UP School Library New Guidelines 2025: योगी सरकार ने की नई पहल, अब यूपी के स्कूलों में गूंजेगी अखबारों की सुर्खी और चर्चाओं का शोर
UP School Library New Guidelines 2025: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भावी पीढ़ी को डिजिटल गुलामी से मुक्त कराने और उनके बौद्धिक विकास को एक नई दिशा देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। वर्तमान दौर में जहां बच्चों का अधिकांश समय स्मार्टफोन की स्क्रीन पर बीत रहा है, वहीं सरकार ने सरकारी स्कूलों में (Student Digital Detox Initiatives) के तहत पठन-पाठन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। अब यूपी के सरकारी स्कूलों में केवल पाठ्यपुस्तकें ही नहीं, बल्कि रोजाना अखबारों का अध्ययन और उन पर ग्रुप डिस्कशन करना अनिवार्य होगा। यह पहल न केवल बच्चों को देश-दुनिया की खबरों से जोड़ेगी, बल्कि उनमें तार्किक क्षमता का भी विकास करेगी।

सरकारी आदेश और स्कूलों की नई जिम्मेदारी
शिक्षा व्यवस्था में इस बड़े बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव सारथी सेन शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के सभी शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को जारी किए गए (State Government Education Policy) के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि हर स्कूल में अखबार और मैगजीन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों में किताबों के प्रति लुप्त होती रुचि को वापस लाना है। इसके लिए राजकीय जिला पुस्तकालयों के दरवाजे भी अब स्कूली छात्रों के लिए पूरी तरह खोल दिए जाएंगे, ताकि वे ज्ञान के इस विशाल भंडार का लाभ उठा सकें।
हर छात्र के लिए लाइब्रेरी से पुस्तक अनिवार्य
शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में एक महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया है कि अब प्रत्येक विद्यार्थी को सप्ताह में कम से कम एक किताब लाइब्रेरी से इशू करानी होगी। यह पुस्तक (Extra Curricular Reading Habits) को बढ़ावा देने वाली होगी, जैसे कि महापुरुषों की जीवनी, प्रेरणादायी कहानियां या उपन्यास। पाठ्यपुस्तकों के बोझ से हटकर जब छात्र अपनी पसंद का साहित्य पढ़ेंगे, तो उनमें स्वतंत्र सोच विकसित होगी। योगी सरकार का मानना है कि एक जागरूक और सुशिक्षित छात्र ही उन्नत समाज की नींव रख सकता है।
अभिव्यक्ति कौशल और प्रार्थना सभा का नया स्वरूप
सिर्फ किताब पढ़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि छात्रों को उस पढ़ी हुई सामग्री का सार भी सबके सामने पेश करना होगा। अपर मुख्य सचिव के निर्देशों के मुताबिक, छात्र द्वारा पढ़ी गई पुस्तक की संक्षिप्त प्रस्तुति स्कूल की (Public Speaking Skills Development) के तहत प्रार्थना सभा में कराई जाएगी। इससे बच्चों में मंच का डर खत्म होगा और उनके बोलने की कला में निखार आएगा। यह गतिविधि छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और वे अपनी बात को अधिक स्पष्टता और प्रभाव के साथ समाज के सामने रखने में सक्षम बनेंगे।
पुस्तकालय भ्रमण और संरचनात्मक समझ
छात्रों को पुस्तकालयों के प्रति आकर्षित करने के लिए अब शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इसके तहत विद्यार्थियों को राजकीय जिला पुस्तकालय या अन्य प्रतिष्ठित (Academic Field Trips) पर ले जाया जाएगा। वहां उन्हें पुस्तकालय की संरचना, पुस्तकों के वर्गीकरण और लाइब्रेरी की सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। जब बच्चे स्वयं पुस्तकालय के शांत और ज्ञानमयी माहौल को देखेंगे, तो उनमें पढ़ने के प्रति एक स्वाभाविक जुड़ाव पैदा होगा, जो उनके करियर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
छात्र बनेंगे संपादक और बढ़ेगी लेखन क्षमता
योगी सरकार की इस योजना का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि अब हर स्कूल में एक ‘विद्यालय अखबार’ या मैगजीन तैयार की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि इस मैगजीन का संपादन स्वयं विद्यार्थियों द्वारा किया जाएगा। (Creative Writing Skills enhancement) की इस प्रक्रिया में छात्र स्वयं लेख लिखेंगे, खबरें संकलित करेंगे और संपादकीय कौशल सीखेंगे। इससे न केवल उनकी लेखन शैली में सुधार होगा, बल्कि वे पत्रकारिता और संपादन की बारीकियों को भी बचपन से ही समझने लगेंगे।
सम्मान और प्रोत्साहन का नया पैमाना
छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने के लिए सरकार ने पुरस्कारों का भी प्रावधान किया है। जो विद्यार्थी महीने में सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ेंगे और उनका सारांश कक्षा या प्रार्थना सभा में बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत करेंगे, उन्हें (Student Recognition Awards) के तौर पर प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का कार्य करेगा। सरकार चाहती है कि स्कूलों में एक ऐसा वातावरण बने जहां ‘किताब पढ़ना’ गौरव की बात समझी जाए।
‘बुके नहीं, बुक’ अभियान से बदलेगी संस्कृति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच के अनुरूप प्रदेश में ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत भविष्य में होने वाले किसी भी सांस्कृतिक या शैक्षिक कार्यक्रम में विजेताओं को ट्रॉफी या फूलों के गुलदस्ते के स्थान पर (Book Gifting Culture) के तहत प्रेरक पुस्तकें भेंट की जाएंगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि उपहार पाने वाले व्यक्ति के ज्ञानवर्धन में भी सहायक होगा। योगी सरकार का यह अभियान उपहार देने की पारंपरिक शैली को पूरी तरह बदलने का सामर्थ्य रखता है।
बौद्धिक क्रांति की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह निर्णय उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ी बौद्धिक क्रांति का सूत्रपात है। मोबाइल के शोर से दूर, शांत कोनों में बैठकर किताबों के पन्ने पलटने की यह आदत (Future Generation Cognitive Growth) के लिए संजीवनी का काम करेगी। स्कूलों में अखबार पढ़ने और उन पर चर्चा करने से छात्रों में नागरिक चेतना का विकास होगा और वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उभरेंगे। सरकार की इस दूरदर्शी सोच का परिणाम आने वाले वर्षों में प्रदेश के बेहतर परीक्षा परिणामों और छात्रों के व्यक्तित्व विकास के रूप में दिखाई देगा।



