Jharkhand Cold Wave Alert 2026: झारखंड में पारा रिकॉर्ड स्तर पर लुढ़का, पड़ने लगी रूह कपाने वाली सर्दी
Jharkhand Cold Wave Alert 2026: झारखंड के आसमान से बरस रही शीतलहर ने पूरे राज्य को अपनी आगोश में ले लिया है। आलम यह है कि सूरज की तपिश भी बेअसर साबित हो रही है और न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री तक नीचे गिर चुका है। मंगलवार का दिन राजधानी रांची समेत कई जिलों के लिए इस सीजन का सबसे सर्द दिन (extreme winter) साबित हुआ। राज्य के कई हिस्सों में पारा गिरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

राजधानी रांची में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट
झारखंड की राजधानी रांची में मंगलवार को सर्दी ने पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। यहां का न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया, जो इस पूरे सीजन का सबसे कम तापमान है। विशेष रूप से कांके क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर दिखी, जहां पारा (minimum temperature) गिरकर 4.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह और शाम के वक्त चलने वाली बर्फीली हवाओं ने कनकनी को इस कदर बढ़ा दिया है कि लोग अलाव का सहारा लेने को विवश हैं।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट और चेतावनी
बढ़ती ठंड को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। रांची के साथ-साथ खूंटी, गुमला और लोहरदगा में अगले 24 घंटों के लिए (weather warning) के तौर पर येलो अलर्ट जारी किया गया है। बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा की गति भले ही कम हो, लेकिन वातावरण में मौजूद नमी और ठंडी हवाओं के कारण शीतलहर का प्रभाव अभी बना रहेगा, जिससे राहत मिलने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
कोहरे की चादर में लिपटे उत्तरी झारखंड के 12 जिले
शीतलहर के साथ-साथ घना कोहरा भी राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। मौसम केंद्र ने झारखंड के उत्तरी भाग में स्थित 12 जिलों के लिए घने कुहासे का अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में (visibility issues) के कारण सुबह के समय सड़कों पर आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक कनकनी से कोई राहत नहीं मिलेगी, बल्कि ठंड के तेवर और भी सख्त हो सकते हैं।
मैकलुस्कीगंज में कुहासे और शीतलहर का कहर
प्रकृति की गोद में बसे मैकलुस्कीगंज का हाल भी कुछ अलग नहीं है, जहां तापमान का उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। मंगलवार को यहां पारा 5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सुबह 10 बजे तक पूरा इलाका (thick fog) की चपेट में रहा, जिसके कारण वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। हालांकि दोपहर में हल्की धूप निकलने से लोगों को कुछ देर के लिए राहत मिली, लेकिन शाम ढलते ही बर्फीली हवाओं ने फिर से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया।
पश्चिमी विक्षोभ का असर और शुष्क हवाएं
वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है जिसका प्रभाव झारखंड के उत्तरी हिस्सों तक महसूस किया जा रहा है। हालांकि रांची और इसके आसपास के इलाकों में (atmospheric pressure) के चलते इसका असर थोड़ा कम है, लेकिन उत्तर से आने वाली शुष्क और सर्द हवाओं ने पूरे राज्य को ठिठुरा दिया है। यही कारण है कि दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है, जिससे दिन भर लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आ रहे हैं।
रांची एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही ठप
मौसम की इस बेरुखी का सबसे बुरा असर हवाई यातायात पर पड़ा है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मंगलवार को विजिबिलिटी कम होने के कारण तीन विमानों को रद्द करना पड़ा। इसके अलावा (flight delays) ने यात्रियों की मुसीबतों को दोगुना कर दिया। कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली जाने वाले विमान अपने निर्धारित समय से कई घंटे की देरी से रवाना हुए। यात्रियों ने एयरपोर्ट प्रबंधन और एयरलाइंस के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विमान रद्द होने से उनकी जरूरी यात्राएं प्रभावित हुई हैं।
कड़ाके की ठंड के बीच सावधानी बरतने की सलाह
मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता को सलाह दी है कि अगले कुछ दिनों तक विशेष सावधानी बरतें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को (health precautions) का पालन करना चाहिए क्योंकि तापमान में आई यह अचानक गिरावट श्वसन और हृदय संबंधी रोगों के खतरे को बढ़ा सकती है। प्रशासन से भी मांग की जा रही है कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव और रैन बसेरों की उचित व्यवस्था की जाए ताकि बेघर लोगों को इस जानलेवा ठंड से बचाया जा सके।



