RIMS Ranchi Encroachment Drive: आशियाने पर चला सरकारी हथौड़ा, जीत का जश्न मनाकर लौटे चैंपियन फुटबॉलर की आंखों में भी उतरे आंसू…
RIMS Ranchi Encroachment Drive: झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIMS) परिसर में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख मंगलवार को भी जारी रहा। राजधानी रांची के इस महत्वपूर्ण इलाके में फैली अव्यवस्था को दूर करने के लिए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में (Demolition Action) को अंजाम दिया गया। जैसे ही मशीनों की गड़गड़ाहट गूंजी, सालों से बने बनाए मकान ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे। इस कार्रवाई ने जहां प्रशासन के इरादों को स्पष्ट कर दिया है, वहीं दशकों से रह रहे परिवारों के सामने सिर छिपाने की छत का संकट खड़ा हो गया है।

मलबे में तब्दील हुए आलीशान भवन
मंगलवार की सुबह रिम्स प्रशासन और नगर निगम की टीम दलबल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंची। इस दौरान टीम ने तीन दो मंजिला भवनों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया। कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि (Residential Encroachment) को हटाने के लिए डॉ. आईडी चौधरी के मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया और उनके पड़ोस के दो अन्य घरों पर भी पीला पंजा चला। कार्रवाई के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और लोग बेबसी से अपना आशियाना टूटते देखते रहे।
चार मंजिला अपार्टमेंट पर हथौड़े का प्रहार
अतिक्रमण हटाने की इस मुहिम में तकनीक और सावधानी का भी ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एक विशाल चार मंजिला अपार्टमेंट को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जहां सुरक्षा कारणों से (Manual Labor) का सहारा लेकर ऊपरी दो मंजिलों को हथौड़ों से तोड़ा जा रहा है। इसके बाद जब संरचना का भार कम हो जाएगा, तो नीचे की दो मंजिलों को भारी मशीनों और बुलडोजर के जरिए गिराया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि रिम्स की जमीन को कब्जामुक्त कराना संस्थान के विस्तार के लिए अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर अटकी एक उम्मीद
रिम्स परिसर में ही स्थित एक अन्य चार मंजिला अपार्टमेंट पर भी ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। हालांकि, इस भवन के निवासियों ने कानूनी लड़ाई का रास्ता चुनते हुए (Supreme Court Appeal) दायर की है, जिस पर बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। अपार्टमेंट के मालिक का कहना है कि यदि अदालत से उन्हें राहत मिलती है, तो वे उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे जिन्होंने उन्हें गलत तरीके से जमीन बेची या निर्माण की अनुमति दी। फिलहाल, सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
बेघर होते परिवारों का सामान और सिसकियां
कार्रवाई शुरू होने से पहले ही प्रभावित परिवारों में हड़कंप मच गया था। जिन घरों को तोड़ा जाना था, वहां के लोग सुबह से ही अपने जीवन भर की जमा पूंजी और सामान को छोटे वाहनों में लादकर (Household Relocation) करने में जुटे दिखे। पूरी गली में ट्रक, टेंपो और हाथ ठेलों का तांता लगा रहा। लोग भारी मन से अपने बिस्तरों, बर्तनों और यादों को समेटकर अनजान ठिकानों की ओर रुख कर रहे थे। बाउंड्री वॉल के लिए की गई पुरानी मार्किंग और बुनियाद को भी पूरी तरह हटा दिया गया है।
चैंपियन फुटबॉलर की आंखों में जीत का गम
इस पूरी कार्रवाई में सबसे मार्मिक कहानी अंडर-19 फुटबॉल चैंपियन अरविंद गुड़िया की है। दो दिन पहले ही झारखंड को नेशनल प्रतियोगिता में विजेता बनाकर लौटे अरविंद जब अपने घर पहुंचे, तो उन्हें जीत की बधाई के बजाय (Emotional Turmoil) का सामना करना पड़ा। उन्हें बताया गया कि जिस घर की दहलीज पर वे ट्रॉफी लेकर खड़े हैं, उसे जल्द ही तोड़ दिया जाएगा। अरविंद ने रुंधे गले से बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बेहतर खेलने का हौसला दिया था, लेकिन अब बिना छत के वे अपने खेल पर कैसे ध्यान दे पाएंगे।
डॉक्टर्स कॉलोनी में भी हुई बड़ी तालाबंदी
सिर्फ निजी मकान ही नहीं, बल्कि रिम्स के अपने सरकारी क्वार्टरों में अवैध रूप से जमे लोगों पर भी कार्रवाई की गई है। डॉक्टर्स कॉलोनी में कई ऐसे लोग रह रहे थे जो अब रिम्स सेवा का हिस्सा नहीं थे, उनसे (Illegal Occupation) खाली कराकर क्वार्टरों में ताला लगा दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि संस्थान की संपत्ति पर किसी भी तरह का अनाधिकृत कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह अभियान तब तक चलेगा जब तक एक-एक इंच जमीन मुक्त नहीं हो जाती।
प्रशासनिक सख्ती और भविष्य की योजनाएं
रिम्स प्रबंधन का तर्क है कि अस्पताल के बढ़ते दबाव और मरीजों की सुविधाओं के विस्तार के लिए जमीन की नितांत आवश्यकता है। इस (Urban Development Plan) के तहत अतिक्रमण हटाना जरूरी हो गया था। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेघर होने वाले लोगों के पुनर्वास के बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए। फिलहाल, रिम्स परिसर में सन्नाटा और मलबे का ढेर उन परिवारों की दास्तां सुना रहा है जो कल तक इसे अपना घर कहते थे।
कार्रवाई के बाद अब आगे क्या?
मंगलवार की कार्रवाई के बाद अब बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। कानूनी दांव-पेंच और सुप्रीम कोर्ट के संभावित आदेश के बीच (Eviction Drive) की दिशा तय होगी। प्रशासन ने आगामी कुछ दिनों के लिए अपनी रूपरेखा तैयार कर ली है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय निवासियों में डर और अनिश्चितता का माहौल है, जबकि रिम्स प्रशासन इसे संस्थान के हित में लिया गया एक कड़ा लेकिन जरूरी फैसला बता रहा है।



