Poor Quality Liquor: राज्य में संदिग्ध शराब आपूर्ति और बढ़ते राजस्व नुकसान पर उभरते गंभीर प्रश्न
Poor Quality Liquor: राज्य में देशी शराब आपूर्ति से जुड़े संदिग्ध मामलों ने प्रशासनिक Suspected cases were reported to the administrative व्यवस्थाओं और नियामक प्रक्रियाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों की ओर से सामने आये तथ्य यह संकेत देते हैं कि घटिया गुणवत्ता वाली शराब न केवल राजस्व को प्रभावित करती है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।

अवैध आपूर्ति और कारोबारी नेटवर्क की भूमिका
एसीबी की जांच में यह स्पष्ट The ACB investigation made this clear हुआ कि राज्य में महुआ प्लेन ब्रांड नाम से कम गुणवत्ता वाली देशी शराब की सप्लाई की गई, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इस प्रकरण में एक बड़े शराब कारोबारी के नाम सामने आने से यह मामला और गंभीर हो गया है। जांच के अनुसार संबंधित कारोबारी की कंपनी देशी और विदेशी शराब के उत्पादन में सक्रिय है और उसने राज्य में सप्लाई के लिए एक अधिकृत वितरक का उपयोग किया था। इस सप्लाई श्रृंखला के माध्यम से नियमों की अनदेखी और गलत प्रथाओं का उपयोग किये जाने के संकेत मिले हैं।
सप्लाई प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन
जांच रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि शराब की आपूर्ति के दौरान निर्धारित होलसेल नियमों Wholesale rules stipulated during supply का पालन नहीं किया गया। वितरण से जुड़े एक निदेशक की गिरफ्तारी के बाद कई अनियमित प्रक्रियाओं की पुष्टि हुई है। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि 180 एमएल की बोतलों में संदिग्ध तत्व मिलने की संभावना जताई गई, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था।
पूछताछ से बचने और सहयोग न देने के आरोप
जांच अधिकारी Investigating officer की ओर से न्यायालय को बताया गया कि आरोपित कारोबारी को चार बार नोटिस भेजा गया था, लेकिन अनेक बार नोटिस लेने से इंकार किया गया। अनुसंधान के दौरान सहयोग न करने को जांच एजेंसी ने संदेह बढ़ाने वाला व्यवहार माना है। इस कारण मामले में भूमिका को संदिग्ध एवं जांच योग्य माना गया है।
टेंडर प्रक्रिया से पूर्व सप्लाई कार्य का आवंटन
जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि जिस कंपनी को शराब आपूर्ति Alcohol supply का जिम्मा दिया गया था, उसे औपचारिक टेंडर प्रकाशित होने से पहले ही कार्य आवंटित कर दिया गया। नियमों के अनुसार किसी भी कंपनी को सप्लाई प्रारंभ करने से पहले संबंधित सरकारी संस्था के साथ एग्रीमेंट आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में बिना किसी वैध समझौते के सप्लाई शुरू कर दी गई थी। यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के विरुद्ध जाती है।
बढ़ते घोटाले की परतें और सरकारी राजस्व पर प्रभाव
एसीबी की प्रारंभिक जांच ACB’s preliminary investigation के दौरान लगभग 38 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था, जो बाद में और विस्तृत जांच में बढ़कर लगभग 70 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया। यह राशि उन प्रक्रियाओं के माध्यम से हेराफेरी करके अर्जित की गई, जिनमें मैनपावर सप्लाई और प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी का सहारा लिया तथा शराब की बिक्री से प्राप्त धनराशि को निर्धारित अनुपात में सरकारी खाते में जमा नहीं किया। इसके अलावा प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचकर अतिरिक्त अवैध लाभ अर्जित किये जाने के भी प्रमाण मिले हैं।
इस पूरे प्रकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि शराब वितरण प्रणाली Alcohol distribution system में मौजूद खामियों का लाभ उठाकर बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितताएँ की जा सकती हैं। ऐसे मामलों की जांच न केवल राजस्व सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है।



