Ranchi Child Kidnapping Gang Busted: राजधानी में बच्चा चोर गैंग का हुआ खौफनाक अंत, रूह कंपा देगा गुलगुलिया गिरोह का काला चिट्ठा
Ranchi Child Kidnapping Gang Busted: झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस ने एक ऐसे दरिंदा गिरोह का खात्मा किया है, जो पिछले एक दशक से मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस की इस बड़ी कामयाबी ने न केवल 16 शातिर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है, बल्कि 12 बच्चों को मौत और बर्बादी के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। (Criminal Network Operation) का यह भंडाफोड़ तब हुआ जब धुर्वा इलाके से दो मासूम बच्चे, अंश और अंशिका, अचानक गायब हो गए। पुलिस ने इसे सामान्य गुमशुदगी न मानकर जब गहराई से जांच शुरू की, तो कड़ियां जुड़ती गईं और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया।

10 साल से चल रहा था मासूमों की खरीद-फरोख्त का धंधा
पकड़ा गया यह गिरोह कोई नया खिलाड़ी नहीं है, बल्कि पिछले 10 वर्षों से बच्चा चोरी और मानव तस्करी के काले साम्राज्य को चला रहा था। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि इस गिरोह के तार केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि (Interstate Human Trafficking) के जरिए इनके गुर्गे बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैले हुए थे। एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह गैंग इतनी सफाई से काम करता था कि एक राज्य से बच्चा चोरी कर उसे दूसरे राज्य के सुदूर इलाकों में बेच दिया जाता था, जिससे पकड़े जाने का खतरा कम रहता था।
‘गुलगुलिया गैंग’ का वो चेहरा जिससे कांप जाती है रूह
रांची पुलिस ने जिस गिरोह को बेनकाब किया है, उसे स्थानीय स्तर पर ‘गुलगुलिया गैंग’ के नाम से जाना जाता है। इस गैंग की कार्यशैली रोंगटे खड़े कर देने वाली है। (Child Abduction Syndicate) के सदस्य पहले रेकी करते थे और फिर मौका पाकर पलक झपकते ही बच्चों को उठा ले जाते थे। अंश और अंशिका की तलाश में जब पुलिस ने पड़ोसी राज्यों में छापेमारी की, तब समझ आया कि यह गिरोह कितना संगठित है। पुलिस की स्पेशल टीम अभी भी गिरोह के उन सदस्यों की तलाश में खाक छान रही है जो फिलहाल फरार चल रहे हैं।
भीख मंगवाना और देह व्यापार: मासूमों के साथ हैवानियत
एसएसपी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि ये अपराधी बच्चों को केवल बेचते नहीं थे, बल्कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी करते थे। चोरी किए गए लड़कों से जबरन भीख मंगवाई जाती थी और उनसे पॉकेटमारी जैसे अपराध कराए जाते थे। वहीं, (Exploitation of Minors) की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब पता चला कि ये दरिंदे छोटी बच्चियों को देह व्यापार के दलदल में धकेल देते थे। जिन बच्चों को बचाया गया है, उन्हें बोकारो, धनबाद, चाईबासा और रांची के अलग-अलग हिस्सों से अगवा किया गया था।
डीएनए टेस्ट से होगी असली माता-पिता की पहचान
बरामद किए गए 12 बच्चों को फिलहाल रांची के धुर्वा थाने में सुरक्षित रखा गया है। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन बच्चों को उनके असली माता-पिता तक पहुँचाने की है। चूंकि बच्चे अलग-अलग शहरों से हैं, इसलिए (Parental Identity Verification) के लिए पुलिस ने एक वैज्ञानिक रास्ता चुना है। एसएसपी ने साफ किया कि किसी भी बच्चे को सौंपने से पहले डीएनए टेस्ट कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी या धोखे की गुंजाइश न रहे। पुलिस उन पुराने केस फाइलों को भी खंगाल रही है जहाँ बच्चा चोरी की रिपोर्ट दर्ज थी।
गिरफ्तार आरोपियों की लंबी फेहरिस्त और उनके ठिकाने
गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल हैं, जो गिरोह में ‘मददगार’ की भूमिका निभाती थीं। इनमें रामगढ़ से विरोधी खेरवार, अंथोनी खरवार, सोनी कुमारी, चांदनी देवी, संन्यासी खेरवार और मालिन देवी शामिल हैं। (Identity of Arrested Suspects) की सूची में सिल्ली से प्रमोद कुमार, आशिक गोप और बेबी देवी के नाम भी हैं। लातेहार के राज रवानी, सीता देवी, दीनू भुइयां और पुरुलिया के नव खेरवार भी इस घिनौने अपराध के साझीदार पाए गए हैं। इन सभी को जेल भेज दिया गया है और उनसे कड़ी पूछताछ जारी है।
पुलिस की स्पेशल टीम अब भी मिशन पर तैनात
भले ही 16 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन रांची पुलिस का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के कुछ मुख्य सरगना अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हो सकते हैं। (Law Enforcement Strategy) के तहत एक विशेष टीम का गठन किया गया है जो तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर गिरोह के अन्य ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द इस गैंग की पूरी चैन को तोड़ दिया जाएगा और अन्य राज्यों में छिपे इनके सहयोगियों को भी घसीटकर रांची लाया जाएगा।
बच्चा चोरी की घटनाओं से सहमे माता-पिता को मिली राहत
इस बड़े खुलासे के बाद रांची समेत पूरे झारखंड के अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ समय से बच्चा चोरी की अफवाहों और घटनाओं ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया था। (Public Security Assurance) देते हुए पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में दें। पुलिस की सक्रियता और इतने बड़े गिरोह के खात्मे से अपराधियों के बीच एक सख्त संदेश गया है कि झारखंड की धरती पर अब मासूमों का सौदा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भविष्य की सतर्कता और सामुदायिक पुलिसिंग की जरूरत
बच्चा चोरी जैसी वारदातों को रोकने के लिए पुलिस अब सामुदायिक पुलिसिंग पर भी जोर दे रही है। स्कूलों और मोहल्लों में (Child Safety Awareness) अभियान चलाने की योजना है ताकि बच्चे और उनके परिजन किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं। यह मामला इस बात का भी प्रमाण है कि अगर पुलिस और जनता मिलकर काम करें, तो बड़े से बड़े अपराधी नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है। बरामद बच्चों के पुनर्वास के लिए भी बाल कल्याण समिति की मदद ली जा रही है ताकि उनके भविष्य को संवारा जा सके।



