अंतर्राष्ट्रीय

USIranTensions – बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को दी सख्त चेतावनी

USIranTensions – मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि बातचीत का रास्ता अपनाना ही उसके हित में होगा। वॉशिंगटन से आए ताज़ा बयान में संकेत दिया गया है कि हालात गंभीर हैं और किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए तर्क मौजूद हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय हलकों में यह चर्चा तेज है कि अमेरिका निकट भविष्य में कोई बड़ा कदम उठा सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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व्हाइट हाउस की टिप्पणी

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में कई तरह के तर्क दिए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने पूर्व में ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत एक सफल सैन्य अभियान चलाया था, जिसमें ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि राष्ट्रपति की प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रही है। उनके अनुसार, ईरान के लिए समझदारी इसी में है कि वह मौजूदा प्रशासन के साथ किसी सहमति पर पहुंचे।

राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मंथन

लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति लगातार इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित सैन्य निर्णय से पहले व्यापक समीक्षा की जाती है और हर कदम अमेरिका की सुरक्षा, सेना के हित और नागरिकों की भलाई को ध्यान में रखकर उठाया जाता है। प्रशासन का कहना है कि सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।

जिनेवा में फिर शुरू हुई वार्ता

इसी बीच जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का नया दौर शुरू हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान की मध्यस्थता में आमने-सामने बैठे हैं। दोनों पक्षों ने बातचीत को उपयोगी बताया है, लेकिन यह भी स्वीकार किया है कि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि समाधान तक पहुंचने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है।

अधिकतम दबाव की नीति पर चर्चा

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2025 की शुरुआत में अपनाई गई अधिकतम दबाव की नीति ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि आर्थिक दबाव कूटनीतिक समाधान का रास्ता आसान बना सकता है। हालांकि तेहरान की ओर से प्रतिबंधों में राहत की मांग दोहराई गई है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति का संकेत

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि प्रशासन कूटनीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन बातचीत विफल रहने की स्थिति में सैन्य विकल्प भी मौजूद है। यह बयान उस समय आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति को बताया है कि सेना कुछ ही दिनों में किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रह सकती है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है और समय-सीमा में बदलाव संभव है।

मौजूदा हालात में यह स्पष्ट है कि कूटनीति और सैन्य तैयारी समानांतर रूप से चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब जिनेवा वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि क्षेत्र में तनाव कम होगा या स्थिति और जटिल रूप ले सकती है।

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