Ranchi Land Scam: हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई टली, अब 7 फरवरी को होगी बहस
Ranchi Land Scam: रांची के बहुचर्चित बड़गाई अंचल जमीन घोटाला मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। लगभग 8.46 एकड़ जमीन की हेराफेरी से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दायर की गई डिस्चार्ज याचिका पर शुक्रवार को पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में आंशिक बहस सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तिथि मुकर्रर की है। हेमंत सोरेन ने बीते 5 दिसंबर को यह याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उन पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है।

आरोप तय होने की प्रक्रिया और अन्य आरोपियों का पक्ष
जमीन घोटाले के इसी मामले में हेमंत सोरेन के अलावा 18 अन्य लोग भी प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में हैं। आरोपी शेखर प्रसाद महतो और अन्य सहयोगियों की ओर से भी अदालत में डिस्चार्ज याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर शुक्रवार को आंशिक बहस पूरी हुई। अदालत ने इन याचिकाओं पर शेष सुनवाई के लिए 11 फरवरी का दिन तय किया है। ईडी ने इस मामले में पहले ही विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान भी ले लिया है। अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण के तहत सभी आरोपियों पर आरोप तय किए जाने हैं, जिसके लिए पुलिस से जुड़े आवश्यक दस्तावेज सभी पक्षों को सौंप दिए गए हैं।
भानु प्रताप और अफसर अली पर भी कसा शिकंजा
इस पूरे भूमि घोटाले की जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं। मामले में मुख्य रूप से राजस्व निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद और अफसर अली की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जो वर्तमान में जेल में बंद हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी पदों का दुरुपयोग करते हुए भू-अभिलेखों में हेराफेरी की और जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे निजी हाथों में सौंपने में मदद की। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जो इस साजिश में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।
क्या है पूरा विवाद और गिरफ्तारी की कहानी
यह मामला रांची के बड़गाई क्षेत्र की साढ़े आठ एकड़ की उस कीमती जमीन से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर अवैध रूप से कब्जाने और कागजों में फर्जीवाड़ा करने का प्रयास किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने लंबी जांच के बाद 31 जनवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप था कि बार-बार समन भेजने के बावजूद मुख्यमंत्री जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। इस गिरफ्तारी के बाद झारखंड की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था और हेमंत सोरेन को करीब पांच महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताने पड़े थे।
जेल से वापसी और सियासी सफर का नया अध्याय
जमानत पर रिहा होने के बाद हेमंत सोरेन ने न केवल सत्ता की कमान दोबारा संभाली, बल्कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भी अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। हालांकि, सियासी मोर्चे पर मजबूत होने के बावजूद कानूनी मोर्चे पर उनकी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। डिस्चार्ज याचिका पर होने वाली अगली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या उन्हें इस मामले से राहत मिलेगी या उन्हें अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें 7 फरवरी को होने वाली न्यायिक कार्यवाही पर टिकी हैं।



