Bangladesh Human Rights Crisis: बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए मौत का कुआं बनी जेल, प्रलय चाकी की मौत से मचा हाहाकार
Bangladesh Human Rights Crisis: बांग्लादेश की धरती इस वक्त निर्दोषों के खून से लाल हो रही है और अल्पसंख्यकों के लिए यह मुल्क किसी नर्क से कम नहीं रह गया है। आए दिन हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और इसी कड़ी में अब एक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात हिंदू संगीतकार प्रलय चाकी की पुलिस कस्टडी (Safety of Minorities) के दौरान मौत हो गई है, जिसके बाद अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जेल प्रशासन की थ्योरी पर उठे सवाल और परिवार का आक्रोश
पाबना जेल में बंद 60 वर्षीय प्रलय चाकी की मौत को लेकर पुलिस प्रशासन इसे महज एक प्राकृतिक घटना बताने की कोशिश कर रहा है। जेल अधीक्षक मोहम्मद उमर फारूक का दावा है कि प्रलय चाकी को दिल का दौरा पड़ा था और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया, लेकिन परिवार इन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है। प्रलय के परिजनों का कहना है कि यह स्वाभाविक मौत नहीं बल्कि जेल प्रशासन की लापरवाही (Custodial Death Investigation) का नतीजा है, क्योंकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्हें समय पर इलाज नहीं दिया गया।
बिना किसी ठोस आरोप के अचानक हुई थी प्रलय चाकी की गिरफ्तारी
प्रलय चाकी की गिरफ्तारी की कहानी भी किसी साजिश से कम नजर नहीं आती है, क्योंकि उन्हें अचानक उनके घर से उठा लिया गया था। पिछले साल जुलाई में हुए हिंसक छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया और 16 दिसंबर को पाबना के दिलालपुर स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह एक (Political Victimization) के शिकार हुए हैं, क्योंकि जिस वक्त हिंसा हुई थी उस दौरान उनका किसी भी मामले में प्रत्यक्ष नाम शामिल नहीं था।
जेल की कालकोठरी में तड़पते रहे संगीतकार और प्रशासन सोता रहा
अधिकारियों के अनुसार प्रलय चाकी लंबे समय से डायबिटीज और हृदय रोग से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनकी स्थिति जेल में बिगड़ती चली गई। पाबना जेल प्रशासन का तर्क है कि उन्हें पहले स्थानीय जनरल अस्पताल ले जाया गया और फिर राजशाही मेडिकल कॉलेज शिफ्ट किया गया। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि जेल के भीतर (Prisoner Medical Facilities) की कमी और समय पर रिस्पॉन्स न मिलने की वजह से एक कलाकार की जान चली गई, जो बेहद निंदनीय है।
बेटे का छलका दर्द और सरकार के सफेद झूठ का पर्दाफाश
प्रलय चाकी के बेटे सोनी चाकी ने भावुक होते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके पिता को झूठे केस में फंसाकर जेल में तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया गया था। सोनी का कहना है कि जब उनके पिता की हालत जेल में बिगड़ रही थी, तब जेल प्रशासन ने परिवार को इसकी सूचना तक नहीं दी। उन्हें बाहरी सूत्रों से पता चला कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और यह साफ तौर पर (Human Rights Violations) का मामला है।
मुहम्मद यूनुस सरकार की चुप्पी और हिंदुओं की सुरक्षा पर खतरा
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस वक्त चारों तरफ से घिरी हुई है क्योंकि वह अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। प्रधानमंत्री पद संभाल रहे मुहम्मद यूनुस इन घटनाओं को केवल प्रोपेगंडा बताकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि हिंदुओं की हत्याएं और (Religious Persecution) की घटनाएं वहां की कड़वी सच्चाई बन चुकी हैं, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हिंसा का तांडव और बेबस हिंदू समाज की चीखें
चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश में जिस तरह का माहौल बनाया गया है, उसने हिंदू समुदाय को डर के साये में जीने पर मजबूर कर दिया है। हाल ही में एक ऑटो ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या और अब एक सम्मानित संगीतकार की हिरासत में मौत ने हिंदुओं के भीतर गहरे जख्म दे दिए हैं। वहां की सड़कों पर अब (Communal Violence Prevention) की बातें केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं और वास्तविकता में अल्पसंख्यकों का जीवन असुरक्षित हो चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की किरकिरी और न्याय की मांग
प्रलय चाकी की संदिग्ध मौत के बाद अब भारत सहित दुनिया भर के हिंदू संगठन बांग्लादेश सरकार से जवाब मांग रहे हैं। अवामी लीग के सांस्कृतिक विंग से जुड़े इस नेता की मौत ने यह साबित कर दिया है कि वहां विपक्षी विचारधारा और अल्पसंख्यक पहचान वाले लोगों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। अब समय आ गया है कि (International Justice System) इस मामले में दखल दे और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे इस अमानवीय व्यवहार पर रोक लगाए।



