Ranchi Municipal Corporation Election 2025: रांची नगर निगम चुनाव की नई आरक्षण सूची ने दिग्गजों की उड़ाई नींद, अब नए चेहरों की होगी ताजपोशी…
Ranchi Municipal Corporation Election 2025: रांची की गलियों में चुनावी बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राजनीति के शतरंज पर मोहरे बिछाने का दौर भी शुरू हो गया है। आगामी रांची नगर निगम चुनाव के लिए जैसे ही वार्डवार आरक्षण की विस्तृत सूची सार्वजनिक हुई, शहर के सियासी गलियारों में भारी खलबली मच गई। यह केवल कागजी बदलाव नहीं है, बल्कि (Electoral Reservation Impact) के कारण सालों से क्षेत्र में जमी जमाई राजनीति की जड़ें हिल गई हैं। वर्ष 2018 की तुलना में 2025 का यह नया आरक्षण ढांचा सामाजिक न्याय की एक नई इबारत लिखने की ओर अग्रसर है, जिसने कई पुराने सूरमाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पिछड़ा वर्ग के वर्गीकरण से बदली सामाजिक बिसात
इस बार के चुनाव में सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन पिछड़ा वर्ग की सीटों के आवंटन में देखने को मिला है। साल 2018 के चुनाव में जहां पिछड़ा वर्ग के लिए कुल 13 सीटें आरक्षित थीं, वहीं 2025 में इस वर्ग को दो हिस्सों में बांटकर (Social Justice Reforms) को धरातल पर उतारा गया है। अब इन सीटों को समाप्त कर नौ सीटें अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I (ईबीसी-I) और चार सीटें पिछड़ा वर्ग-II (ओबीसी-II) के लिए आरक्षित की गई हैं। इस सूक्ष्म विभाजन ने यह सुनिश्चित किया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों को भी शहर की सरकार चलाने में बराबर की हिस्सेदारी मिल सके।
रोटेशन प्रणाली ने बिगाड़ा कई वार्डों का पुराना गणित
नगर निगम चुनाव में रोटेशन प्रणाली एक ऐसा हथियार है जो सत्ता के एकाधिकार को तोड़ता है और नए नेतृत्व को जन्म देता है। इस बार अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) की सीटों में भी व्यापक फेरबदल किया गया है। रोटेशन के तहत (Caste Based Reservations) की नई व्यवस्था में एसटी की 11 और एससी की 2 सीटों के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। कई ऐसे वार्ड जहां पहले एसटी (महिला) का दबदबा था, अब वे एसटी (अन्य) की श्रेणी में आ गए हैं। इस बदलाव ने उन नेताओं के लिए चुनौती खड़ी कर दी है जो अपने सुरक्षित दुर्गों के भरोसे बैठे थे।
महिला आरक्षण के नए चक्रव्यूह में फंसे पुरुष उम्मीदवार
रांची नगर निगम के कई वार्डों में इस बार नारी शक्ति का बोलबाला अधिक रहने वाला है। वार्ड नंबर 3, 10, 25, 39 और 42 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में (Women Leadership Opportunity) को बढ़ावा देने के लिए सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। इससे उन वार्डों के पुरुष दावेदारों को झटका लगा है जो पिछले कई महीनों से जमीन तैयार कर रहे थे। हालांकि, इसके उलट कुछ वार्डों से महिला आरक्षण हटने से पुरुष उम्मीदवारों ने भी राहत की सांस ली है और फिर से मैदान में उतरने के लिए जोर-आजमाइश शुरू कर दी है।
अनारक्षित श्रेणी की बदली चमक और नई उम्मीदें
2018 में जो वार्ड पिछड़ा वर्ग या विशेष जाति के लिए आरक्षित थे, उनमें से कई अब 2025 में अनारक्षित यानी सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। इस (Open Category Competition) ने सामान्य वर्ग के उन युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, जो आरक्षण की वजह से चुनावी प्रक्रिया से बाहर थे। वार्ड संख्या 4 और 9 जैसे क्षेत्रों में अब सामान्य श्रेणी की महिला और पुरुषों के बीच मुकाबला होगा, जिससे चुनाव के और भी दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए खुला प्रतिनिधित्व का द्वार
प्रशासन के इस नए फैसले का सबसे बड़ा लाभ अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I के नए चेहरों को मिलता दिख रहा है। वार्ड 11 जैसे क्षेत्रों में जहां पहले सामान्य महिला का कब्जा था, अब वह (Political Representation Equality) के तहत अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I (अन्य) के लिए सुरक्षित हो गया है। इससे उन समुदायों में उत्साह की लहर है जिन्हें पहले कभी बड़े मंच पर नेतृत्व का मौका नहीं मिला था। यह बदलाव रांची नगर निगम के भीतर एक नई तरह की लीडरशिप प्रोफाइल तैयार करेगा जो जमीनी मुद्दों से अधिक जुड़ी होगी।
वार्डवार आरक्षण सूची का तुलनात्मक विश्लेषण
अगर हम 2018 और 2025 के आंकड़ों की तुलना करें, तो यह स्पष्ट होता है कि नगर निगम का चरित्र बदल रहा है। वार्ड 2 में जहां पहले एसटी (अन्य) का अधिकार था, अब वहां (Gender Based Rotation) के कारण एसटी (महिला) का राज होगा। इसी तरह वार्ड 5 में एससी (महिला) की जगह अब एससी (अन्य) के उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा सकेंगे। वार्ड संख्या 13 और 14 में भी इसी तरह के अदल-बदल ने पुराने प्रत्याशियों को अपनी रणनीति फिर से शून्य से शुरू करने पर मजबूर कर दिया है।
प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति में आमूलचूल परिवर्तन
आरक्षण सूची जारी होते ही अब संभावित प्रत्याशियों ने अपने वार्ड बदलने या नए सहयोगियों की तलाश शुरू कर दी है। (Electoral Strategy Shift) का आलम यह है कि जो नेता कल तक एक विशेष वर्ग के वोटों की बात कर रहे थे, वे अब बदले हुए आरक्षण के अनुसार अपनी छवि गढ़ने में जुट गए हैं। दफ्तरों और चौराहों पर अब केवल इस बात की चर्चा है कि किस वार्ड में कौन सा समीकरण फिट बैठेगा और किस पुराने चेहरे की जगह कौन सा नया चेहरा बाजी मारेगा।
भविष्य की राजनीति और रांची का विकास
अंततः इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य रांची नगर निगम को अधिक समावेशी और जवाबदेह बनाना है। (Urban Governance Evolution) की इस प्रक्रिया में आरक्षण का यह नया स्वरूप शहर के विकास को नई दिशा दे सकता है। नए और ऊर्जावान प्रतिनिधियों के आने से शहर की बुनियादी समस्याओं जैसे जल निकासी, ट्रैफिक और स्वच्छता पर नए दृष्टिकोण से काम होने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि रांची की जनता इस नए आरक्षण ढांचे के बीच किसे अपना नगर सेवक चुनती है।



