुख्य बिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया है। पहला कारण उन्होंने यह बताया कि पाकिस्तान के कुछ खास गुट किसी तीसरे देश (Foreign Influence On Pakistan) के इशारे पर काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों की मित्रता के खिलाफ हैं। दूसरा कारण उन्होंने यह बताया कि पाकिस्तान में कुछ लोग इस गलतफहमी में जी रहे थे कि तालिबान सत्ता में आने के बाद पूरी तरह से इस्लामाबाद के नियंत्रण में रहेगा। मुजाहिद ने स्पष्ट किया कि तालिबान एक स्वतंत्र इकाई है और किसी के दबाव में काम नहीं करेगा।

टीटीपी को लेकर तालिबान का बड़ा खुलासा

सुरक्षा के मोर्चे पर जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का सवाल उठा, तो मुजाहिद ने इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान का आंतरिक मामला करार दिया। उन्होंने पाकिस्तान के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि टीटीपी अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर रहा है। तालिबानी प्रवक्ता का दावा है कि टीटीपी के ठिकाने और कमांड जोन (TTP Safe Havens Dispute) पूरी तरह से पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर ही स्थित हैं। मुजाहिद के अनुसार, टीटीपी को अपनी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान आने की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए इस्लामाबाद को अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढना चाहिए।

भाड़े के सैनिकों और थोपी गई लड़ाई का जिक्र

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने वर्तमान संघर्ष को ‘थोपा हुआ युद्ध’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पाकिस्तान के वास्तविक हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि कुछ हमलावर समूह भाड़े के सैनिकों (Proxy War Allegations) की तरह बाहरी ताकतों की योजना को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि ‘इस्लामिक एमिरेट’ पाकिस्तान का विस्तार है। मुजाहिद ने आह्वान किया कि पाकिस्तान को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाया जा सके।

20 साल के संघर्ष और विदेशी समर्थन पर सफाई

तालिबान ने उन दावों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता रहा है कि पिछले दो दशकों के युद्ध में उन्हें किसी विदेशी देश का समर्थन प्राप्त था। प्रवक्ता ने गर्व से कहा कि अफगानिस्तान का युद्ध पूरी तरह से देश की अपनी धरती पर लड़ा गया था। तालिबान ने हर प्रांत में (Independent Afghan Struggle) के माध्यम से अपनी ताकत दिखाई और किसी भी बाहरी देश का एहसान नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी आजादी के लिए किसी अन्य देश के कर्जदार नहीं हैं, जिससे यह संदेश गया कि वे पाकिस्तान के प्रति भी कोई विशेष जवाबदेही नहीं रखते।

विश्वास बहाली के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता

बढ़ते गतिरोध को सुलझाने के लिए तालिबान ने अब बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। मुजाहिद ने कहा कि काबुल-इस्लामाबाद के बीच विश्वास बहाली (Bilateral Dialogue Reinstatement) के लिए उच्च स्तरीय वार्ता का फिर से शुरू होना अनिवार्य है। प्रवक्ता के अनुसार, तनाव केवल नकारात्मक प्रभाव डालता है और इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने विश्वास जताया कि मेज पर बैठकर ही सभी गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है और एक स्थिर भविष्य की नींव रखी जा सकती है।

वर्चुअल मीटिंग और धार्मिक विद्वानों का समर्थन

तालिबान के इस रुख का समर्थन अब अफगानिस्तान की अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों से भी मिल रहा है। हाल ही में हुई एक वर्चुअल मीटिंग में देश के प्रमुख धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक हस्तियों ने दोनों देशों के बीच (Diplomatic Resolution Efforts) को तुरंत तेज करने का सुझाव दिया है। इन विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर जारी सैन्य तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन मिलना चाहिए। विद्वानों ने चेतावनी दी है कि देरी करने से स्थिति और भी जटिल हो सकती है, जिसका असर आम नागरिकों पर पड़ेगा।

रचनात्मक भविष्य की ओर तालिबान के कदम

अंत में, तालिबान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को रचनात्मक दिशा में ले जाना चाहता है। मुजाहिद ने कहा कि वे युद्ध के बजाय आर्थिक सहयोग और शांति (Peaceful Coexistence Policy) को प्राथमिकता देते हैं। तालिबान का मानना है कि यदि पाकिस्तान अपनी पुरानी धारणाओं को छोड़ दे, तो दोनों राष्ट्र विकास के नए अध्याय लिख सकते हैं। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है कि वह तालिबान की इस शांति की पहल पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

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