झारखण्ड

Dhanbad Medical College Newborn Abduction: डॉक्टर बनकर आए और ले गए चार दिन का जिगर का टुकड़ा, सामने आई बड़ी घटना…

Dhanbad Medical College Newborn Abduction: झारखंड के प्रमुख चिकित्सा संस्थान, धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SNMMCH) से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। एक मां, जिसने चार दिन पहले ही अपने बच्चे को जन्म दिया था, उसकी गोद आज सूनी हो गई है। शनिवार की रात अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से एक (Newborn Baby Theft Case) का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके नवजातों की सुरक्षा पर भी एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

Dhanbad Medical College Newborn Abduction
Dhanbad Medical College Newborn Abduction
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डॉक्टर के नाम पर झांसा और शातिर जाल

यह पूरी वारदात किसी फिल्मी पटकथा की तरह अंजाम दी गई। टुंडी प्रखंड के भेलोई निवासी सलीक राम मरांडी की पत्नी सरिता देवी ने 25 दिसंबर को एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया था। शनिवार की रात करीब 8:30 बजे, जब वार्ड में शांति थी, तब एक मास्क लगाए युवक और युवती वहां पहुंचे। उन्होंने (Medical Impersonation Fraud) का सहारा लेते हुए प्रसूता से कहा कि बच्चे की तबीयत खराब है और उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना होगा। परिवार को लगा कि शायद यह अस्पताल के ही कर्मचारी हैं, इसलिए उन्होंने बिना किसी संदेह के बच्चे को उनके साथ भेज दिया।

दादी की आंखों में धूल झोंककर फरार हुए आरोपी

बच्चे की वृद्ध दादी, सुमरी देवी, अपने पोते की चिंता में उन दोनों अजनबियों के पीछे-पीछे चल दीं। आरोपी इतने शातिर थे कि वे वृद्धा को शिशु रोग विभाग की एनआईसीयू (NICU) के बाहर एक बेंच पर बैठाकर वहां से गायब हो गए। वे (Hospital Security Breach) का फायदा उठाते हुए ऑर्थोपेडिक वार्ड के गुप्त रास्ते से बाहर निकल गए। काफी देर तक जब बच्चा वापस नहीं लौटा, तो वृद्धा ने बदहवास होकर यहां-वहां खोजबीन शुरू की, लेकिन तब तक मासूम को लेकर वे अपहरणकर्ता अस्पताल की सीमाओं से काफी दूर जा चुके थे।

अस्पताल कर्मचारियों की संवेदनहीनता ने बढ़ाई मुश्किल

इस मामले में सबसे दुखद पहलू अस्पताल के कर्मचारियों का रवैया रहा। जब दादी ने अपने बच्चे के लापता होने की सूचना वहां मौजूद स्टाफ को दी, तो संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें (Hospital Staff Negligence) का परिचय देते हुए चुप करा दिया गया। कर्मचारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जो भी बात है, वह सुबह बताना। अगर रात में ही तुरंत नाकेबंदी की जाती और पुलिस को सूचना दी जाती, तो शायद बच्चा पकड़ा जा सकता था। सुबह जब बच्चा नहीं मिला, तो परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।

पुलिस खंगाल रही है सीसीटीवी फुटेज

परिजनों के भारी विरोध और हंगामे के बाद सरायढेला पुलिस हरकत में आई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और मामले की गंभीरता को देखते हुए (Police Investigation and CCTV) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल के प्रवेश और निकास द्वारों पर लगे कैमरों की जांच की जा रही है ताकि उन मास्क पहने युवक-युवती की पहचान की जा सके। पुलिस की कई टीमें शहर के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं, लेकिन घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

धनबाद में हड़कंप और सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद धनबाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर (Government Hospital Safety Issues) इतनी लचर क्यों है कि कोई भी अजनबी वार्ड में घुसकर बच्चा ले जा सकता है? क्या वार्ड में प्रवेश के लिए कोई पास सिस्टम नहीं था? और सबसे बड़ी बात यह कि बिना किसी पहचान पत्र के किसी अनजान व्यक्ति को बच्चा ले जाने की अनुमति कैसे मिल गई? यह घटना अस्पताल प्रशासन की उन खामियों को उजागर करती है जिन्हें समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया।

न्याय की गुहार लगा रहा है पीड़ित परिवार

पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। सरिता देवी, जिसने अभी अपने बच्चे को ठीक से सीने से भी नहीं लगाया था, वह (Victim Family Outcry) के साथ प्रशासन से अपने बच्चे की वापसी की मांग कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बच्चा नहीं मिलता, वे शांत नहीं बैठेंगे। इस मामले ने स्थानीय राजनीति को भी गर्मा दिया है और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हर कोई बस यही प्रार्थना कर रहा है कि वह चार दिन का मासूम जल्द से जल्द अपनी मां की गोद में वापस लौट आए।

क्या अब सुधरेगी सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा?

यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी अस्पताल से बच्चा चोरी होने की खबर आई हो। धनबाद की इस घटना ने एक बार फिर (Preventing Newborn Abduction in Hospitals) की रणनीतियों पर बहस छेड़ दी है। अस्पतालों को अब डिजिटल अटेंडेंस, बायोमेट्रिक सुरक्षा और वार्डों के बाहर कड़े पहरे की जरूरत है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो कल फिर किसी और गरीब की गोद इसी तरह सूनी हो सकती है। फिलहाल, पूरी टुंडी और धनबाद की निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि उस नन्हे फरिश्ते को बचाया जा सके।

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