Jharkhand PESA Act 2025 Notification: झारखंड में ‘जल-जंगल-जमीन’ पर आदिवासियों का राज, अब गांवों की सरकार ही होगी असली सुप्रीम कोर्ट
Jharkhand PESA Act 2025 Notification: झारखंड सरकार ने राज्य के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025’ यानी पेसा कानून लागू कर दिया है। इस अधिसूचना के जारी होने के साथ ही राज्य की ग्राम सभाएं अब असीमित शक्तियों से लैस हो गई हैं। अब गांवों के विकास से लेकर राजस्व और विवादों के निपटारे तक का सारा अधिकार (Tribal Self Governance Rights) के तहत स्थानीय ग्रामीणों के पास होगा। सरकार का यह फैसला सदियों पुरानी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक मजबूती प्रदान करने वाला साबित होगा, जिससे बिचौलियों और बाहरी हस्तक्षेप का अंत सुनिश्चित होगा।

उपायुक्तों को मिली सीमाओं के निर्धारण की जिम्मेदारी
पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के प्रत्येक जिले के उपायुक्त (DC) को विशेष शक्तियां और जिम्मेदारियां दी गई हैं। उन्हें अपने क्षेत्रों में पारंपरिक ग्राम सभाओं और उनकी सीमाओं की पहचान कर उनका प्रकाशन करना होगा। इस (Traditional Village Boundary Identification) प्रक्रिया के लिए प्रखंड स्तर पर एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जो ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर गांव की सीमाओं का अभिलेखन करेगी। सीमाओं के निर्धारण के बाद एक महीने का समय सार्वजनिक आपत्तियों के लिए दिया जाएगा और सभी विवादों को सुलझाकर तीन माह के भीतर आधिकारिक सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
गांव के विवादों का अब गांव में ही होगा फैसला
इस नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब पुलिस और अदालतों के चक्कर लगाने के बजाय गांवों के आंतरिक विवादों का निपटारा ग्राम सभा में ही किया जाएगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि (Community Dispute Resolution System) के माध्यम से परंपराओं का संरक्षण और सामाजिक समरसता बनाए रखने का काम ग्राम सभा करेगी। ग्राम सभा को दंड देने का भी अधिकार होगा, हालांकि उसके निर्णयों के विरुद्ध अपीलीय अधिकार भी सुरक्षित रखे गए हैं। पुलिस की भूमिका को भी सीमित किया गया है; अब किसी भी गिरफ्तारी की जानकारी पुलिस को यथाशीघ्र ग्राम सभा को देनी अनिवार्य होगी।
माह में एक बैठक और सर्वसम्मति से निर्णय
लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। बैठक के संचालन की कमान (Gram Sabha Meeting Procedures) के अनुसार ग्राम प्रधान या उनके द्वारा नामित व्यक्ति के पास होगी। विशेष बात यह है कि सभा में कोई भी निर्णय बहुमत के बजाय ‘सर्वसम्मति’ से लेने का प्रयास किया जाएगा। यदि सदस्यों की कुल संख्या का 1/10 हिस्सा लिखित मांग करता है, तो सात दिनों के भीतर आपात बैठक भी बुलाई जा सकती है। ग्राम पंचायत का कार्यालय ही अब ग्राम सभा के सचिवालय के रूप में कार्य करेगा।
शोषण मुक्त समाज: बाल श्रम और पलायन पर कड़ा प्रहार
झारखंड में मानव तस्करी और पलायन एक गंभीर समस्या रही है, जिस पर अब ग्राम सभाएं अंकुश लगाएंगी। नए नियमों के मुताबिक, गांवों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और किसी भी श्रमिक को काम के लिए गांव से बाहर ले जाने से पहले (Migrant Labour Registration Process) की पूरी जानकारी ग्राम सभा को देनी होगी। इससे श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही, विकास योजनाओं के लाभार्थियों का चयन अब पारदर्शी तरीके से ग्राम सभा करेगी, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
नशाबंदी और संसाधनों पर पूर्ण स्वामित्व का अधिकार
पेसा कानून ने ग्राम सभाओं को सामाजिक सुधार के लिए बहुत बड़ी शक्ति दी है। अब ग्राम सभा की सहमति के बिना गांव की सीमा के भीतर शराब का निर्माण, भंडारण या विक्रय नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, (Natural Resource Management Authority) के तहत लघु वनोपज का स्वामित्व, संग्रहण और विपणन का अधिकार भी ग्रामीणों को मिल गया है। लघु जल निकायों, खनिजों और बाजारों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी अब सीधे तौर पर स्थानीय समुदाय की होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
सामाजिक संस्थाओं पर ग्राम सभा की सीधी निगरानी
गांव के भीतर स्थित सरकारी संस्थाएं जैसे स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों पर अब अधिकारियों के बजाय ग्राम सभा की नजर रहेगी। ग्राम सभा को अधिकार दिया गया है कि वह (Social Audit and Monitoring) के जरिए इन संस्थाओं की नियमित समीक्षा करे। यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है, तो ग्राम सभा सुधारात्मक निर्देश जारी कर सकेगी और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी कर सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आने की संभावना है।
जल, जंगल और जमीन का होगा स्थायी संरक्षण
पेसा कानून 2025 का मुख्य उद्देश्य जल, जंगल और जमीन पर जनजातीय समाज के पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित करना है। भू-अर्जन और पुनर्स्थापन जैसे गंभीर मामलों में भी अब ग्राम सभा की राय और सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी। संक्रमित भूमि का प्रत्यावर्तन और साहूकारी यानी उधार पर नियंत्रण जैसे प्रावधानों से (Land Alienation Prevention Measures) को मजबूती मिलेगी। झारखंड सरकार की यह पहल राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में एक नए युग की शुरुआत है, जहां ‘गांव की सरकार’ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर अपनी ताकत दिखाएगी।



