Transnational Repression Investigation: ब्रिटेन में पाकिस्तानी असंतुष्टों पर जानलेवा हमले, स्कॉटलैंड यार्ड ने शुरू की बड़ी जांच
Transnational Repression Investigation: ब्रिटेन की धरती पर रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी है। स्कॉटलैंड यार्ड की आतंकवाद-रोधी कमान अब उन हमलों की गहन जांच कर रही है, जिनमें पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के आलोचकों को बेरहमी से निशाना बनाया गया है। पुलिस को प्रारंभिक जांच में (Political Assassination Attempt) के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिसमें किसी विदेशी राष्ट्र द्वारा अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए स्थानीय अपराधियों को ‘प्रॉक्सी’ के रूप में इस्तेमाल करने का संदेह जताया गया है। यह मामला विशेष रूप से तब गरमाया जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगियों पर सुनियोजित तरीके से हमले किए गए।

कैम्ब्रिजशायर और बकिंघमशायर में हमलों का खौफनाक सिलसिला
दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ यह सिलसिला अब तक चार अलग-अलग हमलों के रूप में सामने आ चुका है, जिनमें आगजनी और गोलीबारी जैसी घटनाएं शामिल हैं। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर बकिंघमशायर के चेशम में एक इमरान समर्थक के घर में घुसकर तोड़फोड़ की गई, जिसने (Targeted Criminal Violence) की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है। इसके ठीक बाद कैम्ब्रिजशायर में मानवाधिकार वकील मिर्जा शहजाद अकबर पर उनके घर के बाहर हमला हुआ। अकबर ने बताया कि एक नकाबपोश हमलावर ने उनके चेहरे पर ताबड़तोड़ मुक्के बरसाए, जो किसी पेशेवर बॉक्सर की तरह केवल उनके चेहरे को ही निशाना बना रहा था, जिससे उनका पूरा परिवार दहशत में आ गया।
बंदूक की गोलियां और आगजनी की नाकाम कोशिश
पुलिस की सुरक्षा सलाह के बावजूद शहजाद अकबर के आवास पर हमलों का दौर थमा नहीं और 31 दिसंबर को स्थिति बेहद खतरनाक हो गई। जब अकबर कुछ समय के लिए अपने घर पहुंचे थे, तो उनके वहां से निकलते ही दो हमलावरों ने खिड़की पर तीन राउंड (Firearm Discharge Incident) को अंजाम दिया। इतना ही नहीं, हमलावरों ने जलता हुआ कपड़ा घर के भीतर फेंककर आग लगाने की भी कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों की सजगता के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच तेज कर दी है ताकि इन नकाबपोश हमलावरों की पहचान की जा सके।
नस्लभेदी भित्तिचित्र और लोहे की रॉड से हमला
जनवरी के पहले सप्ताह में भी इन हमलों का सिलसिला जारी रहा, जब 10 जनवरी को एक अज्ञात व्यक्ति ने अकबर के घर की दीवार पर संदिग्ध केमिकल छिड़का और खिड़कियां तोड़ दीं। घटना स्थल पर (Racial Hate Crimes) से संबंधित कुछ भित्तिचित्र भी बनाए गए थे, जिसे पुलिस जांच भटकाने की एक साजिश के रूप में देख रही है। इस मामले में एसेक्स से एक 34 वर्षीय संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आगजनी और अवैध हथियार रखने का संदेह है, हालांकि उसे फिलहाल जमानत पर रिहा कर दिया गया है। लंदन काउंटर-टेररिज्म पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन तमाम कड़ियों का आपस में क्या संबंध है।
पाकिस्तानी शासन और सैन्य प्रतिष्ठान पर गंभीर आरोप
मिर्जा शहजाद अकबर ने अपनी जान के खतरे को देखते हुए सीधे तौर पर पाकिस्तानी सैन्य शासन की ओर इशारा किया है। उनका मानना है कि चूंकि वे निर्वासन में रहकर वहां की सत्ता की आलोचना कर रहे हैं, इसलिए उन्हें चुप कराने के लिए (State Sponsored Terrorism) का सहारा लिया जा रहा है। अकबर का कहना है कि हमलावर गोरे मूल के थे, जिससे यह प्रतीत होता है कि उन्हें किसी विदेशी एजेंसी द्वारा सुपारी देकर काम पर रखा गया था। उल्लेखनीय है कि साल 2023 में भी उन पर एक जानलेवा एसिड अटैक हुआ था, जिसकी गुत्थी ब्रिटिश पुलिस आज तक सुलझाने में नाकाम रही है।
ब्रिटेन सरकार की चुप्पी पर उठते मानवाधिकारों के सवाल
इन गंभीर हमलों के बावजूद ब्रिटेन के विदेश कार्यालय द्वारा कोई आधिकारिक बयान न जारी किए जाने पर मानवाधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ‘रिप्राइव’ जैसे समूहों का कहना है कि ब्रिटेन की धरती पर (Human Rights Protection) की स्थिति चिंताजनक है और सरकार की खामोशी हमलावरों के हौसले बुलंद कर रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रूस और चीन की तर्ज पर अब अन्य देश भी ब्रिटेन के भीतर अपराधियों का नेटवर्क बनाकर अपने विरोधियों को निशाना बना रहे हैं। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो ब्रिटेन की संप्रभुता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।



