Maiya-Loan – झारखंड में महिलाओं के लिए स्वरोजगार का नया रास्ता खुला…
Maiya-Loan – झारखंड में महिलाओं के आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रयासों को नया विस्तार देते हुए राज्य सरकार “मुख्यमंत्री मंईयां उद्यम योजना” के रूप में एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य “मंईयां सम्मान योजना” से जुड़ी लाभुक महिलाओं को छोटा कारोबार शुरू करने के लिए संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को बैंकों के माध्यम से एकमुश्त 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया को यथासंभव सरल और पारदर्शी बनाने की तैयारी है। सरकार इसे केवल कर्ज योजना नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व वाले स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने के मंच के रूप में देख रही है।

बैंकों के साथ तैयारी और बजट की राह
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में शनिवार को प्रोजेक्ट भवन में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड और अन्य प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक हुई। इसमें योजना के व्यावहारिक क्रियान्वयन, जोखिम प्रबंधन और ऋण वितरण की रूपरेखा पर चर्चा हुई। बैंकों ने योजना के मूल ढांचे पर सहमति जताते हुए सहयोग का भरोसा दिया। अब वित्त विभाग बैंकों के साथ मिलकर पात्रता, दस्तावेजीकरण और निगरानी से जुड़े मानदंड तय करेगा। सूत्रों के अनुसार, इसे आगामी राज्य बजट में शामिल करने की तैयारी है और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आठ मार्च को औपचारिक शुभारंभ की संभावना है।
कौन पात्र होगा और पुनर्भुगतान कैसे
प्रारंभिक रूपरेखा के अनुसार, “मंईयां सम्मान” से जुड़ी 45 वर्ष तक की महिलाएं इस ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगी। ऋण की अदायगी पांच वर्षों में आसान किस्तों में करने का प्रस्ताव है, ताकि लाभुकों पर वित्तीय दबाव न पड़े। यह व्यवस्था इसलिए भी रखी जा रही है कि यदि किसी कारण से लाभार्थी को 50 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले स्थान बदलना पड़े, तो ऋण वसूली से जुड़ी जटिलताएं न उत्पन्न हों। सरकार का जोर ऋण को बोझ नहीं, बल्कि अवसर बनाने पर है।
आसान आवेदन और बैंकिंग व्यवस्था
योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाएगा। लाभुकों को मुख्य रूप से आधार कार्ड और पिछले छह महीनों का बैंक स्टेटमेंट देना होगा। ऋण दस्तावेजों के लिए मात्र एक रुपये के रेवेन्यू स्टैंप का प्रावधान रखा जा सकता है, जिससे अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। प्रत्येक बैंक शाखा में “मंईयां ऋण डेस्क” स्थापित करने की योजना है, जहां सात दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक सखियां महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेजों और किस्त भुगतान की जानकारी देंगी, ताकि डिजिटल या बैंकिंग प्रक्रियाओं से अपरिचित लाभुक भी सहज महसूस करें।
डिजिटल पोर्टल और कौशल सहयोग
योजना की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए “मंईयां ऋण पोर्टल” विकसित किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर ऋण वितरण, भुगतान स्थिति और अपग्रेडेशन से जुड़ी जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध होगी। प्रशासनिक हस्तक्षेप को न्यूनतम रखते हुए पात्रता सत्यापन की जिम्मेदारी बैंकों को दी जा सकती है। इसके साथ ही झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी लाभार्थियों को व्यवसाय चयन, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव में तकनीकी सहयोग देगी। महिलाएं मनिहारी दुकान, सिलाई केंद्र, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, डेयरी और छोटे पशुपालन जैसे रोजगार शुरू कर सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू हुई, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि होगी। सरकार इसे केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के साधन के रूप में स्थापित करना चाहती है।



