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Indus Waters Treaty Dispute 2026: चिनाब की लहरों ने उड़ाई पाकिस्तान की नींद, बेबसी में गिड़गिड़ाया पड़ोसी

Indus Waters Treaty Dispute 2026: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी की लहरें अब भारत की नई ऊर्जा शक्ति का आधार बनने जा रही हैं। केंद्र सरकार ने 260 मेगावाट की ‘दुलहस्ती चरण-दो’ जलविद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी है, जिसने सीमा पार पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। भारत की इस रणनीतिक बढ़त (India Hydroelectric Power Strategy) ने पाकिस्तान को यह एहसास करा दिया है कि अब पानी को लेकर पुरानी शर्तें इतिहास का हिस्सा बन चुकी हैं। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में बिजली की कमी को दूर करेगी, बल्कि भारत के कड़े रुख को भी दर्शाती है।

Indus Waters Treaty Dispute 2026
Indus Waters Treaty Dispute 2026
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पाकिस्तान का ‘संधि उल्लंघन’ का पुराना विलाप

जैसे ही दुलहस्ती प्रोजेक्ट (Indus Waters Treaty Dispute 2026) की खबर सार्वजनिक हुई, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने इस परियोजना के बारे में पाकिस्तान को कोई पूर्व सूचना नहीं दी, जो उनके अनुसार 1960 की सिंधु जल संधि का स्पष्ट उल्लंघन है। हालांकि, पाकिस्तान की यह (International Law Violation) दलील अब वैश्विक मंचों पर भी असरहीन होती दिख रही है, क्योंकि भारत ने पिछले साल ही कड़े सुरक्षा कारणों से इस दशकों पुरानी संधि के प्रावधानों को स्थगित करने का फैसला लिया था।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदला समीकरण

भारत और पाकिस्तान के बीच जल संबंधों में यह बड़ा मोड़ पिछले साल 22 अप्रैल को आए एक काले दिन के बाद आया। पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के ठीक एक दिन बाद, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक (Punitive Strategic Measures) कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित कर दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली थी, जो पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का ही एक चेहरा है। मासूमों के खून के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”

पाक आयुक्त की बेचैनी और तकनीकी स्पष्टीकरण

पाकिस्तान की घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके सिंधु जल आयुक्त ने भारत में अपने समकक्ष को पत्र लिखकर विस्तृत विवरण मांगा है। वे जानना चाहते हैं कि दुलहस्ती स्टेज-दो (Technical Project Details) का दायरा क्या है और क्या यह कोई नया निर्माण है या पुराने संयंत्र का विस्तार। प्रवक्ता अंद्राबी का कहना है कि भारत पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—पर एकतरफा फैसला नहीं ले सकता, लेकिन हकीकत यह है कि संधि के निलंबन के बाद भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र महसूस कर रहा है।

पर्यावरण मंजूरी और किश्तवाड़ में विकास की गूँज

दिसंबर 2025 में भारत के पर्यावरण मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय समिति ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दे दी। यह 390 मेगावाट की मौजूदा दुलहस्ती स्टेज-I परियोजना का ही एक महत्वपूर्ण विस्तार है। समिति ने स्पष्ट किया है कि भले ही परियोजना के पैरामीटर तकनीकी रूप से (Environmental Clearance Process) संधि के मानकों के करीब हैं, लेकिन संधि के औपचारिक निलंबन ने भारत को प्रशासनिक रूप से अधिक मजबूती प्रदान की है। किश्तवाड़ के ऊंचे पहाड़ों के बीच यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर की किस्मत बदलने की क्षमता रखता है।

सिंधु बेसिन में परियोजनाओं की बाढ़

भारत अब केवल दुलहस्ती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिंधु बेसिन की जल क्षमता का दोहन करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं को युद्धस्तर पर आगे बढ़ा रहा है। इनमें सावलकोट (1,856 मेगावाट), रतले, बुरसर और पाकल दुल जैसी मेगा (Indus Basin Development) जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं। भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि जल सुरक्षा और जलविद्युत क्षमता को बढ़ाना देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों के लिए अनिवार्य है। ये कदम सीधे तौर पर पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के अनियंत्रित प्रवाह पर भारत का नियंत्रण सुनिश्चित कर रहे हैं।

बेबसी की कगार पर खड़ा इस्लामाबाद

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयानों में अब चेतावनी से ज्यादा बेबसी नजर आती है। वे इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना बता रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वर्षों तक आतंकवाद को पनाह देने के बाद पाकिस्तान ने (Diplomatic Isolation Pakistan) भारत के धैर्य का बांध तोड़ दिया है। बिना किसी पूर्व अधिसूचना के परियोजनाओं को दी जा रही मंजूरी यह संकेत है कि भारत अब पाकिस्तान की सहमति या असहमति का इंतजार करने के मूड में नहीं है। पाकिस्तान के लिए अब यह “मरता क्या न करता” वाली स्थिति बन गई है क्योंकि उसकी कृषि और अर्थव्यवस्था इन्हीं नदियों पर निर्भर है।

जल सुरक्षा के प्रति भारत का अटूट संकल्प

भारतीय सूत्रों का कहना है कि दुलहस्ती स्टेज-दो को दी गई मंजूरी केवल बिजली उत्पादन के लिए नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। भारत अपनी जल संप्रभुता का उपयोग अब उन देशों के खिलाफ एक (India Water Sovereignty) ढाल के रूप में कर रहा है जो उसकी शांति को भंग करने का प्रयास करते हैं। किश्तवाड़ से निकलने वाली बिजली और चिनाब के पानी पर बढ़ता नियंत्रण आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करेगा। अब गेंद पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में है, जिसे अपनी आतंकी नीतियों और पानी की जरूरत के बीच चुनाव करना होगा।

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