झारखण्ड

Ranchi Kantatoli Minor Drowning Incident 2026: रांची में हुई कलेजा चीर देने वाली वारदात, नाले में गिरे दो सगे भाई, मौत बनकर झपटी मौत…

Ranchi Kantatoli Minor Drowning Incident 2026: झारखंड की राजधानी रांची के कांटाटोली इलाके में एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी है जिसने पूरी इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। गौस नगर की गली नंबर सात में रहने वाले दो मासूम सगे भाई खेलते-खेलते एक गहरे नाले की चपेट में आ गए। इस (Accidental Child Fatality in Ranchi) की खबर जैसे ही मुहल्ले में फैली, हर तरफ चीख-पुकार मच गई। ढाई साल के छोटे भाई फरहान के लिए यह नाला काल साबित हुआ, जबकि खुशनसीबी से बड़े भाई अरहम की जान बच गई।

Ranchi Kantatoli Minor Drowning Incident 2026
Ranchi Kantatoli Minor Drowning Incident 2026
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खेलते-खेलते मौत के करीब पहुंचे दो मासूम

घटना के वक्त अरशद के दोनों बेटे, साढ़े तीन साल का अरहम और ढाई साल का फरहान, घर से महज 10 मीटर की दूरी पर स्थित एक खाली मैदान में खेल रहे थे। मैदान के ठीक बगल में एक बड़ा और गहरा नाला बहता है। खेलते समय अचानक दोनों भाइयों का पैर फिसला और वे सीधे (Safety Hazard for Children) बने उस खुले नाले में जा गिरे। बच्चों के गिरने की आवाज सुनते ही उनकी मां निकहत पागलों की तरह उनकी ओर दौड़ीं ताकि अपने कलेजे के टुकड़ों को मौत के मुंह से खींच सकें।

मां की ममता ने अरहम को तो बचाया पर फरहान डूबा

बच्चों की मां निकहत ने अपनी जान की परवाह किए बिना नाले में छलांग लगा दी। उन्होंने किसी तरह हाथ-पैर मारकर बड़े बेटे अरहम को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक (Drainage System Security Gaps) की वजह से छोटा बेटा फरहान गहराई में ओझल हो चुका था। मां की चीखें सुनकर स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए और बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद फरहान को कीचड़ और गंदे पानी के बीच से बाहर निकाला जा सका।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

बेहोश फरहान को आनन-फानन में पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम फरहान को (Emergency Medical Care Failure) घोषित कर दिया। वहीं, बड़े भाई अरहम को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। फरहान की मौत की खबर सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

सदर थाना पुलिस ने शव को भेजा पोस्टमार्टम

हादसे की जानकारी मिलते ही सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए फरहान के शव को (Autopsy and Forensic Examination) के लिए रिम्स (RIMS) भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि डूबने के दौरान फरहान के पेट में भारी मात्रा में नाले का दूषित पानी चला गया था, जो संभवतः उसकी मौत का मुख्य कारण बना। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि क्या इसमें नगर निगम की कोई लापरवाही रही है।

पड़ोसियों की चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ा भारी

मुहल्ले के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार बच्चों को उस खतरनाक नाले के पास जाने से मना किया था। पड़ोसियों ने बच्चों के पिता अरशद को भी सचेत किया था कि (Child Supervision Negligence Risk) बहुत ज्यादा है और किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि मां निकहत हमेशा बच्चों पर नजर रखती थीं, लेकिन मंगलवार को महज कुछ सेकंड के लिए बच्चों का आंखों से ओझल होना पूरी जिंदगी का गम दे गया।

मां निकहत का विलाप सुनकर हर आंख हुई नम

फरहान की मौत के बाद उसकी मां निकहत और पिता अरशद का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार खुद को कोस रही हैं और कह रही हैं कि अगर वह एक पल के लिए भी घर के अंदर नहीं जातीं, तो उनका (Grief and Trauma Recovery) का सामना आज नहीं करना पड़ता। मासूम के घर के बाहर उमड़ी भीड़ में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। पिता अरशद बदहवास स्थिति में अपने बेटे की खिलौनों को देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं।

प्रशासन की लापरवाही और खुले नालों का कहर

इस घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में खुले नालों और असुरक्षित ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम को बार-बार (Urban Infrastructure Safety Standards) के तहत नाले को ढंकने की अपील की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर समय रहते इस नाले की घेराबंदी या इसे ढंकने का काम पूरा कर लिया गया होता, तो आज एक मासूम की जान न जाती। अब मुहल्ले के लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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