Makar Sankranti 2026 Surya Arghya: मकर संक्रांति पर सूर्य देव की बरसेगी असीम कृपा, बस अर्घ्य देते समय न करें ये छोटी गलतियां वरना पछताएंगे…
Makar Sankranti 2026 Surya Arghya: हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में मकर संक्रांति का स्थान बेहद ऊंचा है। इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, जिसे ज्योतिष शास्त्र में एक युगांतरकारी घटना माना जाता है। जब सूर्य देव धनु राशि (Makar Sankranti significance) को त्यागकर मकर में आते हैं, तो देवताओं का दिन आरंभ होता है और शुभ कार्यों पर लगी रोक हट जाती है। यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा और प्रकाश के आगमन का संदेश भी देता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है, जो आत्मा की शुद्धि और पुण्य संचय में सहायक होता है।

उत्तरायण सूर्य और पुण्यकाल का विशेष समय
मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल का सही समय जानना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए आवश्यक है। इस वर्ष 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव का उत्तरायण होना मानव जीवन के लिए सकारात्मकता लेकर आएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन (Auspicious time for Puja) पुण्यकाल सुबह 07:15 बजे से शुरू होकर शाम 05:45 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में किया गया पूजन और जप-तप अक्षय फल प्रदान करता है। मान्यता है कि इस समय में सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
सूर्य देव को जल देने का ब्रह्म मुहूर्त विधान
मकर संक्रांति पर सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना सबसे उत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय के ठीक बाद जल अर्पित करना सबसे अधिक फलदायी होता है क्योंकि उस समय सूर्य की किरणें कोमल और कल्याणकारी होती हैं। शुद्ध मन (Surya Dev worship rules) के साथ जब आप तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो आपके शरीर के चक्र जागृत होते हैं। जल देते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, जिससे सूर्य की पहली किरणें सीधे आपके हृदय और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें।
अर्घ्य के लिए तांबे के पात्र का वैज्ञानिक महत्व
अर्घ्य देते समय पात्र का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। सनातन परंपरा में तांबे को सूर्य की धातु माना गया है, इसलिए अर्घ्य के लिए हमेशा तांबे के पात्र का ही प्रयोग करें। स्टील, कांच या प्लास्टिक (Copper vessel for Arghya) के बर्तनों का उपयोग पूजा की दृष्टि से वर्जित है और यह दोषपूर्ण माना जाता है। तांबा न केवल धार्मिक रूप से शुद्ध है, बल्कि इसका जल के साथ संपर्क स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी होता है। अर्घ्य के जल में गंगाजल, काले तिल, अक्षत, कुमकुम और लाल पुष्प मिलाना सौभाग्य में वृद्धि करने वाला माना गया है।
अर्घ्य देने की सही मुद्रा और शारीरिक संतुलन
अर्घ्य देते समय आपकी शारीरिक मुद्रा का सही होना अत्यंत आवश्यक है। पात्र को दोनों हाथों से पकड़कर अपने सिर के ऊपर तक ले जाएं ताकि गिरती हुई जल की धारा के बीच से आप सूर्य के दर्शन कर सकें। इस प्रक्रिया में (Sun salutation technique) जल की जो पतली धार बनती है, उससे छनकर आने वाली सूर्य की किरणें आपकी आंखों की रोशनी बढ़ाती हैं और शरीर में विटामिन-डी के स्तर को सुधारती हैं। जल चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल के छींटे आपके पैरों पर न पड़ें, इसके लिए आप किसी गमले या साफ बर्तन का प्रयोग कर सकते हैं।
परिक्रमा और मंत्रों का चमत्कारी प्रभाव
जल अर्पित करने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करना शास्त्र सम्मत नियम है। यह परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में यानी ‘क्लॉकवाइज’ होनी चाहिए। ऐसा करने से सूर्य देव की सकारात्मक ऊर्जा (Spiritual energy benefits) आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना लेती है। परिक्रमा के दौरान ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का मानसिक जप करना चाहिए। यह अभ्यास न केवल आपके एकाग्रता स्तर को बढ़ाता है, बल्कि आपके व्यक्तित्व में एक विशेष प्रकार का तेज और आत्मविश्वास भी पैदा करता है।
वस्त्रों के चयन में बरतें विशेष सावधानी
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर वस्त्रों का चयन भी आपकी साधना को प्रभावित करता है। पूजा के समय स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करना अनिवार्य है। इस दिन लाल या नारंगी रंग के कपड़े पहनना (Vastu tips for Sankranti) विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि ये रंग सूर्य देव के प्रिय हैं। काले या गहरे रंग के कपड़ों से परहेज करना चाहिए क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं। सही रंग के चुनाव से आपकी मानसिक स्थिति शांत रहती है और आप पूरे भक्ति भाव से भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त कर पाते हैं।
दान और परोपकार से बढ़ेगा पुण्य का ग्राफ
मकर संक्रांति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा और समर्पण का भी त्योहार है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के पश्चात निर्धनों को खिचड़ी, तिल, गुड़ और ऊनी वस्त्रों का दान अवश्य करें। जब आप (Charity on Makar Sankranti) दूसरों की मदद करते हैं, तो सूर्य देव की कृपा आप पर और भी अधिक बरसती है। दान की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है ताकि समाज में समानता और प्रेम का संदेश फैलाया जा सके। इस दिन किया गया दान आपके ग्रहों के दोषों को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है।



