Emotional Support Tips: संभल कर! जब कोई गहरे दुख में हो, तो भूलकर भी न बोलें ये 5 ज़हरीले वाक्य…
Emotional Support Tips: किसी प्रियजन की मौत, ब्रेकअप, नौकरी खोना या बड़ा आर्थिक नुकसान—ऐसी घटनाएं इंसान को भीतर तक हिला देती हैं (grief-management)। इस समय लोगों द्वारा कहे गए शब्द या तो सहारा बनते हैं या फिर अनजाने में दर्द बढ़ा देते हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन-सी बातें दुखी व्यक्ति के सामने बिल्कुल नहीं कहनी चाहिए, ताकि उसके मानसिक बोझ में इजाफा न हो।

वे पाँच बातें जो दुख को और गहरा कर देती हैं
कई सामान्य-सी लगने वाली बातें वास्तव में दुखी इंसान पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती हैं (empathy-skills)। ये बातें उसके भावनात्मक दर्द को कम करने के बजाय और ज्यादा बढ़ा देती हैं। इसलिए संवेदनशील समय में अपने शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए।
1. “मजबूत बनो” या “रोना बंद करो” कह देना
दुख में रोना या टूट जाना बिल्कुल सामान्य है (emotional-release)। यह शरीर का प्राकृतिक तरीका है अपनी पीड़ा को बाहर निकालने का। लेकिन जब आप किसी को “मजबूत बनो” या “मत रोओ” कहते हैं, तो आप अनजाने में उसे अपनी भावनाएं दबाने के लिए मजबूर कर रहे होते हैं।
रिसर्च के अनुसार, दबा हुआ दुख आगे चलकर डिप्रेशन या एंग्जाइटी का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति ने किसी को खो दिया हो, और आप उससे कहें—“वो नहीं चाहते होंगे कि तुम रोओ”—तो यह उसकी भावनाओं को दबाने का काम करता है। बेहतर है कि आप उसके पास बैठकर उसकी बातें शांत होकर सुनें।
2. “मुझे पता है तुम क्या महसूस कर रहे हो” कहना
हर व्यक्ति की भावनाएँ, उसका अनुभव और उसकी यात्रा अलग होती है (individual-feelings)। इसलिए किसी दुखी इंसान से यह कहना कि “मैं समझ सकता हूँ तुम क्या फील कर रहे हो”, उसकी पीड़ा को छोटा दिखाने जैसा लगता है।
दुख में व्यक्ति चाहता है कि उसकी भावनाएँ सुनी जाएँ, न कि उनकी तुलना की जाए। इसलिए इससे बेहतर वाक्य है—“मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि तुम पर क्या गुजर रही होगी, लेकिन मैं तुम्हारे साथ हूँ।” यह वाक्य उसे भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराता है।
3. “सब ठीक हो जाएगा” या “टाइम सब ठीक कर देगा” जैसी बातें
दुख के ताज़ा समय में ये वाक्य व्यक्ति को यह महसूस करवा सकते हैं कि उसकी वर्तमान पीड़ा को हाशिये पर डाला जा रहा है (support-language)। मनोवैज्ञानिक इसे “टॉक्सिक पॉजिटिविटी” कहते हैं—जहां दुख को तुरंत खत्म करने की कोशिश उल्टा असर कर जाती है।
उदाहरण के लिए, ब्रेकअप के बाद यह कहना—“नया प्यार मिल जाएगा”—वर्तमान दर्द को कमतर दिखाता है। इसके बजाय कहना चाहिए—“मैं जानता हूँ यह तुम्हारे लिए बहुत कठिन समय है, मैं तुम्हारे साथ हूँ जितना समय तुम्हें चाहिए।”
4. “ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं” या “सब अच्छे के लिए होता है” कहना
दुखी व्यक्ति अक्सर पहले ही किस्मत और ईश्वर से निराश होता है (sensitive-communication)। इस समय ऐसे धार्मिक या दार्शनिक वाक्य उसे और ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
अगर व्यक्ति धार्मिक नहीं है, तो यह वाक्य उसे असंवेदनशील और बनावटी लग सकते हैं, जैसे कि आप कह रहे हों कि उसका दुख किसी अच्छे कारण से हुआ है—जबकि वह अभी उसका कारण नहीं जानना चाहता, उसे सिर्फ सहानुभूति चाहिए।
5. “अब आगे बढ़ जाओ” या “लाइफ में बहुत कुछ है” कहना
दुख एक धीमी और लंबी प्रक्रिया है (healing-process)। यह महीनों या वर्षों तक चल सकती है। किसी को “आगे बढ़ो” कहना उसे जल्दी-जल्दी उस ग़म से उबरने का दबाव देता है, जिससे वह गिल्ट महसूस कर सकता है।
ग्रीफ एक्सपर्ट्स का कहना है—दुख को हल करने के लिए कोई टाइमलाइन नहीं होती। उदाहरण के लिए, डिवोर्स के बाद कहना—“नई जिंदगी शुरू करो”—तभी सही है जब सामने वाला खुद तैयार हो।
बेहतर वाक्य है—“जब तुम तैयार हो, तब आगे बढ़ना—मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।” यह भरोसा उसे भावनात्मक मजबूती देता है।
दुखी व्यक्ति को क्या कहना चाहिए—एक संवेदनशील तरीका
कठिन समय में यह जरूरी है कि आप अपने शब्दों से किसी का दिल न दुखाएँ (compassion-care)। ऐसे में ये बातें मदद कर सकती हैं:
उसके साथ शांत बैठें और उसकी बात बिना टोके सुनें।
कहें—“मैं तुम्हें सपोर्ट करने के लिए यहां हूँ।”
उसे अपनी भावनाएँ व्यक्त करने दें।
उसकी पीड़ा को छोटा दिखाने वाली बातें न कहें।
उसे यह महसूस न कराएँ कि वह ज्यादा रो रहा है या ज्यादा दुखी हो रहा है।
याद रखें—दुख का समय सलाह देने के लिए नहीं, बल्कि साथ देने के लिए होता है।
निष्कर्ष: संवेदनशील शब्द ही दुखी दिल को संभालते हैं
हर व्यक्ति दुख में नाजुक हो जाता है और उसी समय सही शब्द उसके लिए सबसे बड़ा सहारा बनते हैं (emotional-health)। इसलिए यह समझना जरूरी है कि हमें क्या कहना चाहिए और क्या बिल्कुल नहीं। सहानुभूति, धैर्य और साथ—यही तीन चीज़ें किसी भी दुखी इंसान के लिए सबसे बड़ी दवा हैं।



