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AmalakiEkadashi – 27 फरवरी को व्रत और शुभ मुहूर्त

AmalakiEkadashi – सनातन परंपरा में एकादशी का व्रत विशेष स्थान रखता है। प्रत्येक महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष में दो एकादशी आती हैं और दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती हैं। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह तिथि 27 फरवरी को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ रखा गया यह व्रत जीवन की अड़चनों को कम करने में सहायक होता है। कई लोग इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं।

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आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व

आमलकी एकादशी का संबंध आंवले के वृक्ष से जुड़ा है। इस दिन आंवले की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि आंवला भगवान विष्णु को प्रिय है और इसकी आराधना से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि विवाह के बाद भगवान शिव और माता पार्वती पहली बार इसी तिथि पर काशी पहुंचे थे। इसी कारण वाराणसी में इस दिन विशेष उत्सव का माहौल रहता है और भक्त शिव-पार्वती की पूजा के साथ रंगोत्सव भी मनाते हैं।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि आमलकी एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि और पुण्य प्राप्ति का माध्यम माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन में नई ऊर्जा और संतुलन लाता है।

तिथि और पूजा का शुभ समय

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 26 फरवरी की रात 12 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 27 फरवरी को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर यह व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा।

पूजा के लिए प्रातः काल का समय शुभ माना गया है। इस दिन सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 9 मिनट के बीच पूजा की जा सकती है। व्रत का पारण 28 फरवरी को किया जाएगा। पारण के लिए सुबह 7 बजकर 41 मिनट से 9 बजकर 8 मिनट के बीच का समय अनुकूल बताया गया है। धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत की पूर्णता के लिए समय पर पारण करना आवश्यक माना जाता है।

पूजा विधि सरल और पारंपरिक

आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। पीले रंग को भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है, इसलिए कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।

घर के पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप और धूप जलाएं। उन्हें पीले पुष्प, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। भोग में भी तुलसी का पत्ता अवश्य रखा जाता है। इसके बाद विष्णु मंत्रों का जप और एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन संयम, दया और सकारात्मक विचारों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि विधि-विधान। आमलकी एकादशी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाने वाली तिथि है, जो आध्यात्मिक रूप से स्वयं को मजबूत करने का अवसर देती है।

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