US Air Strike on ISIS Syria: खून का बदला खून! मिडिल ईस्ट के रेगिस्तान में गूंजी ट्रंप की दहाड़
US Air Strike on ISIS Syria: शुक्रवार की शाम सीरिया के आसमान में जब अमेरिकी फाइटर जेट्स की गर्जना सुनाई दी, तो वह दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश था। रक्षा विभाग ने इस आक्रामक सैन्य कार्रवाई को (Operation Hawkeye Strike) का नाम दिया है, जिसके तहत आईएसआईएस के ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया। यह हमला केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि उन दो बहादुर अमेरिकी सैनिकों की शहादत का प्रतिशोध था, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में एक कायरतापूर्ण आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई थी।

पेंटागन की घातक जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले का मुख्य उद्देश्य आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि (Anti Terror Military Operation) के दौरान आतंकियों के छिपने के ठिकानों, उनके हथियारों के जखीरे और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया गया है। हेगसेथ ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यह केवल एक शुरुआत है और दुश्मनों का शिकार करने का यह सिलसिला तब तक नहीं थमेगा, जब तक न्याय पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए।
आसमान से बरसीं विनाशकारी मिसाइलें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया के मध्य क्षेत्र में स्थित आतंकियों के दर्जनों ठिकानों पर एक साथ हमला किया गया ताकि उन्हें संभलने का मौका न मिले। इस विनाशकारी प्रहार में (Advanced Combat Aircraft) जैसे कि एफ-15 ईगल, ए-10 थंडरबोल्ट और घातक अपाचे हेलीकॉप्टरों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। हालांकि पेंटागन ने सुरक्षा कारणों से इस ऑपरेशन की बारीकियों को पूरी तरह सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है, लेकिन जमीन से आ रही खबरें आतंकियों के भारी नुकसान की गवाही दे रही हैं।
पलमायरा के रेगिस्तान में हुई वो गद्दारी
इस पूरे सैन्य तनाव की जड़ें पिछले हफ्ते की उस दुखद घटना में छिपी हैं, जिसने व्हाइट हाउस को हिलाकर रख दिया था। पलमायरा के तपते रेगिस्तान में ड्यूटी कर रहे अमेरिकी और सीरियाई बलों के काफिले पर (Suicide Bomber Attack) के जरिए धोखे से हमला किया गया था। इस आत्मघाती हमले में दो अमेरिकी जवान और एक दुभाषिया वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस धोखेबाज हमलावर को मौके पर ही ढेर कर दिया गया था, लेकिन उसकी साजिश ने एक बड़े युद्ध की चिंगारी सुलगा दी।
डोनाल्ड ट्रंप का वो खौफनाक वादा
सैनिकों की शहादत की खबर मिलते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिरपरिचित अंदाज में आतंकियों को खुली चुनौती दी थी। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में (Retaliatory Force Commitment) को दोहराते हुए कहा था कि अमेरिकी खून की हर बूंद का हिसाब बहुत ही गंभीर जवाबी कार्रवाई से लिया जाएगा। ट्रंप के इस वादे ने दुनिया को संकेत दे दिया था कि अमेरिका अब रक्षात्मक मुद्रा से बाहर निकलकर सीधे प्रहार की नीति अपना रहा है और आतंकियों को उनके बिलों में घुसकर मारेगा।
व्हाइट हाउस की पुष्टि और राष्ट्रपति का संकल्प
ऑपरेशन हॉकआई की सफलता के तुरंत बाद व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर राष्ट्रपति के संकल्प की सराहना की। प्रेस सचिव एना केली ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि (Presidential Military Orders) के पालन के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने देश से किया अपना वादा निभाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सुरक्षा बलों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी यदि हमारे सैनिकों पर आंच आई, तो उसका परिणाम इससे भी कहीं अधिक भयावह होगा।
सीरिया में आईएसआईएस का ढहता किला
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के हवाई हमलों से आईएसआईएस की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। मध्य सीरिया के दुर्गम इलाकों में (Terrorist Infrastructure Destruction) होने के बाद अब आतंकियों के पास छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने नहीं बचे हैं। अमेरिका की यह सक्रियता यह भी दर्शाती है कि वह मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहता। यह हमला न केवल आईएसआईएस के लिए बल्कि उन तमाम ताकतों के लिए एक चेतावनी है जो क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
क्या थम जाएगा आतंक का यह खूनी खेल?
अंततः सवाल यही उठता है कि क्या केवल बमबारी से आतंक की इस विचारधारा को समाप्त किया जा सकता है? हालांकि (Middle East Conflict Resolution) के लिए सैन्य बल का प्रयोग अनिवार्य हो गया था, लेकिन अमेरिका अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रहा है। वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि यह युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि एक न्यायपूर्ण बदले की घोषणा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जोरदार प्रहार के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति का संतुलन किस करवट बैठता है।



