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Indian Food Tourism: ये हैं भारत के 5 ऐसे शहर जहाँ की गलियों में बसता है स्वर्ग जैसा स्वाद…

Indian Food Tourism: भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर 100 किलोमीटर पर न केवल पानी का स्वाद बदलता है, बल्कि कड़ाही में चटकने वाले मसालों की तासीर भी बदल जाती है। अक्सर लोग छुट्टियों में (Travel Experiences) के लिए पहाड़ों या समुद्र की ओर रुख करते हैं, लेकिन हमारे देश में 5 ऐसे शहर भी हैं जहाँ सैलानी सिर्फ अपनी जुबान को संतुष्ट करने के लिए खींचे चले आते हैं। इन शहरों की पुरानी और तंग गलियों में स्वाद की ऐसी विरासत छिपी है, जो पीढ़ियों से एक ही अंदाज में परोसी जा रही है। यहाँ की सुबह तीखे पोहे की महक से होती है और रात का अंत केसरिया दूध या सुलगते कबाबों के साथ होता है।

Indian Food Tourism
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इंदौर: चटोरो का वह शहर जहाँ रात के 12 बजे के बाद शुरू होती है असली रौनक

अगर आप खाने के लिए आधी रात को भी तैयार रहते हैं, तो इंदौर आपके लिए किसी तीर्थ स्थान से कम नहीं है। इस शहर की सबसे बड़ी खासियत (Night Food Market) सराफा बाज़ार है, जहाँ दिन में गहने बिकते हैं और रात को सुनारों की दुकानें बंद होते ही चाट-पकौड़ों का मेला लग जाता है। यहाँ का पोहा-जलेबी दुनियाभर में मशहूर है, जिस पर डलने वाला ‘जीरावन मसाला’ और तीखी ‘लौंग सेव’ इसे एक अलग पहचान देते हैं। इंदौर की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप यहाँ का ‘भुट्टे का कीस’ और रबड़ी से बनी गाढ़ी ‘शिकंजी’ का आनंद न ले लें।

लखनऊ: नजाकत और नवाबी जायके का शहर जहाँ कबाब भी मक्खन की तरह घुल जाते हैं

नवाबों के शहर लखनऊ में खाना महज पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक कला है जिसमें नजाकत और तहजीब घुली होती है। यहाँ की गलियों में (Awadhi Cuisine) की वह खुशबू आज भी बरकरार है जो मुगलकाल में हुआ करती थी। अगर आप मांसाहार के प्रेमी हैं, तो ‘टुंडे कबाबी’ के गलौटी कबाब आपकी पहली पसंद होने चाहिए, जो मुंह में जाते ही रूह को सुकून देते हैं। यहाँ की बिरयानी मसालेदार होने के बजाय केसरिया खुशबू से भरपूर होती है। सर्दियों के समय लखनऊ की ‘मक्खन मलाई’ खाना एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्द बयां नहीं कर सकते।

अमृतसर: पंजाब की जिंदादिली और शुद्ध देसी घी का अटूट रिश्ता

अमृतसर की हवा में ही एक अलग तरह का अपनापन और मसालों का तीखापन महसूस होता है, जहाँ हर व्यंजन में प्यार के तौर पर एक्स्ट्रा मक्खन डाला जाता है। यहाँ की पहचान (Authentic Punjabi Food) का असली अनुभव आपको ‘अमृतसरी कुल्चा’ खाकर होगा, जिसे इमली की प्याज वाली चटनी और गाढ़े चने के साथ परोसा जाता है। स्वर्ण मंदिर के लंगर में मिलने वाली सादी दाल का स्वाद दुनिया के किसी भी पांच सितारा होटल को मात दे सकता है। अंत में, एक बड़े स्टील के गिलास में चम्मच के साथ मिलने वाली गाढ़ी लस्सी यहाँ की यात्रा को पूर्ण बनाती है।

हैदराबाद: निजामों की विरासत और मसालों का तीखा दम

दक्षिण भारत के इस ऐतिहासिक शहर में आपको मुगलई और स्थानीय मसालों का एक ऐसा फ्यूजन मिलता है जो और कहीं मुमकिन नहीं है। हैदराबाद का नाम आते ही सबसे पहले (Hyderabadi Biryani) का ख्याल आता है, जिसे ‘कच्चे गोश्त’ के साथ धीमी आंच पर दम देकर पकाया जाता है। यहाँ की बिरयानी का हर दाना मसालों की कहानी कहता है। चारमीनार की छाया में बैठकर ‘ईरानी चाय’ के साथ नमकीन ‘उस्मानिया बिस्किट’ का आनंद लेना आपको एक अलग ही सदी में ले जाता है, जबकि रमजान के दौरान यहाँ का ‘हलीम’ चखने के लिए पूरी दुनिया से लोग पहुँचते हैं।

कोलकाता: पुचके की तीखापन और मिष्टी दोई की अटूट मिठास

कोलकाता का खाना जितना सस्ता है, उससे कई गुना ज्यादा वह दिल के करीब महसूस होता है। यहाँ का ‘पुचका’ उत्तर भारत के गोलगप्पों से काफी अलग और तीखा होता है, जिसका आलू मसाला आपको दोबारा मांगने पर मजबूर कर देगा। स्ट्रीट फूड में (Kolkata Kathi Roll) का कोई मुकाबला नहीं है, जहाँ पराठे के अंदर कबाब और सॉस का बेहतरीन मेल होता है। लेकिन बंगाल का असली जादू उसकी मिठाइयों में है। मिट्टी के कुल्हड़ में मिलने वाली ‘मिष्टी दोई’ और सर्दियों का ‘नोलन गुड़ वाला रसगुल्ला’ खाए बिना आप इस शहर से विदा नहीं ले सकते।

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