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Tibet Earthquake – तिब्बत में देर रात 4.5 तीव्रता का भूकंप, केंद्र 25 किमी नीचे

Tibet Earthquake – तिब्बत में देर रात करीब ढाई बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय इलाकों में लोग अचानक नींद से जाग गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने पुष्टि की है कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 दर्ज की गई और इसका केंद्र धरती के लगभग 25 किलोमीटर नीचे स्थित था। हालांकि शुरुआती जानकारी में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता पर एक बार फिर ध्यान खींचा है।

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उथले भूकंप का बढ़ा हुआ जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, जब भूकंप का केंद्र धरती की सतह के अपेक्षाकृत करीब होता है, तो उसके प्रभाव अधिक तीव्र महसूस किए जाते हैं। उथली गहराई से निकलने वाली भूकंपीय तरंगें कम दूरी तय करती हैं, लेकिन उनकी ऊर्जा सतह पर ज्यादा केंद्रित होती है। इसी कारण ऐसे झटकों में इमारतों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां निर्माण मानक कमजोर हैं।

तिब्बती पठार की भूगर्भीय स्थिति
तिब्बती पठार को लंबे समय से भूकंप संभावित क्षेत्र माना जाता है। यह इलाका कई सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन क्षेत्र में स्थित है, जहां भूगर्भीय हलचलें लगातार होती रहती हैं। तिब्बत और नेपाल एक प्रमुख फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं, जिसके कारण यहां भूकंपीय गतिविधियां सामान्य मानी जाती हैं। यूरेशियन प्लेट से लगातार टकराव के कारण धरती के भीतर ऊर्जा जमा होती रहती है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलती है।

पूर्व-पश्चिम फैला भूगर्भीय तनाव क्षेत्र
यह पठार पूर्व से पश्चिम तक फैला हुआ है और इसके नीचे की टेक्टोनिक प्लेटें धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसक रही हैं। इस उठान का प्रभाव हिमालय की ऊंची चोटियों तक महसूस किया जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी भूगर्भीय प्रक्रिया के कारण इस पूरे क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहता है।

पहचानी गई दरारें और फॉल्ट लाइनें
1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में उपग्रह चित्रों के अध्ययन से दक्षिणी तिब्बत में सात प्रमुख उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली दरारें और नॉर्मल फॉल्ट की पहचान की गई थी। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ये फॉल्ट लाइनें करीब आठ लाख साल पहले बनी थीं और आज भी सक्रिय हैं। इन्हीं संरचनाओं के कारण क्षेत्र में बार-बार भूकंपीय घटनाएं होती रहती हैं।

ऐतिहासिक भूकंप और हालिया घटनाएं
तिब्बत में पहले भी स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट पर 8 तक की तीव्रता वाले भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि नॉर्मल फॉल्ट लाइन पर आमतौर पर 4 से 7 तीव्रता के झटके आते हैं। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले म्यांमार में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके झटके कोलकाता तक महसूस किए गए थे। इसका केंद्र येनांगयौंग शहर से लगभग 95 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था।

भूकंप क्यों आते हैं — सरल वैज्ञानिक व्याख्या
भूकंप मुख्य रूप से धरती की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण आते हैं। पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़े हिस्सों में बंटी हुई है, जो बेहद धीमी गति से लगातार खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा जमा होती है। यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है और भूकंप का रूप ले लेती है। भारत और म्यांमार के बीच इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव को भी इस क्षेत्र में भूकंप का प्रमुख कारण माना जाता है।

चीन के रयूक्यू द्वीप समूह में भी झटका
इसी सप्ताह बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार शाम 6 बजकर 20 मिनट पर चीन के रयूक्यू द्वीप समूह में 5.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार, इसका केंद्र करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था और इसे 29.07 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 130.41 डिग्री पूर्वी देशांतर पर चिन्हित किया गया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत सक्रिय बना हुआ है।

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